मीरगंज के दस राजस्व कर्मियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, हड़कंप मंचा

मीरगंज, बरेली, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राज कुमार कश्यप की रिपोर्ट, 16 फरवरी 2018। बरेली जनपद में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के आवेदन पत्रों की स्थल पर जांच न कर घर बैठे जांच आख्या को तैयार करना दो कानूनगो और आठ लेखपालों को महंगा पड़ सा गया है। करीब दो साल पुराने एक अभियोग की विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच ने इन राजस्व कर्मियों की गिरफ्तारी की अनुमति मांगी है। क्राइम ब्रांच के तहसील पर डेरा डाल देने से इनमें हड़कंप सा मच गया है । 22 जनवरी 2015 को एसडीएम मीरगंज (निवर्तमान) कुंवर पंकज ने थाना मीरगंज पर धोखाधडी, जालसाजी का अभियोग पंजीकृत कराया था। जिसमें आरोप लगाया गया, कि राष्ट्रीय लाभ पारिवारिक योजना के तहत  66 महिलाओं से प्राप्त आवेदन पत्रों की स्थल पर जांच न कर लेखपालों ने घर बैठे संस्तुति कर पद के दुरुपयोग के साथ अपराध किया है। इसी तरह राजस्व निरीक्षकों ने भी  लेखपालों की जांच आख्या को अग्रसारित कर पददुरूप्योग किया है। थाना मीरगंज पर राजस्व निरीक्षकों हजारी सिंह व नुरुल हक, लेखपालों नन्हे प्रसाद, मनवीर सिंह, ब्रज लाल, अशोक कुमार, नरेश कुमार, अरुण कुमार, अनवर सईद, शिशु पाल सिंह को नामजद किया गया।
पुलिस अधीक्षक (अपराध) के आदेश पर विवेचक/उप निरीक्षक कमल सिंह यादव, एसडीएम मीरगंज राम अक्षयवर सिंह चौहान से मिले और उन्हें समूचे घटना क्रम की जानकारी दी। विवेचक का कहना है, कि आरोपी लोक सेवक हैं, जिनकी गिरफ्तारी से पूर्व नियुक्ति अधिकारी की अनुमति नियमानुसार आवश्यक है। कई बार लिखापढ़ी में अनुमति को मांगी गई है, जो नहीं मिली है। और न किसी भी न्यायालय का स्थगन आदेश ही इस विवेचना के निस्तारण में बाधक ही है। ऐसी स्थिति में गुण दोष के आधार पर इस लंबित विवेचना का निस्तारण होना है।
यहां उल्लेखनीय है कि लेखपाल नन्हे प्रसाद, अशोक कुमार व शिशु पाल सिंह सेवा निवर्त हो चुके हैं। लेखपाल मनवीर सिंह व बृज लाल सदर तहसील में सेवारत हैं। मौजूदा समय में मात्र तीन लेखपाल नरेश कुमार, अरुण कुमार और अनवर सईद मीरगंज तहसील पर कार्यरत हैं। बताया जाता है कि राजस्व निरीक्षक हजारी सिंह व नुरुल हक भी यहां नही हैं। सदर तहसील पर हैं। इन सभी ने जीवित को घर बैठे मृतक बना दिया था।
विभागीय जांच में फर्जीबाड़ा पकड़ में आया।

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