पूरी दुनिया में सच्चे निषाद वंश हितेषियों में डॉ संजय कुमार निषाद के निर्णय पर जबरदस्त खुशी की लहर

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल, 20 फरबरी 2018। केंद्र सरकार की युवा विरोधी, किसान विरोधी, मछुआरा विरोधी और सरकारी बैंकों के लुटते धन, बेरोजगारी और मेंहगाई से तंग लोगों की आशा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव पर लगी हुई हैं। सभी दलों और शुभ चिंतकों के लगातार मिल रहे संदेशों से अब दिखाई दे रहा है कि गोरखपुर में संयुक्त गठबंधन के उम्मीदवार और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय कुमार निषाद के सुपुत्र इंजी. प्रवीण कुमार निषाद भारी मतों से विनयी होंगे। भाजपा की आज दो मजबूत सरकारें हैं उत्तर प्रदेश में हैं और दोनों की ही नीतियों ने निषाद मछुआरा समाज को सबसे बड़ा धोखा दिया है। आज निषादों के घरों को तोड़ा जा रहा है। नदी किनारे बसे निषादों की खड़ी फसलों को वन विभाग द्वारा जोता जा रहा है। नदियों से बालू निकाल कर अब तक अपनी जीविका चला रहे लोगों को रोका जा रहा है। युवाओं को रोजगार देने के लिये बैंक लोन नहीं दे रहीं और चहेतों को अरबों रुपये डकारने के लिए आसानी से दिए जा रहे हैं और गवन करके विदेशों में भगाया जा रहा है। लोगों को उनकी असल समस्या से ध्यान हटाने के लिए कहीं सौचालय औऱ सामूहिक विवाह का नाटक, तो कहीं देश भक्ति के नाम पर दंगे भड़काने के लिए उकसाया जा रहा है। महिलाओं और लड़कियों की सरेआम गला काट कर हत्या की जा रही हैं। आज दलितों की मनुवादी मानसिकता से हत्या की जा रही है। भारत को कंपनियों का गुलाम बनाया जा रहा है। गुजरात के लोगों का आतंक अब पूरे देश में छाने लगा है। इन सब से बचने के लिए भाजपा से निराश और समाज वाद के मानने वाले सभी लोग जो चाहते हैं कि सभी को बराबर का दर्जा मिले। पिछड़ो को मौका मिले निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय कुमार निषाद के संयुक्त गठवन्धन के तरीके को एक सराहनीय कदम मान रहे हैं। अपने बेटे को सपा के चुनाव पर चुनाव लड़ाकर जीत सुनिश्चित कर दी है। क्योंकि निषाद पार्टी का भोजन से भरी थाली चुनाव चिन्ह अभी परमानेंट नहीं हुआ है और अगर अपने भोजन से भरी थाली के चिन्ह पर लड़ा गया होता तो भाजपा सरकार अधिकारियों से दबाब डालकर किसी निर्दलीय को वह चिन्ह दिला सकती थी। जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ता। अब जब संयुक्त महा गठवन्धन है तो अपने बेटे को चुनाव लड़ाकर किसी अनचाही परेशानी से बचने में मदद मिलेगी। और जो काम खुद सांसद बनकर डॉ संजय कुमार निषाद करते वो आसानी से अपने बेटे के माध्यम से पूरे कर सकेंगे।
डॉ संजय कुमार निषाद के उभार से कुछ तुच्छ और अब तक पार्टियों से जाती के वोट का सौदा करने वाले घबरा गए हैं। उनको लग रहा है कि अगर डॉ संजय कुमार निषाद अपनी रणनीति में कामयाब हो गए तो उनको कोई नहीं पूँछेगा। इस अब ऐसे लोग ही भाजपा से पैसे की आस में ऊलजलूल बोलने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बढ़ते सोशल मीडिया के प्रयोग और एकलव्य मानव संदेश के मजबूत प्रचार से अब इनको कोई भाव भी नहीं दे रहा है। आज सपा, पीस पार्टी औऱ निषाद पार्टी के गठबंधन को गोरखपुर में सफलता मिलती है तो 2019 में सत्ता का मूल केंद्र मूलवासी होगा।