संयुक्त प्रत्याशी के रूप में सपा के साइकिल चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे डॉ संजय कुमार निषाद के सुपुत्र इंजी संतोष कुमार निषाद

लखनऊ, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्ट, 15 फरवरी 2018। लखनऊ से प्राप्त सूचना के अनुसार निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ संजय कुमार निषाद के सुपुत्र इंजी. संतोष कुमार निषाद संयुक्त गठवन्धन के प्रत्याशी के रूप में गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के सायकिल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे एयर 
और आगामी 19 फरवरी को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इंजी.संतोष कुमार निषाद को संयुक्त गठवन्धन का प्रत्याशी बनाये जाने का पूरी निषाद पार्टी, निषाद वंस और निषाद पार्टी के शुभ चिंतकों ने जबरदस्त स्वागत किया है। समाजवादी पार्टी और पीस पार्टी भी पूरी ताकत से इस चुनाव को लड़ेगी। निषाद पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता गोरखपुर पहुंच चुके हैं और पहुंचने वाले हैं।
आगामी गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी, निषाद पार्टी और पीस पार्टी के साथ कुछ और पार्टीयों के बीच गठबंधन हुआ है। यह गठबंधन और फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव मिलकर लड़ेगा। गोरखपुर से इंजी संतोष कुमार निषाद और फूलपुर से नागेंद्र पटेल को उम्मीदवार तय किया गया है।
इंजी. संतोष कुमार निषाद पहले से ही क्षेत्र में घर घर जाकर निषाद पार्टी के प्रचार प्रसार करते रहे हैं और क्षेत्र की जनता के दुःख दर्द में भागेदारी करते रहे हैं।
निषाद पार्टी ने गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा क्षेत्र में जबरदस्त पकड़ बना ली है। और निषाद वोट भी लगभग 5 लाख हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी लगभग इतनी ही है।
भाजपा अभी तक 8 बार इस लगातार जीतती रही है और इस जीत में गोरखनाथ मंदिर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। गोरखपुर मंदिर से निषादों का सबसे ज्यादा जुड़ाव रहा है। क्योंकि यह मंदिर गोरखनाथ के गुरु मछेन्द्रनाथ उर्फ ऑगड बाबा का बनाया हुआ था। बाबा मछेन्द्रनाथ बंगाल की निषाद वंस की धींवर मछुआरा जाति के थे। इसी कारण निषाद इस मंदिर को अपना मंदिर मानते हैं। और यहीं के पुजारी अवैधनाथ को 3 बार और योगी आदित्यनाथ को 5 बार संसद में भेज चुके हैं। लेकिन इन दोनों ने आज तक निषाद इलाकों की सबसे ज्यादा अनदेखी की है।
निषाद पार्टी ने निषाद वंशियों को सही इतिहास की जानकारी पिछले 5 साल से दी जा रही है। गोरखपुर सिंघानु निषाद की राजधानी और बाबा मछेन्द्रनाथ की कर्मस्थली रही है। लोगों को इस जानकारी ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया और हर साल आने वाली बाढ़ से भी सबसे ज्यादा परेशानी निषाद वंसीय जातियों को ही होती है।
मुसलमान भी गोरखपुर में सबसे उपेक्षित हैं। इनके अपने हथकरघा के ग्रहउद्योग को ग्रहण लग गया है। लोग बेजोरगर भी सबसे ज्यादा हैं।
गोरखपुर से पलायन भी बहुत ज्यादा होता है। यहाँ के लोग अपने बीबी बच्चों को छोड़ कर दिल्ली मुम्बई, सूरत में काम की तलाश में जाते रहते हैं।
विकास यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। 70 साल आज़ाद भारत के बाद भी जापानी बुखार से सबसे ज्यादा बच्चे गरीबों और ग्रामीणों के ही मरते हैं। इसका अभी तक कोई स्थायी समाधान सांसद द्वारा नहीं कराया गया है।
इस उप चुनाव के बाद विजयी सांसद को लगभग 1 साल का समय मिलेगा। इस समय में जो भी कार्य सांसद द्वारा किया जाएगा वह 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बहुत महत्वपूर्ण होगा।
समाजवादी पार्टी ने 2017 के चुनाव में निषाद पार्टी को हल्के में लिया था। जिसका खामियाजा भी उसको भुगतना पड़ा था। अगर उस समय समझौता कर लिया गया होता तो आज बीजेपी की सरकार नहीं बन पाती। खैर देर आए दुरुस्त आये।
समाजवादी पार्टी ने निषाद वंशीय 17 जातियों को परिभाषित आरक्षण लागू किया था। जिसे आज योगी आदित्यनाथ की बीजेपी की सरकार लागू नहीं कर रही है। यह सबसे बड़ा कारण ही बीजेपी को उसकी औकात बताएगा। क्योंकि योगी आदित्यनाथ ने खुद निषाद आरक्षण की बात कही थी लेकिन आज भूल गए हैं।