जो 23 साल में नहीं हुआ आज हो गया और जो 29 साल में नहीं हुआ वो 11 मार्च को होने जा रहा है-महमना डॉ. संजय कुमार निषाद

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल रिपोर्ट, 7 मार्च 2018। जय निषाद राज
आप भी कल अकेले थे, हम भी कल अकेले थे।
यूं कहें तो हम सभी अकेले थे।
हमारी राजनितिक ऊर्जा अलग-अलग नष्ट हो रही थी।
आज मैंने उन सभी श्रोतो को एक कर दिया है।
अब आप सभी को मिलकर अपनी ताकत का एहसास दिलाना है, कि अब हम में भी राजनितिक एकता की चेतना का अवतरण हो चुका है। हम कमजोर नहीं है।
ईं.प्रवीन निषाद मेरा बेटा है, पर उसका कर्म निषाद पार्टी है। आज उसका रण क्षेत्र गोरखपुर लोक सभा क्षेत्र है। उसका रथ समाजवादी है, पर लक्ष्य समाज को सम्मान दिलाना है।
यह लड़ाई प्रवीण निषाद नहीं सम्पूर्ण निषाद वंशीय लड़ रहे हैं। समीकरण को सरल करने का कार्य मैंने किया है। यहाँ तक सभी अड़चनों को शून्य कर दिया हूँ। पर समीकरण का गुणनफल। आपके साल्व करने के निपूणता पर निर्भर करेगा।
आज आप तीन ताकतों के सम्बर्धन के केंद्र के रूप में देखे जा रहे हैं-
1- सपा के साथ तालमेल।
2-सपा-बसपा का साझीदार होना।
3-आप के संख्या की बहुलता।
इन सभी का संतुलन केवल जीत है।
जीत सपा, बसपा और आपकी बहुलता पर होना तो निश्चित है। पर जरा भी हम निषाद वंशीय चूके, तो हार का पूरा श्रेय हम निषाद वंशियों के सिर आएगा।
और पूरे देश में सन्देश जाएगा कि हम एक नही हैं और देश की राजनितिक पार्टिया हमारे अस्तिव तक को नकार देंगीं।
लेकिन यह जीत देश के राजनीती में 85% के सहभागिता व साझेदार का श्रेय निषदवंशियो को तब तक देती रहेंगी जब तक भारतीय लोकतान्त्रिक राजनीति जीवित रहेगी।
मैं और आप कुछ वर्षो तक रहेंगे, पर यह जीत और 85% के एककृति होने के कारण, निषाद वंशीय, भारतीय राजनीति में सदैव अमर रहेंगे।
निषाद वंशीय अधिकारों के युद्ध के नायक तो सदियों से रहे हैं। पर इतिहास में आपका जिक्र नहीं है। पर इस बार आपके जिक्र के बिना इतिहास लिखा ही नहीं जायेगा !!
जय निषाद राज 
जय समाज वाद 
जय भीम
अस्सलावेकुम
बहुजन हिताय बहुजन शुखाय
जय भारत
डॉ. संजय कुमार निषाद
राष्ट्रीय अध्यक्ष
निषाद पार्टी