उपचुनाव हुआ सम्पन्न, ईवीएम खराबी से मतदान प्रभावित, मतदान को लेकर शहर की अपेक्षा ग्रामीण रहे उत्सुक

अलीगढ़, लोकसभा उप चुनाव पर जौनपुर एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो चीफ प्रदीप कुमार निषाद की विशेष रिपोर्ट 12-03-2018। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में 10 तथा 22 उम्मीदवार मैदान में थे बड़ी पार्टियों में सपा, भाजपा, महागठबंधन बनाम प्रतिष्ठा की जंग, शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की 65 कंपनियां तैनात की गई थीं। मतदान के लिए 970 मतदान केंद्र बनाए गए थे तथा 2141 पोलिंग बूथ बनाए गए थे। कुल 19 लाख 49 हजार मतदाता थे जिनमें 8 लाख 76 हजार महिलाएं थी। केंद्रीय बलों की 33 कंपनियां सुरक्षा हेतु तैनात थी 13 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। जिसमें पुलिस पीएसी, होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षाकर्मी के माध्यम से कड़ी चौकसी बरती गई थी। प्रलोभन आदि से बचाने के लिए निर्वाचन क्षेत्र के आसपास में शराब की बिक्री व वितरण निषेध कर दी गई थी। प्रत्येक बूथ पर एक माइक्रो आब्जर्वर तैनात रहा। सभी बूथों की वीडियोग्राफी की जा रही थी। सुचारू मतदान के लिए 156 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्ण संपन्न कराया गया। मतगणना 14 मार्च को होगी गोरखपुर में 43% तथा फूलपुर में 37.39℅मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया ।32 उम्मीदवारों में 3 महिलाएं शामिल थी। भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो गया। दोनों सीटों की मतगणना 14 मार्च को होगी। 
वोट डालने को लेकर शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अधिक उत्सुक दिखे। सूची में नाम गायब होने तथा पर्ची वितरण नहीं किए जाने को लेकर कई जगहों पर शिकायत करते लोग देखे गए।खराब मशीन को बदलवाने में कम पड़ा मतदान।
गोरखपुर के हरगोविंद मल्लाह का कहना है कि 838500 वोट पड़े हैं इस बार सदर संसदीय सीट गोरखपुर के उप चुनाव में। कम मतदान सत्ता पच्छ के खिलाफ लोगों के गुस्से को दर्शाता है। योगी की नुक्कड़ सभाओं में गायब भीड़ की भांति लोग मतदान से इसलिए गायब रहे क्योंकि योगी जी ने शहरी मतदाताओं से पुरजोर अपील की थी की शहर के लोग 60 प्रतिशत मतदान कर जीत सुनिश्चित करें।शहरी मतदाताओं ने योगी को ठेंगा दिखाया है। स्वर्गीय बीर बहादुर सिंह आज फिर गोरखपुरिया जनमानस में जीवित हो उठे हैं। स्वर्गीय सिंह के विकास कार्यों की परछाई भी नजर नहीं आती योगी जी। भौकाल बना कर बीर बहादुर नहीं बना जा सकता है। उसके लिए काम करना होता है। योगी का काम बीर बहादुर सिंह के गोरखपुर में खँडहर हो रहे कामों के बराबर भी नहीं है। और अखिलेश यादव के भी पासंग नहीं, जिनके नेतृत्व में पर व्यक्ति सालाना 15 हजार इजाफा और मातृ शिशु मृत्यु दर में 90 प्रतिशत गिरावट आयी थी। गोरखपुर के लोग ये बात जानते हैं। इसलिए योगी जी आप हार रहें हैं।
कल 43 प्रतिशत चिल्लाने वाले टीवी चैनल सही हैं या आज जो पेपर कह रहे हैं कि 48 प्रतिशत मतदान हुवा। कही ये बेईमानी की शुरुवात तो नहीं है।