ईवीएम से इलेक्शन जीतने के प्रयास को कौनसा आतंकवाद कहें ?

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल रिपोर्ट, 12 मार्च 2018। भारत चुनाव हमेशा विवादित रहे हैं। पहले वोट वैलेट पेपर से डाले जाते थे और जमीदार अपने गुंडो के बल पर गरीबों के वोट पर कब्जा कराकर जीतते थे। फिर गुंडे माफिया खुद ही मैदान में उतरने लगे और जमीदार की जगह खुद चुनाव जीतने लगे। फिर इससे बचने के लिए ईवीएम मशीन लाई गई। चुनाव निष्पक्ष होने लगे औऱ गरीब, कमजोर वर्ग के लोग भी चुनाव जीतने के साथ सरकार भी बनाने लगे। सपा, बसपा, तृणमूल, चंद्रबाबू नायडू, लालू प्रसाद यादव, आदि इसी की मुख्य देन रहे। अब पूंजीबाद, सामंतबाद, मनुबाद को इनके उभरने से कमजोरी लगने लगी। इनकी काट के लिए हिन्दू मुस्लिम कार्ड, मंदिर कार्ड, पाकिस्तान, चीन और वर्मा, बंगला देस कार्ड, गाय कॉर्ड, आरक्षण हटाओ कार्ड, और न जाने कितने कार्ड लेकर एकसाथ सामंतवादी, पूंजीवादी ताकतों और आरएसएस ने एक मजबूत गठजोड़ करके देस की 90 प्रतिशत जनता को ईवीएम की नई हैकिंग तकनीक के सहारे आतंकित कर दिया है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इस तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया। जा इस पर शोर मचा तो अभी सम्पन्न 11 मार्च के गोरखपुर और  फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में एक और नई तकनीक सामने आई है, वो है मशीन को हैककर खराब कर देना। और इन चुनाव में सैकड़ो मशीनों के 11 बजे के बाद एकसाथ सैकड़ो जगहों से खराब होने की सूचना मिली। ये मशीनें एक बड़े सडयंत्र के तहत खराब हुईं हैं। क्योंकि कि फूलपुर में पिछली बार, केवल एक बार ही भाजपा चुनाव जीती थी और गोरखपुर में लगातार 8 बार विपक्ष के बटवारे का लाभ योगी आदित्यनाथ को मिलता रहा और गोरखपुर विकास में पिछड़ता चला गया। योगी जी 5 बार सांसद बनकर भी अपने क्षेत्र का विकास नहीं कर सके और अब एक साल में भी वहां के लोगों के हिस्से में 1000 से ज्यादा बच्चों की मौत और विनाशकारी बाढ़ का प्रकोप मिला पर योगी सरकार आज तक इससे बचाब के लिए कुछ भी नहीं कर सकी है। और इसी प्रकार केंद्र की मोदी सरकार भी पूरी तरह से विफल सवित रही है। बेरोजगारी, किसान आत्महत्या, कुपोषण बड़े हैं। विकास दर घटी है। मोदी सरकार के चहेते सरकारी बैंकों के पैसे डकार कर विदेश भाग रहे हैं। आम आदमी का जीवन स्तर गिरा है, लोगों पर अपने घरों में सौचालय बनाने एवं बेटियों की शादी के लिए पैसे नहीं हैं। वावजूद इसके मोदी के सहयोगी मुकेश अंबानी, अडानी और बालकिशन की अमादनी में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। अब भारत इनके मजबूत जोड़ ने देश में एक नया आतंक फैलाया है, वो है ईवीएम घोटाले का। अब आम आदमी को लगने लगा है कि जब वोट हैक ही हो जाता है तो, फिर वोट डालने की क्या जरूरत है। ये इस चुनाव में इस बात से सिद्ध होता है कि शहरी इलाकों के लोग वोट डालने ही नहीं गए। क्या 11 मार्च को कोई इंडिया पाकिस्तान का मैच था। क्या 11 मार्च को ज्यादाशर्दी पड़ रही थी या तेज़ वर्षात हो रही थी। जी नहीं, उस दिन 11 बजे से ही सूचना मिलने लगी थीं कि वोटिंग मशीन खराब ही रही हैं। वोट ही नहीं डल पा रहे हैं। और भाजपा इन चुनावों में बड़ी बुरी तरह से हर रही है। क्योंकि इस बार के चुनाव में 90 प्रतिशत वोट सपा, बसपा, निषाद पार्टी, पीस पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, एनसीपी, कम्युनिस्ट पार्टी और कुछ छोटे छोटे दलों के एकजुट होने से भाजपा को बुरी तरह से हरा रहे हैं। जब यह बात भाजपा, आरएएस और पूंजीवाद के गठजोड़ को पता चली तो फिर वोटिंग मशीन को खाराब होने की चाल चली गई। मशीनें या तो बदली ही नहीं गईं और अगर बदली  गईं तो बहुत लेट बाद बदली गईं। फिर भी इन दिनों उपचुनाव में भाजपा बड़े अंतर से हार रही है। लेकिन जो गठबंधन इस उपचुनाव में बना है अगर यह मजबूत की साथ 2019 का चुनाव लड़ता है तो भाजपा को उत्तर प्रदेश में 8 सीट भी नहीं मिल सकती हैं। और ईवीएम के आतंक से बचकर गरीब, किसान, नौजवान का विकास के विकास को गति देकर भारत को सोने की चिड़िया बनाया जा सकता है।