दलित पिछड़ो भाजपा और आरएसएस की कुटिल चाल से सावधान रहना

अलीगढ़, एकलव्य मानव संदेश सोशल मीडिया रिपोर्ट साभार व्हाट्सएप से ली गई, 27 मार्च 2018। दोस्तो, देश में इन दिनों समाज को बांटने तथा अपनी छिपी विचारधारा को लागू करने के लिए आरएसएस समर्थित भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहुत ही खतरनाक चाल चल रही है। बहुसंख्यक पिछड़े और दलित समाज को तोड़कर, समाज को बांटकर सत्ता पर काबिज होने के लिए पिछड़ों को पिछड़ों तथा दलितों को दलितों से लड़ाने की तैयारी में है। क्योंकि इनको पता है कि बिना पिछड़ों और दलितों को साथ लिये वापस 2019 में चुनाव जीतना इनके लिए मुश्किल है। इसलिए अति पिछड़ों और अति दलितों को रिझाने के लिए भारतीय जनता पार्टी आरक्षण के अंदर आरक्षण देने की बात कर रही है। जिससे 2019 के चुनाव को वे आसानी से जीत सकें। बीजेपी का तर्क है कि समाज के कमजोर और अति पिछड़े और दलितों में अति दलित समुदाय को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है, इसलिए वह आरक्षण को बांटना चाहती है। दोस्तों हमें याद रखना चाहिए कि मंडल कमिशन जब लागू हो रहा था तब सबसे ज्यादा विरोध आरएसएस के लोगों ने किया था। उच्च जाति के लोग हमेशा से हमें पिछड़ा और दलित कह कर हमारा अपमान करते रहे हैं और आज वोट की राजनीति के लिए हमें आरक्षण देने की बात कर रहे हैं। क्या यह सच नहीं है कि दलित को दलित और पिछड़ों को पिछड़ा बनाये रखने का काम इन लोगों ने नहीं किया है। योगी से पहले राजनाथ सिंह जी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भी इसी तरह की कोशिश की थी। उस समय समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह ने इसका जोरदार विरोध किया था। अब इसी तरह की कोशिश प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने की है। भारतीय जनता पार्टी कभी भी दलितों और पिछड़ों को सवर्णों के बराबर लाना नहीं चाहेगी। यह सरकार समाज में केवल विद्वेश पैदा कर राजनीतिक दाव खेल रही है। भारतीय जनता पार्टी न तो पहले थी और न आगे रहेगी। यदि सच में ये दलितों और पिछड़ों का उद्धार करना चाहती तो तमाम विभागों में पिछड़ों और दलितों की पोस्ट खाली हैं, जिसे अब तक नहीं भरा गया है। क्यों नहीं उन पदों पर मोदी और योगी जी अति दलित और अति पिछडों की ही नियुक्ति कर देते। ऐसा करने से कौन इनको रोक रहा है। 
एक बात हमें नहीं भूलनी चाहिए कि आरक्षण केवल सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में लागू होता है। सरकार सारी सरकारी संस्थानों में कान्ट्रेक्ट के आधार पर खाली पदों पर अपने लोगों को रख रही है, ऐसे में आरक्षण यहां लागू नहीं होता। इस तरह से सरकार सवर्ण लोगों को पिछले दरवाजे से नौकरियां देने का काम कर रही है। दोस्तों आजकल सरकार सभी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के प्रमुख विभागों में आरएसएस की विचारधारा के समर्थक तथा ऊंची जाति के लोगों को खुलेआम नियुक्त कर रही है, जो लोग नौकरियों की परीक्षाओं और नियुक्तियों में ऊंची जाति के लोगों की मदद कर रहे हैं। मैं पिछड़े एवं दलित समाज के लोगों से कहना चाहता हूं कि आप बीजेपी के भुलावे में न आते हुए वापस 2019 में इन्हें सत्ता से बेदखल करें। नहीं तो हमें गुलामी में जीने के लिए तैयार होना पड़ेगा। इसके लिए सभी पिछड़ों और दलित समाज को एक होना होगा। (व्हाट्सएप से साभार लिया गया)