डर गये योगी जी संयुक्त गठबंधन की संभावित जीत से,गोरखपुर की जनता चाहती है छुटकारा झूठों से

गोरखपुर, एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 10 मार्च 2018। गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रचार अब खत्म हो चुका है, कल 11 मार्च को वोट पड़ने हैं। गोरखपुर की यह सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद त्यागपत्र देने से रिक्त हुई थी। योगी 5 बार और उनके गुरु 8 बार इस सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं और यही वजह है कि उनको उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान मिली। लेकिन गोरखपुर की जनता इन दोनों को गोरखनाथ मंदिर के सहारे यहाँ तक पहुंचाने के बाद भी ठगी सी महसूस कर रही है।
गोरखपुर में बीते साल आयी विनाशकारी बाढ़ में हुये भारी नुकसान और जापानी बुखार से मरे हज़ार से ज़्यादा बच्चों के लिए एक सांसद के रूप में और अब एक मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। योगी जी आज तक इलाके की गरीब जनता से भगवान के सहारे वोट लेकर केवल दुख ही परोसते रहे। निषाद आरक्षण को अब तक लटकाए रखने के लिए भी योगी और मोदी ही जिम्मेदार हैं। शिक्षा मित्रों पर गोरखपुर में बरसी लाठियों के लिए भी योगी जी जिम्मेदार हैं। बैंकों को लूटकर विदेश भागने वालों के लिए मोदी खुद जिम्मेदार हैं। सड़कों पर सोनी कश्यप की सरेआम गर्दन काटे जाने के लिए, अलीगढ़ में दवंग ठाकुरों द्वारा गरीब कश्यपों को बुरी तरह से घायल कर उल्टा सरकारी दवाब में उनके खिलाफ ही मुकद्दमा दर्ज होने के लिए योगी सरकार ही जिम्मेदार है। 
मुख्यमंत्री की नाक के नीचे लखनऊ में महिला हेल्प लाइन में महिलाओं पर हुए अत्यचार के लिये योगी सरकार ही जिम्मेदार है। आलू किसान की दुर्दशा के लिए भी यही सरकार जिम्मेदार है। बढ़ती बेरोजगारी के लिए योगी मोदी सरकार ही जिम्मेदार है।
बालू खनन से परम्परागत रूप से लगे निषादों को बेदखल करने के लिए योगी सरकार ही जिम्मेदार है।  ऐसे तमाम मुद्दों के वजह से भाजपा को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के विकास की दो एक दूसरे की दुश्मन पार्टियों को लगा कि प्रदेश और देश हित में एक होना जरूरी है तो भाजपा की लुटिया डूबती देख योगी जी घबरा गए हैं और अब गोरखपुर को बचाने के लिए निषाद प्रधान और बीडीसी जैसे लोगों को डरा धमकाकर भाजपा की सदस्यता दिलाकर भाजपा को जिताने के लिए अपनी पूरी सरकार को ही लेकर गोरखपुर की गलियों में धूल फांक रहे हैं।

गोरखपुर और फूलपुर में हो रहे उपचुनाव में समाजवादी पार्टी, निषाद पार्टी, पीस पार्टी गठबंधन को बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, एनसीपी, कम्युनिस्ट पार्टी के साथ छोटी-छोटी पार्टियां एकजुट होकर उत्तर प्रदेश में बदलाव के लिए एकसाथ आये हैं। और इस एकजुटता को देखकर अब भाजपा के गठबंधन को छोड़ कर क्षेत्रीय भागने लगे हैं।
इसबार गोरखपुर की लड़ाई 20 प्रतिशत वनाम 80 प्रतिशत की हो गई है। जनता योगी के झूठे वायदों से मुक्ति चाहती है और एक नये व ऊर्जावान चहरे इंजी.प्रवीण कुमार निषाद को इसबार गोरखपुर का प्रतिनिधि बनाने का मन बना चुकी है। अब भाजपा के हिंदू मुस्लिम के नाम पर न बटकर सभी को बराबरी के साथ जीने और कमाने के लिए एक साथ मिलकर चलना चाहती है। गोरखपुर में इसबार भाजपा की हर से 2019 में भाजपा को केंद्र सरकार की गद्दी से हटाने की पहली कसरत भी मानी जा रही है। इससे योगी आदित्यनाथ जी की नींद उड़ गई है। 

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