लापता छात्रा कु.नीरज निषाद का पंचनद बीहड़ के जंगल के नाले में शव मिला

जालौन, एकलव्य मानव सन्देश रिपोर्टर पिंटू निषाद की रिपोर्ट, 16 अप्रैल 2018। जालौन जनपद के रामपुरा थाना अंतर्गत ग्राम शिवगंज निवासी लालाराम निषाद की 19 वर्षीय पुत्री नीरज उर्फ बउआ दो दिन से लापता थी जिसका शव पंचनद बीहड़ के नाले में तैरता हुआ मिला। 
 नीरज निषाद ग्राम जगम्मनपुर के पंडित परशुराम द्विवेदी महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी । दिनांक 11 अप्रैल को वह अपने पिता से परीक्षा देने की बात कह करघर से निकली थी औऱ फिर वापिस नहीं लौटी। 
लालाराम ने अपनी पुत्री की तलाश रिश्तेदारियों और पहचान वालों को फोन कर की, लेकिन नीरज का पता नहीं चला सका। शुक्रवार की सुबह बकरी चराने गए बच्चों ने जगम्मनपुर कन्जौसा रोड पर जंगल के एक नाले में किसी लड़की का शव पानी में तैरता देखा और उसकी जानकारी उन्होंने अपने गांव में दी और गाँव से शिवगंज तक लालाराम तक पहुंची। मौके पर पहुंच कर लाला राम ने शव की शिनाख्त अपनी पुत्री के रूप में की और घटना की सूचना रामपुरा थाना पुलिस को दी। पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंच कर शव का पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस प्रकरण में प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है यह मामला प्रेम प्रसंग का है। मृतका नीरज चार बहनें हैं जिसमें तीन बड़ी बहन किरण, सुमन एवं आरती का विवाह हो गया है। माता मुन्नी देवी की मृत्यु के बाद से नीरज ही अपने घर का कामकाज संभालती थी। घर पर पिता लालाराम से मिलने जुलने वालों का आना जाना भी था। घर की जिम्मेदारी संभालने की साथ साथ वह अपनी पढ़ाई भी कर रही थी।
 बी ए प्रथम वर्ष की छात्रा जिसकी वर्तमान में परीक्षा चल रही है लेकिन दिनांक 11 अप्रैल को वह जिस विषय का पेपर देने की बात कहकर घर से निकली थी वह झूठ बोली थी क्योंकि 11 अप्रैल को शाम 3:00 बजे से संस्कृत साहित्य द्वितीय प्रश्न पत्र की परीक्षा थी वह भी निरस्त हो गई थी।  नीरज ने विषय में हिंदी साहित्य ,हिंदी भाषा ,भूगोल , गृह विज्ञान, पर्यावरण एवं मानवाधिकार ले रखे थे। 
11 अप्रैल को नीरज की परीक्षा नहीं थी इससे अनुमान लगाया जाता है की नीरज किन्ही षड्यंत्रकारियों के प्रेम प्रसंग में फंसकर बलात्कार  के बाद हत्या का शिकार हुई हो, क्योंकि जहां पर नीरज का शव मिला है वहां घुटनों तक पानी है, जिसमें डूबकर कोई मर नहीं सकता तथा सामान्यतः जंगल के इस सुनसान इलाके में कोई युवती अकेले आने की हिम्मत नहीं कर सकती। दूसरी तरफ पिता लालाराम द्वारा दो दिन से लापता पुत्री की गुमशुदगी पुलिस में दर्ज न कराया जाना घोर लापरवाही का प्रतीक है। और शव मिलने पर ही पुलिस को घटना की सूचना देना मामले को पेचीदा बना रहा है।

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