नम आंखों से आसिफा को श्रद्धांजलि ....

महारणगंज, एकलव्य मानव संदेश की प्रस्तुति, 17 अप्रैल 2018। 
मनोज कुमार पाण्डेय लोकमत केे कलम से आसिफा की करूण पुकार के लेख से हुई सबकी आँखे नम   !!!
 शायद आप भी एक छोटी सी नन्ही सी आसिफा के पुकार को सुनकर अपने आँखो को नम होने से नही रोक पाएंगे !!

       आसिफा!!
   रोती! !           हुई !!
माँ मेरा कसूर नही था, एक चाचू से चॉकलेट ही तो ली थी ..
पापा सा वो लगता था।
मुझे बोला तुम बेटी हो मेरी !!
उसके पहलू मे बैठ गई मै चॉकलेट खाती, बाते करती ..उस चाचू ने हाथ मेरे सर पर जो फेरा ..
मै समझी थी इंसान ही होगा ... उसकी भी कोई बेटी होगी शायद उसने इसलिए चूमा मुझको..
मै भी खुश होकर गले से लग गयी....
माँ मेरा कसूर नहीं था...... एक चाचू से चॉकलेट ले ली ..
10 का नोट भी पकड़ाया था मुझको जैसे पापा याद आये ...
खुशी से रूपये  लेकर सोची मैने .. चाचू के पैसे से दो रूपये की  चॉकलेट और भी लेनी है मुझको  ..फिर तीन रुपये  भइया को दुँगी ..
पाँच रुपए  की गुडिया भी लेनी है मैने..
ऐसे मे वो बाते करती घर से दूर ले आया मुझे..
माँ मेरा कसूर नहीं था ..इक चाचू से चॉकलेट ले ली , 

मुझको कुछ भी समझ ना आया.. उसने अचानक लहजा बदला..
मुझे यू जमीन पर लोटाया .. मुँह मेरा जो बंद किया तो...
मुझे फिर मालूम नही था..
चिल्लाकर तुझको बुलाना चाही ऐ माँ ..
माँ मेरे मासूम से जिस्म को चाचू ने माँस का टुकड़ा समझा..
कुत्ते की तरह काटा मुझको.. बिल्ली की तरह वो देख रहा था. ..
माँ अब मै सह ना पायी .. आज तेरी कली मुरझा गई..
माँ मेरे हाथ मे देखो... एक चॉकलेट तो खाली थी मैंने..
और एक हाथ में होगी ..
माँ अबकी बार अगर पैदा होऊँ मैं .. मुझको खुद से दूर ना करना
माँ सुनो, सुनो मैं माँस का टुकड़ा थी क्या.???
मैने क्या मांगा था.??
एक चॉकलेट के बदले?
मेरी माँ मै जान गवाकर आयी !!
माँ  मैं चिड़िया थी तेरी..
एक दाने पर जान गवाई ..
सुनो माँ अबकी बार पैदा होऊँ मैं, तो मुझको खुद से दुर ना करना !!

माँ मेरा कसूर नही था..
माँ मै बहुत रोई चिल्लाई लेकिन दरिन्दे चाचू ने मेरी एक भी न सुनी और मेरे जिस्म को कुत्ते की तरह नोच-नोच कर खाते रहे और मै चिल्लाती रही !!
रोती रही लेकिन मेरे शरीर को बचाने कोई न आया!!
और अंत मे माँ आप को पुकारती हुई थक कर मायूस होकर आपकी कली मुरझा गई