पुलिसिंग छोड़ रोड वसूली में जुटी चौकी पुलिस, शहर में चोरी, छिनैती में आबूनगर एक नम्बर

फतेहपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राम बहादुर निषाद की कलम से, 15 अप्रैल 2018। जनपद फ़तेहपुर में बीते कुछ दिनों पहले हुई कई घटनाओं से कोतवाली पुलिस की जमकर किरकिरी हुई है। लगभग 10 दिन पूर्व नई बस्ती आबूनगर में हुए हत्याकांड में चौकी पुलिस की भूमिका भी शक के घेरे में है। माना जा रहा है कि जब एक बार विवादित जमीन पर कब्जा कराने लेखपाल के साथ पुलिस गई थी और जनता के विरोध पर लौटना पड़ा था तो दोबारा बिना पुलिस के लेखपाल का 50-60 सशस्त्र हमलावरों के साथ पहुंचना इस बात की ओर इशारा करता है कि भूमाफिया घटना का उद्देश्य बनाकर ही गये थे, जिसमें लेखपाल और चौकी पुलिस की मिलीभगत स्पष्ट दिखाई देती है। वहीं वर्षों से थाने चौकी में जमे ये दरोगा अपराध नियंत्रण व पुलिसिंग के बजाय अपनी जेब भरने में ब्यस्त हैं। 
आपको बता दें कि सदर कोतवाली की आबूनगर चौकी क्षेत्र चोरों बदमाशों का मुफीक अड्डा बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में चोर, बदमाश आराम से घटना को अंजाम देते हैं और फुर्र हो जाते हैं। वहीं आज तक चौकी पुलिस क्षेत्र में हुए किसी भी बड़े अपराध का खुलासा नहीं कर पायी है। विगत कुछ महीनों के अंदर आवास विकास में दूध लेने जा रही महिला से चेन लूटना (जिसका फुटेज भी है), पृथ्वी पुरम में ग्राम विकास अधिकारी के घर चोरी, ताम्बेश्वर के करीब बन्द मकान में बड़ी चोरी, सीओ ऑफिस के समीप एक फौजी के घर में चोरी, हाल ही में रेनाल्ट शोरूम में लगभग 35 लाख की चोरी (चोरों का सी सी टी वी फुटेज होने के बावजूद), डाकबंगले के समीप किसान से पचास हजार की टप्पेबाजी सहित बिंदकी बस स्टॉप से बोलेरो चोरी के मामले में आज तक पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इसी का फायदा उठाते हुए पुनः बेख़ौफ़ बाइक सवार बदमाशों ने बिंदकी बस स्टॉप के समीप महिला से चलती गाडी में चेन लूट ली जिसके बाद महिला ने 100 नम्बर डायल किया जो लगभग एक घन्टे बाद मौके पर पहुंची। इसी बीच महिला आबूनगर चौकी भी गयी, मगर वहां से भी कोई मदद नहीं मिल पाई। 
महिला मिथलेश एक आंगनवाड़ी कार्यकत्री हैं। जिनके पति फ़ौज में थे। वह अपने परिवार के साथ सिविल लाइन में रहती हैं और सदर से अपना इलाज कराकर वापस लौट रही थीं। माना जाता है कुछ समय से आबूनगर क्षेत्र अपराधियों के लिए सुरक्षित अड्डा बनता जा रहा है। कितनी भी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी फरार हो जाता हैं और पुलिस हाथ मलती रह जाती है। माना जा रहा है कि नई बस्ती में हुए हत्याकांड की भी मुख्य वजह चौकी पुलिस की अकर्मण्यता है। असल में आबूनगर पुलिस का अधिकतर ध्यान रोड वसूली पर रहता है। यहां के ज्यादातर सिपाही नउआबाग़ मोड़ में ही नजर आते हैं और शाम होने के बाद से ही ट्रकों से इनकी वसूली शुरू हो जाती है। 
नो एंट्री में शहर के अंदर से ये ट्रकों को गुजारते हैं जो डाकबंगले के सामने से ताम्बेश्वर हो कर निकलते हैं। दो सिपाही मंडप गेस्ट हाउस के समीप भी खड़े होकर पूरी रात वसूली को अंजाम देते हैं। ऐसे में जब स्थानीय पुलिस का पूरा ध्यान रोड वसूली में है, तो इनसे पुलिसिंग की क्या उम्मीद करें ? 

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