यूँ तो कोई लौट कर आता नहीं किन्तु कुछ लोग सदैव याद आते हैं

मुरादाबाद, एकलव्य मानव संदेश के लिए कुलदीप तुरैहा की रिपोर्ट, 30 अप्रैल 2018। वर्ष 1990 का दौर था युवाओं को जब यह पता चला कि हम तुरैहा जाति के लोग है और हमें सरकार द्वारा अनुसूचित जाति में रखा गया है । तब समाज के वरिष्ठ बुद्धिजीवी लोगो ने युवाओं को समाज को जोड़ने के लिये मेरठ तुरैहा समाज के कुलभूषण रामावतार मधुर एडवोकेट जी के तत्वाधान में मुझे मुरादाबाद मण्डल में अखिल भारतीय तुरैहा युवा समाज का अध्यक्ष पर मनोनीत किया गया । किन्तु युवा वर्ग के इस संगठन के लिये एक अदद कार्यालय की आवश्यकता थी । तब ऐसे में समाज के वरिष्ठ समाज सेवी श्री रमेश चन्द्र तुरैहा जी ने हमें मोहल्ला क़ानूनगोयंन हाथी वाले मन्दिर पर हमें अपने आवास पर मण्डलीय कार्यालय की स्थापना करायी । जिसका उदघाटन रामपुर से श्री दिलीप तुरैहा जी के नेतृत्व में निकाली गयी तुरैहा सन्देश रथयात्रा द्वारा भव्य रूप में किया गया । आज दुर्भाग्य से रमेश चंद्र तुरैहा जी पंचतत्व में विलीन हो गए । मेरे पास उनके सराहनीय योगदान के लिये कोई शब्द नहीं है । किंतु तुरैहा दिग्दर्शन नामक पुस्तक में वह सदैव हमारे प्रेरणा स्रोत रहेंगे ।तुरैहा मछुआरा समाज उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत शत नमन करता है।

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