फतेहपुर जिले के अस्पतालों में हो रही है मरीजों से धन उगाही

फतेहपुर, एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राम बहादुर निषाद की रिपोर्ट, 30 अप्रैल 2018। फतेहपुर जनपद में जिला अस्पताल के साथ-साथ जिले के अन्य सी.एच.सी.व पी.एच.सी.में नियुक्ति चिकित्साधिकारी व कर्मचीरियो द्वारा विभागीय आलाधिकारियों से सांठ-गांठ के करके अस्पतालों में आए मरीजों से कई तरीकों से धनउगाही उगाही की जा रही है।
        यूं तो सरकारें गरीबों के लिए नई-नई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उनको लाभ पहुचाने का प्रयास करती हैं, परन्तु उन्हें अमलीजामा पहनाने का काम उच्च विभागीय अधिकारी के मातहतों से होता है। ये सभी पूरी तरह से भृष्टाचार में डूबकर इन योजनाओं को पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भ्रस्टाचार फतेहपुर जनपद इन दिनों मोदी व योगी सरकार में अपनी चरम सीमा पार कर चुका है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग व स्वास्थ्य मंन्त्री की लापरवाही ने, डॉक्टरों की मनमानी को इस कदर बढ़ावा दे दिया है कि न तो चिकित्सक व कर्मचारी सुनिश्चत समय से अस्पताल आते हैं। और कई चिकित्सकों का प्रतिदिन न पहुंचना तथा दो हफ्ते बाद पहुंचकर घंटे दो घंटे रुककर उपस्थति रजिस्टर में फर्जी तरीके से अनुपस्थति शेष दिनों पर भी उपस्थति दर्ज करके अपने-अपने प्राइवेट केबिनों में जाकर अनुचित फीस के साथ मरीजों का इलाज करते हैं। सरकारी व प्राइवेट जगह में बैठकर धड़ल्ले से मोनोपोली कमीसन वाली दवांए और जांचें लिखकर लाभार्थी मरीजों के साथ इलाज के नाम पर पूर्णत: अवैद्ध वसूली का कार्य उच्च अधिकारियों व प्रदेश तथा केन्द्र सरकार के निर्वाचित सदस्यों की कमियों से ही तो हो कर रहे हैं ये सब।
 अगर कोई प्रताड़ित मरीज शिकायत करता है तो पूर्ण रूप से विभागीय बचाव करते हुए पीड़ित गरीब मरीज को ही दोषी बना दिया जाता है।  कोई-2 पीड़ित मरीजों का कहना होता है कि अब वह सरकारी अस्पताल नहीं रहे है जो कभी हुआ करते थे। अब सिर्फ मरीजों से इलाज की आड़ से साइड कमीशन के रूप में ठगाही का धंन्धा बना लिया है। सरकारी वेतन के साथ-2 बीमार पीड़ित ब्यक्ति की रकम को ठगाही करके अपने घर में उजाला करते हैं और गरीब लाचार के घरों में अँधेरा ही रह जाता है।
 प्रत्येक चिकित्सा केन्द्र में एक या दो चिकित्सक अगर सही तरह से गरीब बीमार लेगों की मदद करते हैं तो कमीसन बाज चिकित्सक अधिकारी उन्हे भी अपनी कैटागरी में शामिल कर लेते हैं। सोचने वाली बात है कि क्या फतेहपुर चिकित्सा विभाग का सुधार संभव है या नहीं ?  क्यूं नही देश व प्रदेश सरकारें ऐसे लोभी चिकित्सकों के पीछें खूफिया विभाग लगाकर दोषियों की सही पकड़ करते हुए उन्हे सही रास्ता दिखाकरके यह स्वास्थ्य विभाग का सुधार करें, जिससे लाचार गरीबों का इलाज सही ढ़ग से हो सके। मार्केट में बाहर फैले हुए निजी मैडिकल स्टोरों पर मोनोपोली दवांओं की बिक्री की वजह से हर वक्त चांदी रहती है, क्योंकि मैंडिकल स्टोरों में मोनोपोली दवाएँ फार्मासिष्ट द्वारा रखाई जाती हैं और जब बीमार ब्यक्ति लिखी हुई दवा लेता है तो मोटी रकम कमीसन के रूप में प्राप्त करते हैं और बदले में गरीबों का खून चूसने के लिए अस्पताल की उपलब्ध दवाइयां न लिखकर बाहर की दवाइयां मरीजों के सरकारी पर्चे में न लिखकर अलग छोटे पर्चे में लिखते हैं। 
सरकारें कल्याणकारी योजनाओं के लिए अरबों रुपया इन योजनाओं के माध्यम से गरीब जनता के सही इलाज हेतु पहुंचाने का प्रयास करती हैं लेकिन इन्ही योजनाओं की अर्थी उनके ही मातहतों द्वारा रोज निकाली जाती है।

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