क्या गोरखपुर में एक निषाद (शूद्र) को जिताकर हिदुत्व का अपमान किया ?

मुरादाबाद, एकलव्य मानव संदेश के लिए कुलदीप तुरैहा का लेख, 28 अप्रैल 2018। गत गोरखपुर लोकसभा चुनाव में हिन्दू विरोधी एक अपवित्र जातिवादी गठबंधन समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी, पीस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी से किया और एक निषाद (शूद्र) को जिता कर हिदुत्व का अपमान किया?  मीडिया ने भी कहा कि यह हिंदुत्व की हार है।
देश में शूद्रों के मध्य एक बहस छिड़ी है कि क्या 6447 संख्या में बांटे गए शूद्र वास्तव में हिन्दू हैं या केवल चुनावी हिन्दू। 
आगामी लोकसभा चुनाव कैराना लोकसभा में महृषि कश्यप के वंशज कहार/धीवर की संख्या लगभग 1870000 है और अक्सर उनको भाजपाई  हिंदुत्व की घुट्टी पिलाई जाति है कि वह हिन्दू है। यदि वह वास्तव में शूद्र (हिन्दू) हैं, तो आगामी कैराना लोकसभा उपचुनाव मे भाजपा को कश्यप समाज का विशुद्ध पवित्र प्रत्याशी उतारना चाहिये। जिससे सपा बसपा के अपवित्र गठबंधन का जवाव दिया जा सके । यदि भाजपा ऐसा नहीं करती है, तो यही माना जायेगा कि कश्यप/कहार शुद्र केवल भाजपा की निगाह में चुनावी हिन्दू हैं और भाजपा का हिंदुत्व केवल चुनावी और राजनितिक हिंदुत्व दर्शन है जिसका कार्य केवल शूद्रों को सत्ता पाने के लिये वोट लेकर गुमराह करना है।