7 जून 2017 को 17 जातियों के आरक्षण के लिए महाआंदोलन क्यों ?

अलीगढ़ (Aligarh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) एडिटोरियल रिपोर्ट, 26 मई 2018। 17 जातियों की सबसे बड़ी दुश्मन आज भाजपा बनी हुई है। यह पार्टी हमारे आरक्षण को लागू नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री 8 जून 2015 के अपने वायदे को पूरा नहीं कर रहे हैं। हम लोग सरकारी रिकॉर्ड में आज अनुसूचित जाति के अंतर्गत हैं, क्योंकि की पिछली अखिलेश यादव सरकार का जीओ आज भी लागू है। केवल उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर उसे अपलोड नहीं किया गया है। जिससे 17 जातियों के बच्चों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों की जो भर्ती हो रही है उसमें हमें अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिल सकता है। हमारे समाज के लाखों पड़े लिखे युवाओं का गला घोंट रही है योगी और मोदी की सरकार। हाई कोर्ट ने भी 29 मार्च 2017 को हमारे प्रमाण पत्रों पर रोक हटा दी थी। 
    7 जून 2015 को आरक्षण के लिए गोरखपुर और संत कबीर नगर की सीमा पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद ने रेल रोको आंदोलन किया था। उस आंदोलन में हमारा एक बेटा अखिलेश सिंह निषाद शहीद हुआ था। अखिलेश सिंह निषाद अपने पिता का तीन बहानों में एकमात्र बेटा था। अखिलेश सिंह निषाद इटावा की यमुना किनारे स्थित गांव मड़ैया दिलीप नगर से चल कर आप और हमारे सभी के बेटे बेटियों के भविष्य के लिए कुर्बान हो सकता है तो आप अपने जिले में आयोजित होने वाले 7 जून 2018 के महाआंदोलन में शामिल नहीं हो सकते हैं क्या ? जो अपने की चिंता दूसरे पर छोड़ देते हैं उनको कभी भी सफलता नहीं मिलती है। इसलिए आप अपने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए 7 जून को अपनी सभी समस्याओं को एक तरफ छोड़कर केवल आरक्षण आंदोलन को सफल बनाने के लिए तैयार रहें। आज से जिससे भी चर्चा करें, जिससे भी फोन पर बात करें, जिससे भी मिलें, उन सभी से एक ही बात पूरे जोर के साथ जरूर करें, 7 जून को आरक्षण के महाआंदोलन  में अपनी एकजुटता और भागेदारी जरूर निभाएं। जो तैयार हों उनके मोबाईल नम्बर नोट करके जरूर रखें। 
    ये आंदोलन सभी 17 जातियों के आरक्षण को लागू कराने के लिए किया जा रहा है। आप किसी भी पार्टी या संगठन में क्यों न हों, सभी के बच्चों को लाभ मिलेगा। इसलिए सभी को इस आंदोलन में अपने झंडे, टोपी का साथ आकर एकसाथ अपनी एकजुटता दिखानी होगी। उत्तर प्रदेश का एक भी जिला इस बार छूट न जाये। 
एकलव्य मानव संदेश के सभी रिपोर्टर्स आज से पूरे उत्तर प्रदेश में गांव गांव, मोहल्ले मोहल्ले, कस्बे कस्बे और शहर शहर जाकर लोगों को आरक्षण महाआंदोलन की जानकारी दें और उनकी न्यूज़ की 2 से 3 मिनट की वीडियो बनाकर हमको भेजें। 7 जून तक केवल एक ही काम करने के लिए है। आपके बेटे बेटियों के भविष्य के लिए आरक्षण लागू करना। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। संघर्ष ही सफलता का पहला रास्ता होता है। जो समाज संघर्ष नहीं करता है, लोकतंत्र में सबसे पीछे के पायदान पर राह जाता है। 
आपके आरक्षण महाआंदोलन को निर्णय इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) अपना पूरा सहयोग दे रही है। इस पार्टी की नींव ही आरक्षण के आंदोलन से पड़ी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ. संजय कुमार निषाद ही आज निषाद वंशियों में एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो आपके बच्चों की खातिर एक माह जेल की सलाखों के भीतर भी रह चुके हैं। आरक्षण की लड़ाई की बात और सभाएं बहुत से नेताओं ने आज तक की हैं, लेकिन आज तक एक दिन भी आरक्षण के लिए जेल नहीं गए। हम उनकी कोई बुराई नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनको भी यह बताना चाहते हैं कि, जो रास्ता अपने अख्तियार किया हुआ है और वह आपको 30 साल से ज्यादा समय होने के बाद भी मंजिल तक नहीं ले जा रहा है तो, एक बार डॉ. संजय कुमार निषाद के रास्ते को भी इस गरीब और अति पिछड़े समाज की खातिर अपनाकर तो देखें, हो सकता है सफलता जल्दी मिल जाय। केवल अपनी दुकान चलाने की जिद पर दुकान चलाने की कोशिश समाज को कोई रास्ता नहीं दिखती हैं, वह समाज को केवल भटकाने का ही काम करती हैं। 
कहा गया है-
आपको जो चाहिए, अगर वह नहीं मिल रहा है तो, आपको अपना रास्ता थोड़ा तो बदलना ही पड़ेगा, मंजिल जरूर मिलेगी।
जय निषाद राज
जसवन्त सिंह निषाद
राष्ट्रीय सचिव 
निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी)
एवं
संपादक/प्रकाशक
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