एक महत्वपूर्ण संदेश मूलवासियों के लिए

आगरा (Agra), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) के लिए पूजराम वर्मा का संदेश, 13 मई 2018। मुलवासी (SC, ST, OBC और माइनॉरिटी) भाइयों मेरा आप सभी साथियों से विनम्र अनुरोध है कि आप सभी अपने जीवन का मूल्यवान समय निकालकर इस मैसेज को पढ़ने का कष्ट करें। इस मैसेज में लिखे गये एक-एक शब्द हमारे आन्दोलन और हमारी लड़ाई को मजबूती प्रदान करनें का कार्य करेंगे।
 क्यों जाने अन्जाने में हमारा मूलवासी समाज 3.5% विदेशी ब्राह्मणों का ही काम आसान करनें में लगा हुआ है। एक तरफ तो पहले से ही हमारा समाज सैकड़ों दलालों को जन्म दे चुका है और ऊपर से आप लोग भी जोश में होश खो बैठे हो। धर्म हमारा प्रत्यक्ष टारगेट नहीं है, हमारा टारगेट सीधा ब्राह्मण है। कहीं ऐसा तो नहीं हमारा समाज आवेश में आकर ब्राह्मणों के सबसे मजबूत किले पर वार कर रहा है। हमें ब्राह्मणों के सबसे कमजोर हिस्से को चिन्हित कर उस पर वार करना होगा, क्योंकि युद्ध सिर्फ चाकू, छूरी, तलवार और गोली बन्दूकों से नहीं जीते जा सकते हैं, बल्कि युद्ध जीतने के लिए सही रणनीतियों, युद्ध कुशलता और दुश्मन के सबसे कमजोर हिस्से का चयन करना अति आवश्यक माना गया है।
   यह लड़ाई  साधारण लड़ाई नहीं है, बल्कि यह लड़ाई विचारधारा और सूझबूझ की लड़ाई है। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारा मूलवासी समाज किताबों का अध्ययन नहीं करता और इतिहास में हुई घटनाओं के साथ तालमेल नहीं बनाता और ना ही सबक लेता है।
      इस देश में अनेकों बार मूलवासी समाज के महापुरूषों द्वारा धार्मिक उन्माद और प्रतिकार हुए हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसलिए साथियों अगर हमें अपने महापुरुषों का मिशन आगे बढ़ाना है और मूलवासी समाज को ब्रह्मणों के गुलामी से मुक्त कराना है, तो हमें बड़े ही सूझ-बूझ और चतुराई के साथ लड़ाई लड़नी होगी। 
हमें समाज में ब्राम्हणों के चरित्रों का पोस्टमार्टम करना चाहिए, न कि भगवान का।
हमारे आरक्षण का विरोध करने भगवान मंदिर से निकलकर नहीं आता।
भगवान ने क्रीमीलेयर तय नहीं किया ।
भगवान ने OBC की जाति आधारित गिनती करवाने पर रोक नहीं लगाई ।
प्रमोशन में आरक्षण भगवान ने नहीं खत्म किया ।
मण्डल कमीशन न लागू होने में भगवान का कोई हाथ नहीं है ।
पूना पैक्ट काण्ड में भगवान का कोई दोष नहीं है।
महिलाओं पर अत्याचार किसी भगवान ने नहीं किया।
शूद्रों को शिक्षा से वंचित भगवान ने नहीं किया।
शूद्रों के कमर में झाड़ू और गले में हांडिया किसी भगवान ने नहीं बांधी।
इन सभी समस्याओं और कुरीतियों का मूल कारण 3.5% विदेशी ब्राह्मण हैं।
एक सबसे महत्वपूर्ण बात, मैंने जो बातें भगवान के प्रति कही हैं वह बातें उनके समर्थन में कही गई बातें नहीं हैं। इसलिए हमें भगवान को नहीं ब्राह्मण को पकड़ना है, क्योंकि देश को ब्राह्मणों ने गुलाम बनाया है भगवान ने नहीं।
एक उदाहरण
जब ब्राह्मण वेद, पुराण और मंत्रों का मंत्रोच्चार करता है एवं प्राण प्रतिष्ठा करता तभी मूर्ति में प्राण आता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि ब्राह्मण ही भगवान का असली बाप है, क्योंकि जन्मदाता और प्राणदाता  ही बाप का स्थान प्राप्त कर सकता है। भगवान भी वेद, पुराण, ग्रंथ, मंत्र और मनुस्मृति के अधीन है। और इसे  लिखने वाला ब्राह्मण ही है। भगवान भी इन ब्राह्मणों का गुलाम है, यह समझने की बात है और बहुत गंभीर मामला है। 
हमारे जिम्मेदार मूलवासी  SC, ST OBC और अल्पसंख्यक भाईयों यह बात हमें समाज में जा-जाकर लोगों को समझाना होगा। अन्यथा ब्राह्मण हमारी कमजोरियों का फायदा उठाने में तनिक भी देर नहीं लगायेगा और देश की 52% आबादी OBC को 23% SC, ST से लड़ा देगा। क्योंकि हम भलीभाँति जानते हैं कि ब्राह्मण अपने इस कार्य में सामर्थ्यवान और निपुण है। 
सभी सामाजिक SC, ST, OBC एवं अल्पसंख्यक संगठनों से विनम्र निवेदन है कि भगवान पर बहस करने के वजाय ब्राह्मणों ने मूलवासियों को किस कदर गुलाम बना रखा है और संविधान को खत्म करने का सडयंत्र कर रहा है, इस विषय पर प्रकाश डालने की कृपा करें। आप सभी मूलवासी समाज से विनती है कि कृपया भगवान पर टिप्पणी न करने के बजाय ब्राह्मणों के चरित्रों को समझें और समझाएं ।
क्योंकि ईश्वर पर टिप्पणी करने से हमारा 1 भाई हमारी बात सुनने के लिए तैयार होता है और 99 भाई हमसे दूर भाग जाते हैं। और जब ब्राह्मण पर टिप्पणी करते हैं तो वही हमारा 99 भाई हमारी बात सुनने के लिए तैयार हो जाते हैं।
जब हमारा मूलवासी समाज ब्राह्मणों के चरित्रों और उनके द्वारा बनाए गए पाखण्डों को भलीभाँति समझ जायेगा तो स्वयं ही देवी-देवताओं और भगवानों का परित्याग कर देगा, फिर हमें इतनी जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शिक्षित करो
संगठित करो
फिर संघर्ष करो

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