फतेहपुर में जल संकट

फतेहपुर (Fatehpur), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) रिपोर्टर राम बहादुर निषाद की रिपोर्ट, 30 मई 2018। फतेहपुर में जल संकट की खबर है। फतेहपुर के थाना क्षेत्र जहानाबाद  बकेवर, जाफरगंज, चांदपुर के ग्रामीण क्षेत्र के इलाको से गुजरी निचली गंगा नहर के राजबाह (बम्बा) में लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से पानी नहीं पहुंच रहा है और अब यह खाली पड़ा है। जिसमें साफ सफाई एक दो  बार खानापूर्ति के रूप मेंं जरूर हुई, लेकिन पानी के दर्शन नहीं हो पाए। पिछली सरकार मेंं तत्कालीन विधायक की कृपा से कुछ दिन पानी का बहाव देखने को मिला था। परन्तु वर्तमान सरकार के क्षेत्रीय विधायक व मंन्त्री व जनपद की सांसद व केन्द्रीय मंन्त्री को पानी सूखा से संबन्धित कई बार अवगत कराने के बाद भी इस राजबाह (बम्बा) में पानी बहाव के विषय में कोई सुधि नहीं ली है।
      क्षेत्रीय ग्रामीणो के नलकूपों का जलसतह बहुत ही नीचे जा चुका है, जिससे हैण्डपम्प व सबमर्सिबल पम्प जरा-2 देर बाद पानी छोंड़ रहे हैं।  तालाबों में भी पानी देखने को नही मिल रहा, जिससे जानवरों को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।             इलाके की जनता का कहना है कि नेता सिर्फ फर्जी भाषणों व वायदों के जरिए वोट समेट लेता है और जनता गुमराह होकर अपने नसीब को कोसती रहती है। बम्बा खाली होने के चलते, इस पर बने पुलों के बार्डर तक टूट के बिखर चुके हैं। 
रहीमदास जी ने लिखा था कि,,..                               रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष  चून।।                         जी हां ! रहीम का यह दोहा जेठ की इस दुपहरी की गर्मी की तपिश के बढ़ते ही रिन्द नदी व राजबाह (बम्बा) नहर के तटवर्ती क्षेत्रों में सच साबित हो रहा है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। गर्मी की रफ्तार बढ़ते ही यहां पर जल संकट गहराने लगता है।कई जगह तो लोग बूंद-बूंद के पानी के लिए तरस रहे हैं। गर्मी का मौसम अपने चरम पर है। लोगों का कंठ सूखने लगा है। वहीं जीव-जंतु प्यास के मारे इधर उधर भटक रहे हैं। ऐसी स्थिति में कहीं जंगली जानवर ग्रामीणों का शिकार भी बना रहे हैं। 
       वीरान जंगल से होकर बहती रिन्द नदी और इससे जन्मे नाले सभी सूखे हैं। गाँवों में स्थित कुओं का जलस्तर पताल चला गया है और गाँवों में लगे हैंडपंप पुनर्जीवन के लिए तरस रहे हैं। कई ठीक भी हैं तो एकाध बाल्टी पानी निकालने के बाद हाफने लगते हैं। 
          ग्रामीणों का कहना है कि अधिकतर सरकारी हैंडपंप जलस्तर डाउन होने कारण बिगड़े रहते हैं। परंतु देवमई, अमौली, खजुहा, विकासखंड कार्यालय के अभिलेखों में सब दुरस्त हैं। जिस कारण जेठ की दुपहरी में क्षेत्र के अधिकतर गाँवों में पेयजल संकट गहराया हुआ है।  

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