"सर राशन कार्ड बना दिजिए"

अलीगढ़ (Aligarh) एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया की सोशल रिपोर्ट, 29 मई 2018। "सर राशन कार्ड बना दिजिए"
कभी ऐसा कहते हुए बीडीओ पवन कुमार महतो के पास आई थी यह लड़की । अब ऐसे संवर गई इसकी जिंदगी । 
       रांची। किसी ब्लॉक में जाकर काम करवाना कितना मुश्किल काम होता है, इससे कोई अनजान नहीं है। ऐसे में ब्लॉक के बड़े अधिकारी यानि के बीडीओ तक पहुंचना तो निचले तबके के लोगों को भगवान से मिलने के बराबर होता है।
        लेकिन सारे अधिकारी ऐसे नहीं होते हैं। हम आपको एक ऐसे ही अधिकारी के बारे में बताएंगे। जिनके बारे में जानकर आप भी उन्हें सैल्यूट करेंगे। ये शख्स पवन कुमार महतो हैं, जो गुमला के कामडारा प्रखंड में बीडीओ के पद पर तैनात हैं। पवन छह जुलाई को अपनी बेटी की शादी करने जा रहे हैं। लेकिन आप सोचेंगे कि उनकी बेटी की शादी से हमें क्या लेना है। 
       पढ़िए उषा की मार्मिक कहानी बीडीओ पवन कुमार के फेसबुक पेज से कॉपी। पवन कुमार फेसबुक पर बताते हैं....
      *उषा*......अनाथ !अभागी !और न जाने क्या- क्या कहती थी दूनिया उसे ..... चंद्रपुरा प्रखंड के कुरुंबा गाव की रहने वाली उस लड़की को !!!! हाँ छोटी थी तभी माँ बाप का साया उठ गया था सर से किसी गंभीर बीमारी से!!!! कुछ संबंधी थे सामर्थ्यवान पर शायद लड़की को दो वक़्त की रोटी खिलाने का सामर्थ्य न था उनमें !!! 
बस थी तो बेसहारा परित्यक्ता फूवा .. सहारा बनने की कोशिश करते हैं दोनो!! उषा बकरियां चराती ...खेतो में मजूरी करती ... पेट भरने की कोशिश करती अपनी और बूढी फुआ की !
        वो कहते है न ज़िन्दगी इतनी आसान नही होती ... बूढी फुआ भी अब हार रही थी और ये हार शब्दों के कर्कश तीर बन कर उतरते थे उषा के सीने में !!! एक दिन फुआ ने कह ही दिया.. "निकल जाओ घर से कोई मदद मिले तो ही घर लौटना नहीं तो उधर ही मर जाना !!!"
         याद है मुझे वो दिन .... साल 2014 की 30 तारीख !!! आई थी वो मेरे कार्यालय कक्ष में हाथो में कागज का एक टुकड़ा लेकर !!! ....कुपोषित शरीर !!! आंखे खोढ़र में धंसी हुई !!! फटे पुराने कपड़े !! डबडबाई आंखों से कुहकते आवाज़ में .."सर एक राशन कार्ड बना दीजिये न ?" कागज के टुकड़े से कहीं ज्यादा फरियादी थी उसकी आंखें !
        मीटिंग में था ...कहा बाहर इंतज़ार करो मिलता हूँ तुमसे ! ...चार बजे तक मीटिंग चलती रही और मैं उसे भूल गया। एक सहकर्मी ने याद दिलाया -"सर,वो आपसे मिलने आई थी!"मैंने कहा- "अरे हाँ! बुलाओ उसे। याद है ..मेरे सहकर्मी ने निराशा भरे शब्दों में बतलाया था -"बहुत देर इंतज़ार किया सर उसने! रोते-रोते आई थी और रोते-रोते चली गयी!" ये बातें चुभ सी गयी मुझे ..पछतावे और दुःख ने मेरे रात की नींद छीन ली।
      अगले दिन अहले सुबह उसके घर की ओर चल पड़ा...सहकर्मी से पता मिल गया था मुझे ! बकरियाँ चराती मिली थी वो मुझे अपनी झोपड़ी के आगे !बेबस थकी हुई... हारी हुई... चलती फिरती जिंदा लाश ! सोचा क्या करूँ...क्या न करूं !जिस उम्र वर्ग की थी कोई सरकारी योजना का लाभ नहीं दे सकता था !कुछ आश्वासन न दे सका.. बस विचारों का झँझावात लिए लौट रहा था मैं !! सुकून गायब...आंखों के सामने वही मायूस फरियादी चेहरा ! 
        अपनी विवशता और कुछ न कर पाने के मलाल को साझा किया था फेसबुक में ..टिपणियां आईं ...चुनौती के रूप में ...व्यंग्य के रूप में...सुझाव के रूप में !!अब फैसला लेने की घड़ी थी !विचार आया..क्यों न गोद ले लूँ... उसके जीवन की सारी जरूरतों को पूरा करूँ ! फिर यह शंका मन में ...मेरा भी परिवार हैं...बच्चे हैं...जिम्मेवारियाँ हैं...क्या मेरी अर्धांगिनी स्वीकार कर पाएगी उसे !!
       सच में भाग्यशाली निकला ! परिवार ने साथ दिया मेरा ! अगले दिन सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने गोद लेने का फैसला किया ...और लिया भी ! दुनिया है और अक्सर घटनाओं की अपने ढंग से व्याख्या करती है..."पैसा है तो उड़ाएगा ही " , "दाई चाहिए होगी ले जा रहा है " ; "पब्लिसटी स्टंट है भाई " ; "अभी भावना में बहकर बोल रहा चार दिन में औकात में आ जाएगा "......और न जाने क्या क्या !!!
      मैं अपने आपको सामर्थ्यवान नहीँ मानता और न हूँ ...लेकिन ईश्वर की कृपा से मैं ये फैसला ले सका...सच्चे मन से ! आज वो मेरी बेटी है... सगी बेटी !!ईश्वर साक्षी है मैने उसकी परवरिश में..सुख सुविधा में..लेशमात्र कमी नही की है । वो खुश है आज ! हाँ मेरा स्वार्थ भी तो प्रतिपूरित हो रहा है ...आत्मतुष्टि का स्वार्थ !!
      आज मेरी बेटी बड़ी हो गयी है ! हाथ पीले करने जा रहा हूँ उसके !! मेरी बेटी 
      *उषा*
सुपुत्री स्व.भगीरथ महतो एवं स्व.सुगनी देवी ,ग्राम .कुरुम्बा ,थाना-चंद्रपुरा ,जिला..बोकारो 
     को ब्याह रहा हूँ चिरंजीवी
       *जितेंद्र कुमार महतो*
सुपुत्र स्व.धनेश्वर महतो एवं रिझनी देवी 
ग्राम+पोस्ट-कैथा , थाना व जिला -रामगढ़
        विवाह की तिथि और स्थान भी तय है-
*6 जुलाई2018 को* 
*जगदीश नगर, परसोतिया, रामगढ़ कैंट* में
      आप आइयेगा जरूर ! आपके आशीर्वाद के बिना..आपके स्नेह के बिना...भविष्य सुखद न हो सकेगा उसका !! 
     इंतज़ार में रहूँगा उषा की धर्ममाता *श्रीमती रूबी महतो* के साथ
       सौभाग्यशाली धर्मपिता
         *पवन कुमार महतो*
     प्रखंड विकास पदाधिकारी
      कामडारा !

(अशोक महतो की फेसबुक वाल से साभार लिया गया)

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