वोट तो बीजेपी कांग्रेस को देते हैं और हिसाब डा संजय कुमार निषाद जी से मांगते हैं

गोरखपुर (Gorakhpur), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 30 मई 2018। कुछ लोग हमसे पूछ रहे थे कि आरक्षण खत्म किया जा रहा है। हम लोग आंदोलन करेगें।
निषाद पार्टी के साथियों ने कहा कि निषाद पार्टी का बटन मात्र  दबाना सीख जाओ, रोड पर आकर आंदोलन करने कि जरूरत ही नहीं पड़ेगी। लेकिन हमारे भाई वोट तो बीजेपी कांग्रेस को देते हैं और हिसाब डा संजय कुमार निषाद जी से मांगते हैं। एक बार मेहनत करके अपने चाचा, ताऊ, ससुर, सास, साली, सालों, मामा, मामी, दादा, दादी, बेटी, जमाई के वोट निषाद पार्टी को डलवा दें। आप का अधिकार सुरक्षित हो जायेगा।
*आरक्षण क्या है और क्यों जरूरी है*
आज जिसे देखो, वो आरक्षण के नाम पर आरक्षित वर्गों (खास कर दलितों) को गरियाता फिरता है, हाथ में अधिक नंबरों वाली मार्कशीट लेकर। लेकिन सामाजिक समझ से पैदल कुछ लोग अपने आप को कुछ न जानते हुए भी खुदा से कम नहीं समझ रहे और सरे आम बाबा साहेब जैसे महा पुरुष को भी आपत्तिजनक शब्दों और लहजों से संबोधित करने की धृष्टता कर रहे हैं। ऐसे लोग, खुद इतिहास, संविधान, कानून और समाज की समझ न होते हुए भी अपनी ही हांकने मे व्यस्त हैं और जो भी कॉमेंटर इनके नजरिये के खिलाफ बोलता है, उसे तुरंत ये लोग "अयोग्य" और "भिखारी" जैसे अपमानजनक संबोधनों से लाद देते हैं। अनेक कोशिशों के बाद भी ऐसे ब्लॉगर, आरक्षण के विषय पर "पॉइंट टू पॉइंट" बात नहीं करते और घुमा फिरा कर रिपीटेड और अपमानजनक ही जवाब देते हैं।
*आरक्षण* क्या, क्यों, किसके लिए और कैसे? साथ में पढ़ें, अन्य संवैधानिक उपाय, जिनका उद्देश्य है देश -समाज में शोषितों और वंचितों के लिए समानता के स्तर को प्राप्त करना।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सामाजिक स्तर में सुधार के लिए संविधान में त्रि-आयामी (त्रि-स्तरीय) रण नीति बनाई गयी, जो इस प्रकार हैं:
(1) सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके
     न्यायिक/नियमन साधनों द्वारा समानता के सिद्धांत को लागू करके और सामाजिक बाधाओं को दूर करके।
     गरीबों, शोषितों, दलितों पर होने वाली शारीरिक हिंसा के अपराधियों को कठोर दंड का प्रावधान करके।
       ऐसे परंपरागत नियमों, प्रबंधों को बंद करके, जो दलितों की डिग्निटी ( गरिमा ) और आत्म सम्मान को ठेस पहुँचाते हैं।
     उनके परिश्रम की उचित कीमत और फल की प्राप्ति सुनिश्चित करके।
     प्राकृतिक संसाधनों पर किसी खास वर्ग का ही अधिपत्य कम करके।
      गरीब, शोषित, कमजोर वर्ग को उपलब्ध कराई गयी सुविधा, अधिकार, लाभ आदि की देखभाल के लिए स्वतंत्र आयोगो का गठन करके।

2. कमपेनसेटरी डिस्क्रिमिनेशन (प्रति पूरक भेदभाव )
      सार्वजनिक सेवाओं, प्रतिनिधि संगठनों/निकायों, शैक्षिक संस्थानों मे आरक्षण लागू करके व अन्य सहायता प्रदान करना।

3. विकास
    अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य समुदायों के बीच पैदा हुई खाई को पाटने के लिए लाभ और संसाधनों का पुनरवितरण करके।
     ये नीति राज्य (भारत) द्वारा कार्यान्वित की गयी और तब से इस नीति के प्रति प्रतिबद्धता, भारत राज्य की विशेषता रही है। समय समय पर ये नीति ज़रूरत पड़ने पर और ज़्यादा मजबूत बनाई गयी और साथ ही ज़रूरत के मुताबिक इसका दायरा भी बढ़ाया गया है। जहाँ तक सुरक्षा संबंधी प्रायोजनों की बात है, तो खुद संविधान मे काफ़ी विस्तृत रूप से उन परंपराओं, नियम, क़ानूनों, सामाजिक, संस्थागत प्रबंधों और गरीबों, शोषितों, समाजिक स्तर से कमजोर पर थोपी गयी, किसी भी अन्य प्रकार की अमानवीय  और भेदभावी स्थिति को ख़तम करने की ढाँचागत रूपरेखा दी गयी है। जो अस्पृश्यता को समाज में लागू करते हैं, उसका अनुमोदन करते हैं या इस हीन परंपरा के पालन को प्रोत्साहित करते हैं।
   निषाद पार्टी ने निषाद, कश्यप, धीवर, धींमर, कहार, बाथम, रायकवार, मल्लाह, केवट आदि 17 जातियों के आरक्षण को लागू कराने के लिए 7 जून को महा आंदोलन के तहत, उत्तर प्रदेश बंद कर प्रदर्शन और धरना करने का निर्णय लिया है। आप अपने बच्चों और अपने के भविष्य की खातिर, खुद और अपने नाते रिश्तेदारों को भी इस आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित करके कामयाब बनायें। 
धन्यवाद।
निवेदक
निषाद पार्टी।