नगर पालिका की सुपरफास्ट सफ़ाई एक्सप्रेस के हाल पैसेंजर से भी बद्तर

फतेहपुर(Fatehpur), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh), 7 मई 2018। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औऱ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के द्वारा स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च करने का जरा सा भी असर फ़तेहपुर में देखने को नहीं मिल रहा। वैसे तो ज्यादातर गांवों में सुनने को मिलता है कि कोई सफाई कर्मचारी कभी आता ही नहीं है। इसलिए लोगों को स्वयं अपने घर के सामने की नाली साफ करनी पड़ती है। मगर शहरों में स्थिति कुछ अलग है यहाँ कुछ हद तक अधिकारियों के दबाव में विशेष स्थानों पर सफाई हो भी जाती है लेकिन इस समय फ़तेहपुर में सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। कोई भी सफाई कर्मचारी स्वयं सफाई करने कहीं नहीं जाता है। जिन मोहल्लों में कभी कभी सफाई हो भी रही है वह उनके यहां के सभासद के दबाव में हो रही है। नहीं तो आप किसी मोहल्ले में निकल जाएं या फिर शहर की किसी भी मुख्य सड़क पर निकल जाएं, बगल की नालियां वर्षों से बजबजा रही हैं। बदबू आ रही है। मगर सफाई के नाम पर नगरपालिका में सिर्फ धन का बंदरबांट हो रहा है। जिम्मेदारों को बड़ी बड़ी होर्डिंग्स लगवाकर या अपना नाम मोटे अक्षरों से दीवारों में लिखवाकर जनता को बेवकूफ बनाने से काम नहीं चलेगा। जनता है साहब सब जानती है। इसे जवाब देना भी आता है और जब ये जवाब देती है। तब कुछ कहने का मौका भी नहीं रह जाता।
      हालाँकि कुछ समय के लिए शहर में नया चेयरमैन बदलने के बाद जरूर ऐसा लगा था कि पूरा शहर साफ हो जाएगा। लेकिन महज ये कुछ समय का दिवास्वप्न निकला। फिर शहर की स्थिति जस की तस हो गयी है। कोई देखने वाला नहीं है। हालांकि कुछ समय तक शहर में सफाई कर्मचारियों ने घूम घूम कर सफाई की। लेकिन ये सफाई की सुफरफास्ट एक्सप्रेस पैसेंजर से भी बद्तर निकली। काफी समय से ये आउटर में ही खड़ी है। 
सफाई कर्मचारियों के न आने में भी खेल, घर बैठे लेते हैं आधी तनख्वाह। वहीं इस बाबत एक सफाई कर्मचारी से बात के दौरान पता चला कि नौकरी में न जाने का बाकायदे वह जिम्मेदार अधिकारियों को हिस्सा देता है। वहीं उसने नाम न लिखे जाने का विश्वास दिलाने पर बताया कि कई लोग तो कभी नहीं आते और घर बैठे आधा वेतन लेते हैं। वहीं कुछ जिम्मेदारों के यहां सिर्फ जीहुजूरी कर अपनी नौकरी चला रहे हैं और सरकारी ब्यवस्था पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।