अनुसूचित जाति आरक्षण के लिए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद व N.I.S.H.A.D.पार्टी के संघर्ष के महत्वपूर्ण कदम

गोरखपुर (Gorakhpur), के लिए एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) मिर्ज़ापुर ब्यूरो चीफ विशाल कुमार निषाद की रिपोर्ट, 25 मई 2018। अनुसूचित जाति आरक्षण के लिए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद व N.I.S.H.A.D.पार्टी के संघर्ष के महत्वपूर्ण कदम। महामना डॉ. संजय कुमार निषाद जी के द्वारा अपने संगठन के माध्यम से "अनसूचित जाति व मझवार आरक्षण" को लेकर अब-तक किये गये संघर्षो के पल !! 
*पहली बार गरीब शोषित वर्ग ने अपने अधिकार को लेने के लिए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के बैनर गोरखपुर में 1 फरवरी 2014 से सड़कों पर उतरना शुरू किया। जो डीएम कार्यालय पर खत्म होता था। और इस गरीब शोषित समाज का धरना अनवरत 10 फरवरी 2014 तक चलता रहा। इसके बाद अंततः तत्कालीन डीएम ने गोरखपुर में सभी तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए निर्देशित किया। किन्तु सिर्फ गोरखपुर के लिए ही आदेशित होने लगा अन्य जिलों मे नहीं।

*17 फरवरी 2014
अधिकार लेने का दौर थमा नही। एक बार पुनः राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के बैनर तले गरीब शोषित वर्ग ने अपने अधिकारों को लेने के लिए लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास घेरकर यह जताने की कोशिश की यदि गोरखपुर के केवट, मल्लाह, माझी आदि को अनुसूचित जाति मझवार का प्रमाण पत्र जारी हो रहा है तो पूरे प्रदेश में जारी होना चाहिए। इससे नाराज होकर तत्कालीन सपा सरकार ने लखनऊ में हीं हजारों कार्यकर्ताओं के ऊपर लाठियां बरस बसवाना शुरू कर दीं, तो राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने वहीं बैठ कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और आश्वासन तो मिला, लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ।

*7 जून 2015
गरीब शोषित वर्ग का समर्थन और हौसला राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद को मजबूत करने लगा। संघर्ष के दौर में भी जब अधिकार ना मिलने पर संगठन ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए गोरखपुर लखनऊ रेलवे मार्ग, मगहर में जाम कर दिया तो, शासन ने क्रुरता का अंजाम देते हुए लाठियों के बाद गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जिससे कई लोग घायल हुए। लेकिन एक जांबाज कार्यकर्ता इटावा निवासी वीर अखिलेश सिंह निषाद शहीद हो गया और 37 आंदोलनकारियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया गया। 7 महीने कड़ी यातना दीं गईं। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना मा. डॉ संजय कुमार निषाद जी को 1 महीने जेल की हवा खानी पड़ी। इससे गुस्साए कार्यकर्ताओं का जोश दिन दुना रात चौगुना बढ़ने लगा। और जब आंदोलनकारियों के साथ महामना की रिहाई हुई तो पूरे प्रदेश में जश्न ही जश्न का माहौल हो गया। ढोल नगाड़े के साथ लोग पटाखे फोड़ कर खुशियां मनाने लग गए।

 *25 जुलाई 2016
इसी बीच गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने वाली एक ऐसी सशक्त महिला जिन्होंने पूरी दुनिया में एक मिशाल कायम की। दुनियां में उनके नाम की पढाई होने लगी। लोग उनको पूजना शुरू कर दिये। अत्याचार होना बंद होने लगा। नाम था वीरांगना बहन फूलन देवी (पूर्व सांसद वीरांगना फूलन देवी)। जिनकी संसद के सामने हत्या कर दी गई। उस स्वर्गीय फूलन देवी जी का शहादत दिवस मनाने की योजना की घोषणा होते ही गोरखपुर के चंपा देवी पार्क में लाखों लोगों के सामने जब 32 फीट के मूर्ति अनावरण की बात आई तो एक बार फिर शासन-प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और पूर्व सांसद वीरांगना बहन की मूर्ति नहीं लगने दी। तभी पता चला की अधिकार तो पार्टी दिलाती है।

*16 अगस्त 2016
तब 16 अगस्त 2016 को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के गरीबों ने राजनैतिक पार्टी का गठन किया। तब सरकार बनाओ अधिकार पाओ रैली के माध्यम से 15 सितंबर 2016 को लखनऊ के ऐतिहासिक रमाबाई आंबेडकर मैदान में लाखों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर सभी पार्टियों की नींद हराम कर दी। जिससे पार्टियों को अपनी जमीन खिसकती नजर आने लगी तो TV पर उस विशाल रैली की खबर को नहीं चलने दिया। 

*2017 विधानसभा चुनाव
गरीब शोषित वर्ग ने अपने अधिकारों को लेने के लिए निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल का झंडा बुलंद किया। उस झंड़े को लखनऊ की विधान सभा मे पहुँचाने के लिए चुनावी बिगुल बजा दिया। आक्रोश में आकर 2017 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाया और इस बार फिर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद और निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की जंतर मंतर का बैरक तोड़ते हुए संसद भवन का घेराव किया। पूरे देश में गरीबो के दहशत का माहौल खड़ा हो गया।  इस आक्रोश को देखते हुए मा. हाईकोर्ट ने 29 मार्च को मझवार आरक्षण पर लगी रोक हटा ली और निर्देश जारी किया कि इनको अधिकार मिलना चाहिए। अधिकार से रोकने वाले को दंड किया जाना चाहिए।

*1 सितंबर से 11 सितंबर 2017 तक चला
 सत्ता के दबाव में फिर एक बार पुनः आनाकानी चालू रही तो एक बार फिर हार ना मानने वाले निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना माननीय डॉक्टर संजय कुमार निषाद जी ने 9 सितम्बर 2017 को एक बार फिर रेल रोको आंदोलन करने को तैयार कर लिए और इस बार नेतृत्व की कमान प्रदेश प्रभारी इंजीनियर प्रवीण कुमार निषाद के हाथों में रही और सफल आंदोलन के बाद  सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार हो गये। किन्तु अभी 24 घंटे के अंदर, बाहर आ गए और कुछ जगह प्रमाण पत्र भी बनना शुरू हो गया। लेकिन आज भी अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो रहा है गरीब समाज।

*6 फरवरी 2018
गरीबों, शोषितों के हक अधिक के लिये पुनः निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में मछुआ, तुरैहा, बिन्द आदि 17 जातियों के आरक्षण के लिये धरना प्रदर्शन प्रत्येक जिले में किया। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने एक बार फिर मुंह मोड़ लिया। और आज भी अधिकारियों की अनदेखी का शिकार हो रहा है गरीब समाज ।

 *27 फरवरी 2018 को महागठबंधन
समाजवादी पार्टी, निषाद व पीस पार्टी में हुआ गठबंधन। गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा उपचुनाव को जीतने के लिये राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल, गोरखपुर में गठबंधन से निषाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी ईं. प्रवीण कुमार निषाद प्रत्याशी घोषित हुए। लखनऊ में तीनों पार्टियों के नेताओं ने एक साथ  प्रेस वार्ता में यह बात कही और 11 मार्च 2018 को चुनाव हुआ, जीत भी दर्ज कराई। गोरखपुर की चुनावी जीत  में एसपी-बीएसपी गठबंधन पर सभी की निगाह जा रही है। लेकिन इस चुनाव में निषाद जाति के वोटरों को एकजुट करने में निषाद पार्टी का बड़ा रोल है।
      बीजेपी द्वारा गोरखपुर का गढ़ हारने के पीछे का कारण भले ही राजनीतिक पंडितों ने एसपी-बीएसपी और पीस पार्टी के सामूहिक गठजोड़ को बताया हो लेकिन इस गोलबंदी का असली खेल निषाद पार्टी के बगैर खेल पाना मुश्किल था।             निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने 2016 में निषाद पार्टी का गठन किया था और वे लगातार निषादों के आरक्षण की मांग करते रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में निषाद पार्टी के प्रत्याशियों को लगभग हर सीट पर सम्मानजनक वोट मिले थे। ऐसे में संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद को समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतार कर निषाद पार्टी ने बड़ा दांव खेला। गोरखपुर के अगले सांसद प्रवीण कुमार निषाद उर्फ संतोष, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दूसरे पुत्र हैं। प्रवीण ने वर्ष 2009 में एनआईईटी ग्रेटर नोएडा से बीटेक (मैकेनिकल ब्रांच) की शिक्षा प्राप्त की है। उसके पश्चात इंडो एलोसिस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भिवाड़ी राजस्थान में बतौर प्रोडक्शन मैनेजर तकरीबन तीन वर्षों तक कार्यरत रहने के दौरान ही उन्होंने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री हासिल की है। प्रवीण के बड़े भाई डॉ. अमित कुमार निषाद दिल्ली में व्यक्तिगत प्रैक्टिस करते हैं। इनके छोटे भाई इंजीनियर श्रवण कुमार निषाद भी राजनीति में सक्रिय हैं। पिता डॉ. संजय निषाद ने अगस्त 2016 में निषाद पार्टी का गठन करने के बाद प्रवीण को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया था। इसके अलावा प्रवीण, राष्ट्रीय एकता परिषद समेत अन्य कई संगठनों में जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं।

*1 मई 2018  को प्रदेशव्यापी स्तर पर सभी तहसीलों पर ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई, कि अगर तत्काल शासनादेश एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं होता है तो उत्तर प्रदेश में होने वाली सरकारी नौकरियों से मछुआ समुदाय के लोग वंचित हो जाएंगे। मछुआ समुदाय एक मार्शल कौम है, जिसका गौरवशाली इतिहास रहा है। आर्यों, मुगलों, अंग्रेजों से लड़कर देश को आजाद कराया है। आज सामाजिक बुराई एवं कुरूतियों में फंसा हुआ है। शिक्षा का आभाव होने के कारण अपने  संवैधानिक अधिकारों को नहीं जानता था। निषाद पार्टी के कैडर से मछुआ समुदाय के लोगों में जागृति से जानकार हुए। मछुआ समुदाय मझवार, गोड़, तुरैहा, बाथम आदि नाम से संविधान को सूची में सूचीबद्ध है। आज तहसील दिवस में जैसे अंबेडकरवादीयो ने राजनैतिक हथियार से अपना हिस्सा लिया, वैसे ही निषादवादी लोग राजनैतिक हथियार से अपना हिस्सा लेंगे।

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