राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की ललकार सुनने चलो 27 जून को निषाद शहीदों के बलिदान स्थल सतीचौरा घाट कानपुर

कानपुर (Kanpur) एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 26 जून 2018। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की ललकार सुनने चलो 27 जून को निषाद शहीदों के बलिदान स्थल सतीचौरा घाट कानपुर। देश की आजादी की सबसे बड़ी घटना है जो सन् 1857 कानपुर के सतीचौरा घाट पर समाधान निषाद व लोचन निषाद ने देश की आज़ादी की खातिर अपने नाविको (निषादों) के साथ नांव में डुबा कर 3400 अंग्रेज सैनिकों को मारा था और सभी नाविक तैरकर भाग गये। डुबोयेगे गये अंग्रेज सैनिकों में सें एक अँग्रेजी कमांडर डा. एंड्यूज ब्लैक स्मिथ और एक सिपाही उस घटना में बच जाता है और रानी विक्टोरिया को सूचना दे देता है, कि रानी विक्टोरिया ये निषाद बहुत सेवा करते थे, लेकिन अब इनका आत्मसम्मान जाग गया है। जगह-जगह निषाद हमारे सैनिक मार रहे हैं। आज हमारे हजारो सैनिको को डुबाकर मार दिया गया। तब ब्रिटिश सरकार ने दुनिया के इतिहासकारों से सर्वेक्षण कराया। तो पाया कि इस देश का प्राचीन नाम निषाद है और यह भारत इन्ही का देश है। इनकी प्राचीन ही संस्कृति निषाद है। ये निषाद ही भारत के (मूलवासी-मूलनिवासी) हैं। इसी कारण से ये लोग शक, यवन, हुणों, आर्या व मुगलों से भी लड़ें और अब हम अंग्रेजों से लड़ रहे हैं। तब रानी बिक्टोरिया ने सोचा कि इस भारत देश पर शासन करना है तो निषादों को कानून बना कर उजाड़ा जाये।
तब निषदों को उजाड़ने के लिये ये ५ कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाये गये।
1- नार्दन इंडिया फिसरिज एक्ट।
2- नार्दन इंडिया फारेक्स एक्ट।
3- नार्दन इंडिया फेरिज एक्ट।
4-नार्द इंडिया फेरिज एक्ट।
5- सबसे खतरनाक कानून बनाया क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट।
 क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के द्वारा अंग्रेज सैनिक निषादों को पकड़कर जेलो में बंद करने लगे। तब अपने को बचने के लिए जो लोग जो भी अपना काम करने लगे, उसी काम के आधार पर ही अपनी-अपनी जातियां को बताने लगे। और इस तरह धीरे-धीरे निषाद कहना बंद कर दिया हमारे लोगों ने और 578 जातियों में बँट गये। उस काले कानून के तहत, आजआजादी के बाद भी गुलाम बने हुए हैं। जिसका दंश आज भी निषाद समाज झेल रहा है।
कानपुर की घटना के बाद सन 1860 ईo में सीआरपीसी एक्ट (भारतीय दंड संहिता 1860) में कानून बनाकर इन सभी 167 निषादो को कानपुर के सतीचौरा घाट पर बरगद के पेड़ पर 27 जून के दिन कच्ची फॉसी दे दी गयी थी और उस गाँव को भी जला दिया गया। कुछ दिनो के बाद समाधान व लोचन निषाद को भी पकड़कर फाँसी दे दी गयी और वीर निषाद सपूत देश की आजादी की खातिर अपना सब कुछ देश पर न्यौछावर करते हुए हंसते-हंसते शहीद हो गये। इन सभी अमर वीर शहीदों के फांसी पर लटके हुए शरीरों को भी बढ़ी ही निर्दयता से अंग्रेज सरकार ने तोप के गोलों से गंगा नदी की तरफ तोपों का मुँह करके उड़वा दिया था।
उन सभी 167 क्रांतिकारी निषाद शहीदो को नमन करते हुए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद एवं निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) इन सभी क्रांतिकारियों के शहादत दिवस को हर वर्ष की तरह 27 जून 2018 को मनायेगी।
 पूरे उत्तर प्रदेश एवं अन्य प्रदेशों के लोगों से अपील की जाती है कि आप सती चौराहा (मयस्कर घाट) कानपुर पहुंचकर कार्यक्रम को जरुर सफल बनाएं। 
जय निषाद राज
निवेदक
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद