7 जून को उत्तर प्रदेश में निषाद वंशीय मझबार, तुरैहा, गौंड की पर्यायवाची कश्यय, मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, तुरैहा, कहार करेंगे आरक्षण महा आंदोलन

गोरखपुर (Gorakhpur), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 3 जून 2018। गोरखपुर से निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (N.I.S.H.A.D. पार्टी) की अपील में कहा गया है कि, "माँग नहीं, अब रण होगा। महाआंदोलन बहुत भयानक होगा, के उद्घोष के साथ, 7 जून को उत्तर प्रदेश में निषाद वंशीय मझबार, तुरैहा, गौंड की पर्यायवाची कश्यय, मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, तुरैहा, कहार करेंगे आरक्षण महा आंदोलन।"
     निषाद वंशीय मझबार, तुरैहा, गौंड की पर्यायवाची कश्यय, मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, तुरैहा, कहार जातियों के मछुआ आरक्षण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 29 मार्च 2017 को हटाए गए स्टे के आदेश को लागू कराने के लिए निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (N.I.S.H.A.D पार्टी) उत्तर प्रदेश की सभी जिलों में जबरदस्त महाआंदोलन करेगी। इसलिए इन जातियों के व्यक्तियों/युवाओं और N.I.S.H.A.D पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से अपील हैं।  7 जून 2018 को अधिक से अधिक संख्या एकत्रित होकर महाआंदोलन को सफल बनायें।
 31 दिसंबर 2016 को उत्तर प्रदेश सरकार ने निषाद वंश की इन जातियों को अति पिछड़ी जाति से निकाल दिया है। अब ये जातियाँ अनसूचित जाति व आरक्षण की हकदार हैं, यह बात हाईकोर्ट भी कह चुका है। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार कोर्ट के इस आदेश का अनुपालन नहीं कर रही है। 
           निषाद समाज के प्रमाण-पत्र जारी हों, साथ ही निषाद समाज का पुस्तैनी जिविकोपार्जन के संसाधन नदी, ताल, बालू घाट की निलामी मत्स्य जीवी सहकारी समितियों को ही दिलाने की व्यवस्था किया जाय। 
       निषादों को जल, जंगल, जमीन से 1878 में एक्ट बनाकर विस्थापित किया गया था। जिसके कारण निषाद समाज ट्राइब्स हुआ। पुर्नस्थापित कर हमें उचित मुआवजा एवं अमर शहीद पेंशन दिया जाये। शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था दी जाय। इन मांगो को लेकर सैकड़ो की संख्या में 7 जून 2018 को अपने अपने जिले के जिला मुख्यालय पर पहुँचकर महाआंदोलन को सफल बनायें।

मिलिट्री, प्रशिक्षित सिपाही के बगैर युद्ध,
और 
मिशनरी, प्रशिक्षित कार्यकर्ता के बिना चुनाव लड़ ही नहीं सकते, 
जीतना तो दूर
इसलिए N.I.S.H.A.D पार्टी को मजबूत करें !
                    अपील कर्ता 
                      निषाद पार्टी
मछुआ(कश्यप-निषाद) समुदाय को 12 अक्टूबर 1871 को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट लागू कर जातिगत आधार पर अपराधी जनजाति घोषित कर अधिकारों से वंचित कर दिया। जीवकोपार्जन के संसाधन नदी, ताल, घाट व वन को नार्दन इंडिया फेरिज, फिसरिज, फारेस्ट, माइनिंग एक्ट 1878 लागू कर संपत्ति से बेदखल कर मछुआ समुदाय को आदिवासी जीवन जीने को मजबूर कर दिया। जिससे मछुआ समुदाय अनेक उपजातियों में बट गए। जैसे मझवार, तुरैहा, गौड़ (निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, मांझी, बिन्द, रैकवार, कहार, धीमर, धिवर, बाथम, गोड़िया) शिल्पकार (कुम्हार, बढ़ई, लोहार, भट्ट, दर्जी, जुलाहा, तेली, नाई, बारी) खरवार, बेलदार, खरोट, कोल, धनगर, कोरी, मुसहर, नट, सैनी, भर, राजभर आदि।

उपरोक्त जातियों को बर्बाद करने के लिए लंदन की संसद में मिस्टर स्टीफन ने कहा था कि डाक्टर के यहां डाक्टर, वकील के यहां वकील, चोर के यहां चोर, गुनाहगार के यहां गुनाहगार और डाकू के यहां डाकू पैदा होता है। 1871 से लेकर 31 अगस्त 1952 तक 82 साल के लंबे अरसे से काला कानून की मार से उपरोक्त जातियां अंग्रेजों के जुल्म के शिकार हुए। जिला स्तर पर आपराधिक जातियों के लिए एक दफ्तर होता था जहां से इन जातियों के लोगों को एक पास मिलता था। वह जिस गांव में जाते थे, उस गांव के मुखिया को बताना पड़ता था कि मैं 2 दिन के लिए आपके गांव में आया हूं, जाने पर अपने गांव के मुखिया को भी बताना पड़ता था कि मैं आ गया हूं। पुलिस थानों में हाजिरी लगती थी।

सुपरिटेंडेंट आफ पुलिस एक बार इन्हें सजा सुना देता था तो वही आखिरी फैसला माना जाता था। 1924 में इस कानून के तहत 12 साल का बच्चा भी गिरफ्त में आ गया, उसके माथे पर एक गर्म सिक्के से दागा जाता था ताकि पहचान हो सके कि ये अपराधी जाति का है। 1947 में देश आजाद हो जाने के बाद भी यह लोग 5 साल 16 दिन गुलाम रहे। पहला चुनाव इनके पुरखों को जेल में बंद कर कराया गया। 1949-50 में क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट इंक्वायरी कमेटी ने सरकार को रिपोर्ट दिया कि 193 जातियां आज भी गुलाम हैं। 31 अगस्त 1952 को संसद में अन्थ्रासैमन अयंगार क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट इंक्वायरी कमेटी ने जब प्रभावित जातियों से कानून हटा लिया तब जाकर इन जातियों को आजादी मिली। उसी दिन से मछुआरा जातियों को विमुक्त जनजाति की संज्ञा दी गई। जिसे सभी क्षेत्रों में 10 प्रतिषत अनुसूचित जनजाति के आरक्षण की संस्तुति  उत्तर प्रदेश में की गयी। मझवार, बेलदार, खरवार, गौड़, तुरैहा, दिल्ली में मल्लाह, बंगाल में केवट, बिंद, उड़ीसा में कैवर्त, केउट आदि विसंगतियों के साथ अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग में डाल दिया।

समाज के उत्थान के लिए सरकार ने कई कमीशन बनाए।
(1) ए. साइमन अयंगार कमेटी 1949-50
(2) काका कालेलकर कमेटी 1953-54
(3) डाक्टर बी.डी.एन. मेहता आयोग 1963
(4) लाकूर कमेटी 1965
(5) बी.पी. मंडल आयोग 1978
(6) राष्ट्रीय विमुक्ति एवं अर्ध घुमंतू जनजाति आयोग (रेणके आयोग) 2006 में बनाया था। जिसका नाम डी.एन.टी आयोग था। जिसके चेयरमैन बालकृष्ण रेणके थे। रेणके कमीशन की रिपोर्ट 78 बिंदुओं के साथ अनुसूचित जनजाति के आरक्षण के लिए 2008 में सरकारों को भेजी है। जिसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रा व उड़ीसा सरकार ने लागू कर दिया है। परंतु 70 साल बीतने पर भी केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार ने लागू नहीं किया। हमारी मांग है कि रेणके आयोग की संस्तुतियों को केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार लागू करे। निषाद मछुआ समुदाय की मछुआ जाति की सभी प्रयावाची (केवट, मल्लाह, माझी आदि) को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में शासनादेश 229/2016/436 मंत्री/26.03.2016.3(1)/2016 टी.सी. समाज कल्याण अनुभाग-3 दिनांक 21. 12.2016 पात्र मझवार को प्रमाण पत्र देने का निर्देश जारी है। मैनुअल के अपेंडिक्स (एफ) के अंतर्गत अंकित अनुसूचित जातियों की सूची में क्रमांक 51 के सामने मझवार- मांझी, मुजाबिर, राजगोड, मल्लाह, केवट को मझवार का पर्यायवाची एवं जेनेरिक (वंशज) के रूप में मझवार अंकित एवं परिभाषित है। मझवार को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी होना चाहिए। इसी तरह क्रमांक 63 पर अंकित शिल्पकार की प्रर्यायवाची जातियों कुम्हार, बढ़ई, लोहार, दर्जी, जुलाहा तेली, नाई, बारी को शिल्पकार का, क्रमांक 64 पर अंकित तुरैहा की पर्यायवाची जातियों धीवर, धीमर, गोड़िया, कहार को तुरैहा का, क्रमांक 66 पर गोंड की पर्यायवाची जातियां धुरिया, नायक, ओझा, पठारी को गोंड का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी होना चाहिए ।

07 जून 2018 को प्रदेश के हर जिले के अपने-अपने जिलामुख्यालय पर हो रहे प्रदेशव्यापी बंद विशाल महाआंदोलन में अनसूचित जाति आरक्षण की मांग को लेकर आप अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपनी आनी वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य की लड़ाई में अपना अहम योगदान दें,क्योंकि अभी नही तो फिर कभी नही । समाज के युवाओ को जागना होगा, आपकी आवाज को बुलंद करने फिर कोई मसीहा नही आयेगा ।

मित्रों जानकारी हर युग का हथियार होता है। हमारे समाज में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं है। अगर जानकारी है तो समझदारी नहीं है, अगर समझदार भी हो गया है तो लोगों को समझदार नहीं बनाता है। समाज के गुलामी एवं गरीबी का कारण भी यही है। ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनैतिक, संवैधानिक, धार्मिक, वैचारिक कैडर कैंप में नियमित आकर जानकार, समझदार, होशियार बन कर आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए जरूर पहुंचें।