भाजपा के योगी राज में सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से प्रसूता के पेट में हीं बच्चे की मौत

एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो महेंद्र वर्मा की रिपोर्ट, 13 जून 2018। सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलने से गई महिला के पेट में ही बच्चे की जान।
तड़पती रही महिला, पेट में ही बच्चे की मौत। 
औरैया के जिला महिला अस्पताल में बहुत ही दर्दनाक और शर्मनाक दृश्य देखने को मिला, जब एक गर्भवती महिला चिकित्सालय के बैड पर तड़पती रही, लेकिन उसे उचित इलाज नहीं मिला। इस मामले में सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि उसके बच्चे की पेट में ही मौत हो गई।
जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह मानु नाम की एक महिला प्रसव के लिए आई थी। उचित इलाज और देखरेख न होने के कारण यह महिला पूरा दिन बैड पर पड़ी रही।आरोप है कि अस्पताल के बैड पर प्रसव पीड़ा से छटपटी रही इस महिला को कोई भी डॉक्टर देखने नहीं आया।
जब शाम 8:30 बजे डॉक्टर पहुंची तो जांच में पता चला कि बच्चा तो पेट में ही मर चुका है। मगर फिर भी डॉ.सीमा गुप्ता ने बच्चे की धड़कने कम चलने की बात कहते हुए प्राइवेट अस्पताल प्रार्थना नर्सिंग होम भेज दिया और उसके जाने के बाद सैफई के लिए रिफर कर पर्चा मौजूद स्टाप को देकर चली गई।
जब इस मामले को लेकर मीडिया सक्रिय हुआ और अस्पताल पहुचा तो नर्स स्टाफ़ के अलावा कोई भी डॉक्टर मौजूद नही मिला।जब इस मामले में सीएमएस कटियार से बात कि तो उन्होंने सीएमओ को दोषी ठहराते
हुए बताया अस्पताल में दों महिला डॉक्टर हैं, जिसमें एक सोमवार से छुट्टी
पर गई है और मौजूद डॉक्टर सीमा गुप्ता की आज सुबह से सीएमओ साहब ने भर्ती
बोर्ड पुलिस लाइन में ड्यूटी लगा रखी थी। तो वही सीएमओ का कहना है कि जो महिला डॉक्टर छुट्टी पर गई है उसके सम्वन्ध में मुझे कोई भी जानकारी नहीं दी गई नहीं तो भर्ती बोर्ड के लिए अन्य कोई डॉक्टर की ड्यूटी लगाते।

आखिर जब कोई डॉक्टर अस्पताल में मौजूद ही नही था तो महिला को सुबह से शाम तक भर्ती ही क्यों रखा गया। जब जांच करने पहुची डॉक्टर को बच्चा पेट में मर जाने की जानकारी हो गई थी तो, महिला के परिवार को सही जानकारी क्यों नहीं दी और फिर प्राइवेट अस्पताल क्यों भेजा गया।
इस तरह की लापरवाही सरकारी अस्पताल में आये दिन देखने को मिलती रही है