जब तक विभीषण जिंदा हैं ??

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) के लिए आर एन ई पी का संदेश, 29 जून 2018। साथियों.. रामायण काल में दो बड़े गद्दार हुए हैं। अगर वे दोनों अपने भाईयों के साथ गद्दारी न करते तो, राम कभी जीत ही नहीं सकते थे। 
       पहला गद्दार सुग्रीव था, जिसने सत्ता के लालच में राम से मिल कर अपने बड़े भाई महाबली "बाली" का धोखे से वध करवाकर राम की गुलामी की। गुलामी के नशे में उसने अपने सैनिकों को युद्ध में झोक कर अधिकतम को मरवा डाला। परिणाम क्या हुआ?  इतना बड़ा  त्याग करने और जान माल की हानि के बावजूद भी सुग्रीव और उसके हनुमान, अंगद, नलनील, जामवंत जैसे शक्तिशाली योधाओं को बन्दर और भालू कहकर अपमानित किया जाता है। गुलामों का कोई भूत और भविष्य नहीं होता, वे हमेशा सेवक और नीच ही कहलाते हैं। वे चाहे दूसरों या मालिकों के लिए अपने प्राणों की बाजी ही क्यों न लगा दें, लेकिन कहलायेगें गुलाम, सेवक और नीच ही।  
      दूसरा गद्दार विभीषण था। जिसे संसार का अब तक का सबसे बड़ा गद्दार माना जाता है। अगर विभीषण सत्ता के लालच में अपने बड़े भाई रावण से गद्दारी कर राम से मिलकर रावण के भेद नही बताता तो रावण कभी हार ही नहीं सकता था। 
    विभीषण और सुग्रीव की तरह जो लोग अपने भाईयों, समाज और देश के साथ गद्दारी करते हैं, वे चाहे कितने भी बड़े कारनामे क्यों ना कर लें, वे गुलाम और गद्दार ही कहलाते हैं। वे कभी भी सम्माननीय और पूजनीय नहीं हो सकते। ये दोनों राम के परम भक्त माने जाते हैं लेकिन क्या कोई विद्वान बताऐगा कि, इनके कहीं कोई मंदिर नजर आते हैं ?  हाँ, विभीषण का तो एक छोटा सा मंदिर रामेश्वरम् मंदिर से 3-4 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में है, लेकिन वहाँ कोई जाना पसंद नहीं करता।