आरएसएस और कांग्रेस का एक ही मकसद है-मुखर्जी

अलीगढ़ (Aligarh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया रिपोर्ट, 10 जून 2018। आरएसएस और कांग्रेस का एक ही मकसद है-मुखर्जी।
प्रणव मुखर्जी ने आरएसएस की तारीफ की और कांग्रेस और आरएसएस का एक ही मकसद है यह कहा।
आज कांग्रेस का सेकुलर का झोला निकल गया और कांग्रेस पूरी तरह से नंगी हो गयी।कुछ लोग नंगी कांग्रेस को भी इस वजहसे देखने का साहस नही कर पा रहे है कि कही उनकी भी इज्जत चली न जाये।
  आरएसएस के संघ के प्रोग्राम को आज जानबूझकर सूना। सुनकर लगा कि समय बर्बाद किया है। मगर बहुजन लोगो को भारत का ब्राम्हण,बनिया मीडिया की बेवकूफ बनानेवाली खबरे पढ़ने के बजाय डायरेक्ट मुखर्जी और भागवत क्या बकते है यह सुना।
 पूरे प्रोग्राम में चंद लोग ही थे।मगर उसे राष्ट्रीय इश्यू बना दिया गया।संचालन करनेवाले को ठीक से बोलना तक नही आ रहा था।उस प्रोग्राम में मुखर्जी आकर क्या बोलते है यह सबको देखना था।पूरे प्रोग्राम में संस्कृत श्लोक का बार उच्चारण किया जा रहा था।क्यों कि वह संघ का प्रशिक्षण केवल ब्राम्हणो का ही था। नागपुर में हुए इस प्रोग्राम में मोहन भागवत ने अपने भाषण में सांकेतिक भाषा मे,इशारो इशारो में कुछ बाते कही। जैसे कि उसमे ब्राम्हणो का समाज पर नियंत्रण स्थापित करने की बात कही। मुखर्जी यह अच्छे सज्जन होने के नाते उन्हें संघ के प्रोग्राम में बुलाया है। कांग्रेस और आरएसएस में कोई अंतर नही होता। 
मोहन भागवत ने खुद कबूल किया डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी कांग्रेस के आंदोलन में दो बार कारवास भोगा, यहाँ(नागपुर) के कार्यकर्ता भी रह चुके है।
हमने जो कांग्रेस आरएसएस की माँ यह किताब लिखी उस बात का समाज मे बहुत प्रचार हो रहा है और  भागवत ने हमारे बात को मान्य किया है!!!
भागवत बार बार चिल्ला रहे थे कि हम सब एक है।हिन्दू राष्ट्र,हिन्दू राष्ट्रवाद की वे बात कर रहे थे।साथ ही उनके मुह से डीएनए विषय निकला।मगर डीएनए के विषय पर वे ज्यादा बोले नही। डीएनए से सिद्ध हुआ है ब्राम्हण विदेशी है।भागवत को खुली चुनोती है कि डीएनए के विषय पर हमसे बहस करे।ब्राम्हणो का डीएनए विदेशी है तो वह भारत के बहुजनो से एक कैसे हुए।
भागवत ने संघ के कार्यकर्ताओं को शील का महत्व समझाया।आजकल हर दिन भाजपा तथा आरएसएस के लोग अनाचार कर रहे है ऐसी खबरे आ रही है। भाजपा के नेता लड़कियों पर बल्तकार कर रहे है।मोहन भागवत शील की बात कर रहा है।भागवत के प्रवचन से लगा कि वह लोगो को बेवकूफ बनाने का ट्रेनिंग दे रहा है।
भागवत ने अपने पूरे भाषण में अधिक से अधिक संस्कृत श्लोक बोले।ब्राम्हण उस भद्दी भाषा का प्रयोग करके इशारे में बात किया कि यह सब 3 %विदेशी ब्राम्हणो के वर्चस्व के लिए ही चल रहा है। भागवत ने यह बात भी स्वीकार की की हम(ब्राम्हण) व्यवहार के बारे में  निकृष्ठ है। भागवत बार बार सनातन प्राचीन बल को इकट्ठा करना चाहते है।यानी वैदिक धर्म की वर्णव्यवस्था को स्थापित करने का समय आया है ऐसा इशारे में कहा।
 प्रणव मुखर्जी ने अपने लिखित भाषण में संघ का उद्देश्य की तारीफ की।संघ का उद्देश्य वही है जो कांग्रेस का है।मनु के दो बच्चे भागवत और मुखर्जी एक साथ बेवजह इकट्ठा नही आये। 
मुखर्जी में अपने अंग्रेजी भाषण में बहुत सारी फेकम फाक की। अपने भाषण में प्राचीन विश्विद्यालय का नालन्दा,तक्षशिला,विक्रमशिला का जिक्र किया मगर इन्हें नष्ठ किन बदमाशो ने किया यह नही बताया। यह मुखर्जी और भागवत के बाप जादावो ने नष्ट किया है। भारतीय राष्ट्रवाद का बार बार मुखर्जी ने जिक्र किया।वह राष्ट्रवाद आरएसएस का ही है यह भी दोहराया और इसके लिए संस्कृत श्लोक का आधार लिया।मैं अगर देश का pm होता तो आज ही इन दो गधे ब्राम्हणो को नागपुर में फांसी दे देता। चन्द्रगुप्त मौर्य,सम्राट अशोक का जिक्र अपने भाषण में मुखर्जी ने लिया।मगर यह विशाल साम्राज्य जिन लोगों ने खत्म किया उनकी तारीफ करना यह बंगाली ब्राम्हण नही भुला। बंगाली ब्राम्हण और कोकणस्थ ब्राम्हण साँप जैसे होते है इसका यकीन आज लोगो को आया। पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य साम्रज्य को हिंसा के द्वारा खत्म किया।
मुखर्जी ने चाणक्य की भी तारीफ की और संघ के ब्राम्हण प्रचारकों को सीधा संदेश दिया कि दुष्ट बनो वह शुंग और चाणक्य जैसे!!!
फिर मुगल, अंग्रेज जैसे लोगो का जिक्र किया ।मगर विदेशी ब्राम्हण अपने विदेशीपन को छुपाते है जरूर।गांधी का राष्ट्रवाद ही आरएसएस का राष्ट्रवाद है ऐसा विचार प्रस्तुत किया।नेहरू,गांधी,हेडगेवार,गोलवलकर यह सब एक ही मकसद के लिए काम कर रहे थे और वह है 3 %विदेशी ब्राम्हणो का देश पर कब्जा।
आज भारत दुनिया भूख,गरीबी,कुपोषण, अवनति सभी बातों में अव्वल आ रहा है ।और विदेशी ब्राम्हण सभी ब्राम्हण अब एक हो रहे है।कांग्रेस के ब्राम्हणो का उद्देश्य और आरएसएस,बीजेपी, कम्युनिस्ट ब्राम्हणो का एक ही उद्देश है।
इसलिए अब sc, st, ओबीसी,मुस्लिम,ख्रिश्चन, बौद्ध,सिख,जैन,लिंगायत सभी मूलनिवासी लोगो को एक होकर विदेशी युरेशयन ब्राम्हणो के सभी संस्था वो पर पेशाब करके लात मारनी चाहिए।
 आज मुझे खुसी इस बात की हो रही है कि मैंने जो किताब-कांग्रेस आरएसएस की माँ यह लिखी है उसका साक्षात्कार लोगो को अपने आंखों से हो रहा है।
 विदेशी ब्राम्हणो को कभी भी दोस्त मत मानो।
3 %विदेशी युरेशयन ब्राम्हण सभी एक हो जाओ इससे हमारा काम भी आसान हो जाएगा।जैसे अब कांग्रेस और आरएसएस के बीच कोई दूरी नही रही।अब राहुल गांधी को कौन जूता मारेगा देखते है!!!

(सोशल मीडिया व्हाट्सएप से सतवंत सिंह राना का लेख साभार लिया गया)