माझियों की समस्याओं का भान न पूर्व प्रधानमंत्रियों को था और न वर्तमान प्रधानमंत्री को

वाराणसी, उत्तर प्रदेश (Varanasi, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Dandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 13 जून 2018। 
माझियों की समस्याओं का भान न पूर्व प्रधानमंत्रियों को था और न वर्तमान प्रधानमंत्री को।
1967 में पर्दाशीन हुई फ़िल्म "मिलान" भले ही किसी काल्पनिक कहानी पर आधारित थी, परंतु इसमें अभिनीत किरदार चिल्ला चिल्ला कर यह संबोधित कर रहा था कि, नाव चलाने वाला व्यक्ति माझी ही था।
पूरे भारत में लोकगीत की संस्कृति में चाहे पूर्व हो, पश्चिम हो, उत्तर हो या दक्षिण या मध्य भारत हो,
वहाँ की संगीत सभ्यता में मल्लाह, माझी, केवट के वर्णन के बिना उसकी संगीतमय गरिमा सदैव अधूरी ही रही है।
"निषाद" को तो संगीत का प्राण माना गया है। परंतु भारत के संविधान में वर्णित इन सभी शब्दो का मतलब न देश के पूर्व के प्रधान मंत्री को था न आज के प्रधान मंत्री जी को है।
साभार दीपक सहानी, वाराणसी।