आज तो निषाद अधिकार की लड़ाई डॉक्टर संजय कुमार निषाद के अलावा कोई लड़ ही ही नही रहा-पूजाराम

आगरा (Agra), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 23 जून 2018। यह जो पाँच हज़ार साल का सभ्य समाज कहा जाने बाला कथन है उसका मतलव ही है कि इसकी शुरुआत निषाद संस्क्रति से ही हुई है। आर्यों का सीधा युद्ध निषादों से ही हुआ है। लेकिन निषाद संस्क्रति के विनाश का कारण आर्यो का षड्यंत्र, छल, कपट ही रहा है। और वो छल कपट की जंग आज तक जारी हैं ।
     बीच में बहुत सारे समाज सुधारक भी आए, लेकिन प्रभावी नहीं हुए। क्योंकि आर्यो के षड्यंत्रकारी छल, कपट के सामने वो आज तक जीत नहीं पाए। बुद्ध के प्रभाव को खत्म किया तलवार से, कबीर, पेरियार, अम्बेडकर जैसे महारथियों ने काम किया। मुग़ल और अंग्रेजो ने कईं काम किये, गुलामो को आर्यो के कब्जे से छुड़ाने के लिए। लेकिन वो भी सफल नहीं हुए। आज तो डॉक्टर संजय कुमार निषाद के अलावा कोई लड़ ही ही नही रहा।
      अगर लड़े नहीं, तो खत्म हो जाओगे। आपका विपक्षी ब्राह्मण है, था और रहेगा। उसकी ताकत किताबें हैं। जब तक मनुसमृत्ति जिंदा है, आप जीत नहीं सकते।
जय निषाद राज।