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गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 20 जुलाई 2018। राजनीति में हार एक ऐसी परिस्थिति है जिससे सभी को डर लगता है। जैसे
मुश्लिम को हिन्दू से, यादव को कुर्मी, से दलित जाटव को दलित पासी से, ब्राम्हण को ठाकुर से, और तो और  स्वजातीयता जैसे ठाकुर नेता-ठाकुर नेता से, ब्राह्मण नेता-ब्राह्मण नेता से, दलित नेता-दलित नेता से, आदि-आदी। आपस में यह भय और भयंकर हो जाता है। और इन्ही सभी को झेलते हुए जो सफल होता है, वह राजनीयतिक विजेता कहलाता है।
          निषाद पार्टी ने ऐसी कुछ परीक्षाओं को पार करते हुए गोरखपुर में विजय प्राप्त की, जिससे पूरे प्रदेश में निषाद पार्टी एक सिमिति दायरे में ही सही पर अजय हो चली है।
     मेरा संदेश उन निषाद वंशीय निषाद भाइयों से है, जो निषाद वंशीय हैं और निषाद पार्टी से जुड़े हैं या नही जुड़े हैं।
    जब कोई राजा बहुत मजबूत होता है तो बहुत से लोग उसके कमजोरियो पर ध्यान नहीं देते हैं और जैसा चल रहा है वैसा ही चलते रहे। यह सोचकर तटस्थ हो जाते है। परंतु जो निश्चयी होते और विजय के पथ के लिए रास्ते ढूढते रहते हैं, उनको उस राजा की एक कमजोरी ही विजय दिलाने की पूर्ण रास्ता बना देती है।
     भारत देश सदियों से कभी भी स्थिर शासक के अधीन नही रहा। जानते हैं क्यो, क्योकि जो राज करने वाले थे, उनकी संख्या यहां के मुलनिवशियो की तुलना में बहुत कम थी।
     हम निषाद वंशीय मूलनिवासी अधिक होने के बावजूद कभी संगठित नहीं हुए। इसलिए हम बार-बार परिवर्तित शाशको के अधीनस्थ अधीन होते गए।
      जिस आंतरिक राजनीतिक कलह से हम निषाद वंशीय आपस में लड़के महसूस कर रहे हैं। उससे कहीं ज्यादा कलह दूसरे सामाजिक वर्गो में है।
     आज हम पूरे उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता में, पूरे निषाद समाज को निषाद पार्टी के माध्यम से एकमेव करने में अन्य जातीय समाज की राजनीतिक तुलना में सबसे मजबूत है। जो एक शुभ संकेत है।
      सब कुछ सही रहा और आप लोग संगठित रहे तो, इस बार का परिवर्तित शासक या तो आपका निषाद वंशीय होगा या आपके सहारे  होगा।
(प्रस्तुति निषाद पार्टी)