स्विस बैंक में जमा कालाधन, वापसी की जगह जमा राशि डेढ़ गुना हो जाने पर विशेष रिपोर्ट

फतेहपुर, उत्तर प्रदेश (Fatehpur, Uttar Pradesh) एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो राम बहादुर निषाद की विशेष रिपोर्ट, 2 जुलाई 2018। 
साथियो,
      स्विस बैंकों में जमा काला धन वापस लाने का अभियान पिछले दो दशकों से चल रहा है लेकिन समस्या यह है कि जो लोग कालाधन वापस लाने वाले हैं, उन्हीं लोगों में से तमाम लोगों ने अपनी काली कमाई इन बैंकों में जमा कर रखी है। सरकार स्विस बैंक में जमा काले धन को उजागर करके उसे वापस देश में लाने के नाम राजनैतिक रोटियां तो सेंक रही है, लेकिन उसे वापस लाने और भंडाफोड़ करने में कन्नी काट रही है। कुछ लोगों के नाम अबतक उजागर हुये हैं, लेकिन जमा रकम का पर्दाफाश नहीं हो सका है।
‌      मोदी सरकार ने चुनाव के दौरान ही स्विस बैकों में जमा कालेधन को वापस लाने का संकल्प लिया था, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि मोदी जी का संकल्प आज तक पूरा नहीं हो सका। चार साल के कार्यकाल में स्विस बैंकों में जमा कालाधन भले ही वापस नहीं आ सका है किन्तु जमा करने का क्रम अनवरत जारी है और जमा धनराशि बढ़कर डेढ़ गुनी हो गयी है। कुछ लोगों का मानना है कि स्विस बैकों में बढ़ी डेढ़ गुना धनराशि नोटबंदी का प्रतिफल है और लोगों ने किसी तरह अपने नोट बदलकर स्विस बैंक में जमा कर दिया है। बैंकों ने इस घपले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सारे नियम कानूनों को ताख पर रखकर दो हजार नहीं चालीस पचास लाख बदल दिये।
         नोटबंदी के दौरान इस तरह के कई पर्दाफाश पुलिस एवं अन्य एजेंसियां करके बरामदगी कर चुकी हैं। बैंकों की भूमिका का भी पर्दाफाश हो चुका है और अब तक कई लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया है। यह बिल्कुल सही है कि स्विस बैंकों में जमा धनराशि वापस आने की जगह उसमें डेढ़ गुना वृद्धि होना हैरत की बात है। क्योंकि सरकार लगातार कालेधन पर अकुंश लगाने का प्रयास कर रही थी। बीते तीन वर्षों से इसमें गिरावट आ रही थी लेकिन गत दिनों स्विस नेशनल बैंक की तरफ से जारी किये गये आँकड़ों ने सभी को भौचक्का कर दिया है।
‌       पिछले साल 2017 में  स्विस बैकों में भारतीयों की जमा धनराशि तकरीबन सात हजार करोड़ के आसपास थी जबकि 2016 के मुकाबले पचास प्रतिशत ज्यादा है। सरकार के आग्रह पर स्विस बैंक या स्वट्जरलैंड सरकार एक समझौते के तहत अगले साल तक भारतीयों के खुले खातों की जानकारी देने पर राजी हो गयी है। अबतक स्विस बैंक अपने खातेदारों एवं उनकी जमा धनराशि का ब्यौरा देने के लिये बाध्य नहीं था इसीलिए लोग सारी काली कमाई स्विस बैंकों में जमा करते हैं।
      सरकार की इतनी सख्ती के बावजूद जमा धन राशि में डेढ़ गुनी वृद्धि होने का मतलब ग्राहकों को पूरी तरह गोपनीयता बनाये रखने का आश्वासन दिया जा रहा है। स्विस बैंक दशकों से यह खेल खेल रहे हैं और दुनिया भर में भ्रष्टाचार को संरक्षण एवं बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार की इतनी सख्ती के बावजूद इतनी बड़ी धनराशि स्विस बैंक पहुंच कर जमा हो जाना निश्चित तौर पर सरकार की विफलता माना जायेगा।
      सभी जानते हैं कि स्विस बैंकों में पैसा जमा करने वालों में अधिकारी, राजनेता, उद्योगपति आदि धनवान लोग आते हैं, जो रातों रात रंक से राजा हो जाते हैं। स्विस बैंक गोपनीयता की अपनी नीति के बल पर दुनिया भर के हरामखोर बड़े ग्राहकों का प्राश्रय दाता बना हुआ है। सरकार लम्बे समय से स्विस बैंक के इस नियम के खिलाफ आवाज उठा रही थी और लगातार भारतीयों खातेदारों का विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध कर रही थी। वहाँ की सरकार के साथ जो समझौता हुआ है अगर ईमानदारी से उसका पालन होता है तो अगले साल स्विस बैंकों में जमा भारतीयों खातेदारों की जानकारी मिल सकती है।
‌     लेकिन यह भी तय है कि स्विस बैंक के नियम बदलते ही उसका व्यवसाय आधा भी नहीं रह जायेगा और लोग मेहनत ईमानदारी की कमाई को दूसरे देश की जगह अपने देश में ही जमा करना ज्यादा बेहतर.समझेंगे।
‌    ।।धन्यवाद।।

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