आरएसएस दलालों को पालकर निषाद समुदायों में विखण्डन करा रही है

आगरा, उत्तर प्रदेश (Agra, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) रिपोर्टर रवी कुमार निषाद और राकेश कुमार वर्मा की निषाद पार्टी की रिपोर्ट, 18 जुलाई 2018। निषाद राजनीतिक दल रहे या न रहे लेकिन निषाद पार्टी तो बन गई और दिनोदिन बढ़ती चली जा रही है। अभी तक सिर्फ केवट, मल्लाह, वर्मन, सोंधिया, कहार, रायकवार सहित लगभग 715 जातियां अपने को निषाद मानती थीं, लेकिन अब इस वंश व्यवस्था में, कोल, गोड, राजभर, मीना, कोली, मुंडा, चमार आदि जो भी अपने आपको गुलाम वंश नही मानती, राज वंश मानती हैं और आर्यावर्त के पूर्व शासक रहा हैं और विदेशी आक्रमणकारियों से मुस्तैदी से लड़ीं हैं, वे समस्त लगभग 6000 जातियों का समूह अपने आप को निषाद मानकर शासक वर्ग पर गर्व महसूस कर रहा है।
चमार तो कह रहा है कि हम निषाद राजा चवर के वंसज हैं और असली निषाद तो हम हीं हैं।
           निषाद राज के उदबोधन मात्र से शासक वंश का बोध हो जाता है और कलेजा चौडा़ होकर गौरान्वित महसूस करने लगता है। सर सम्मान से ऊंचा हो जाता है।
      अब निषाद एकता रोकने पर भी रुकने वाली नहीं दिख रही है। दिन-प्रतिदिन पहाड़ होती चली जा रही है। अब सब कहना चालू कर रहे हैं कि ए बामन देवता, ये अपनी जातिपाँति संभारो। हमार राज पाट वापिस करो। तोहार तीन प्रतिशत आरछण हमेशा बरकरार रही। हमके आरछण नहीं चाहि, तोहके चाही। आपन झोली पकड़, अउर गली गली मालाफेरत, घूमते रहो।
हमें राम, कृष्ण 33 करोड़ नहीं,
सिर्फ निषाद भगवान चाहिए।
सत्ता और सम्मान चाहिए।
हमारे निषाद राजा ने राम का चरण वंदन नहीं किया। वे एक चक्रवर्ती सम्राट थे, राम एक बेघर वनवासी थे। इसी लिए उनको एकान्त बगिया में ठहरने का वंदोवस्त किया था।
मालूम नहीं, निषाद गुह्यराज महाराज के पिता जी, महाराज तीर्थराज, जिनके नाम से तीर्थ स्थल प्रसिद्ध है, ने देवासुर संग्राम के नायक राजा दशरथ को 13 बार युद्ध करके पराजित ही किया और उनका कुल निषाद तकनीकी से ही आगे बढा़ है। इसीलिए आर्यों के 33 करोड़ पूर्वज साल में एक बार घूमने, प्रकृति का चित्रण करने आते है।
निषाद राम से हर मायने में श्रेष्ठ हैं। उनका अपमान करना निषाद वंश के लिए असहनीय हो गया है। अब हकीकत पर पर्दा डालना बंद करो सच्चाई से बच नहीं सकते हो।
     आरएसएस दलालों को पालकर निषाद समुदायों में विखण्डन करा रही है। चापलूस, चमचे, जो निषाद समाज को आज तक बेचते आये हैं, ये गद्दार जीवन में कुछ नहीं कर पाये, वे चलें हैं, डॉ संजय कुमार निषाद को राह बताने। 70 साल के इतिहास में ये चमचे चापलूसी करते करते निषाद समाज को सभी गद्दार पार्टियों में एक एक करके बेचते रहे हैं। समाज इन गद्दारो की वजह से अपने वोट की कीमत नहीं समझ पाया। वहीं भाजपा, आरएसएस ने इन्हीं दलालो को पालकर निषाद समुदायों में विखण्डन करा रखा है। करोड़ों रूपये आरएसएस मंदिरों के माध्यम से धन धान्य से परिपूर्ण समाज को लूट ले गया और आज भी लूट रहे हैं। किन्तु इन गद्दारों की उनके खिलाफ औकात नहीं है जबान खोलने की। आज बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए समाज खुद के पैसों से पुनः अपने बच्चे का महल खड़ा कर रहा है। पुनः समाज राज पाठ लेने के लिए संघर्ष कर रहा है, तो ये चमचे टाँग खींचने से बाज नहीं आ रहे हैं।
      निषाद पार्टी एवं राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद का मूल उद्देश्य- मूलवासीयो के हाथ में सत्ता की मास्टर चाभी हो।
विचारधारा- हमलोग राजा के वंशज है। रूलिंग कास्ट थे।
सिद्धांत — मूलवासीयों को विचारधारा के आधार पर जोड़ना।
कार्यक्रम— नियमित पार्टी के नियन्त्रण, निर्देशन में शिक्षण- प्रशिक्षण, प्रबोधन, कैडर कैंप में नियमित आकर जानकार बनना औऱ बनाना, रैली, जयन्ती समारोह, अधिवेशन, संस्कार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से प्रचार प्रसार करने के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की टीम तैयार किया जाना है। अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए पार्टी के कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी बनकर, संवैधानिक अधिकार एवं आरक्षण प्राप्त कर, आर्थिक समस्याओं का समाधान करें।

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