फूलन देवी सहादत के महासंग्राम दिवस में चम्पा देवी पार्क में उमड़ा विशाल जनसमूह

चम्पा देवी पार्क, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Champa Devi Park, Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 25 जुलाई 2018।
फूलन देवी सहादत के महासंग्राम दिवस में चम्पा देवी पार्क में उमड़ा विशाल जनसमूह। पूर्व सांसद वीरांगना फूलन देवी के सहादत दिवस पर गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में निषाद पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूरे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के साथ मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड के साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सभी वक्ताओं ने फूलन देवी के हत्यारे को फांसी और निषादों की परिभाषित आरक्षण पर अपना जोर दिया। अभी कार्यक्रम सीगल रहा है।
 आज आसपास के सभी जिलों में होने के वावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

Comments

  1. 🏹 *नारी शक्ति निराली* 🏹

    दुर्गा, चंडी, न काली थी,
    फूलन नार निराली थी।

    देवी,महारानी न पट रानी थी,
    धन, शक्ति न ज्ञानी थी।
    वेणी, क्षत्री, न बाम्हन थी,
    निर्धन नार मल्लाहिन् थी।
    महल भवन, न अटारी थी,
    तीर, तमंचा न कटारी थी।
    फूलन नार निराली थीं ।।1।।

    रानीदुर्गा, लक्ष्मी न झलकारी थी,
    ऊँठ, हाथी न घुड़ सवारी थी।
    पदमा,आवन्ति न राजकुमारी थी,
    बेगम रजिया न सुल्तानी थी।
    चेरी, चेनम्मा न कर्मा रानीं थी।
    वो एक साधारण नारी थी।
    फूलन नार निराली थी ।।2।।

    खेली बचपन न जवानी थी,
    बालापन ब्याह बनी नारी थी ।
    सरोवर नाव न पतवारी थी,
    घर सुख न ससुराल प्यारी थी।
    बचपन की वो दुख यारी थी,
    फुलिया नाम की फुलवारी थी।
    फूलन नार निराली थी ।।3।।

    जब दुष्टों ने दामन दागी थी,
    तब बीहड़ की ओर भागी थीं।
    दामनी बनने मन में ठानी थीं,
    हाथ बंदूक यूं संभाली थी।
    दमन दुष्टों का कर डाली थीं,
    चामुंडा, कालका न कंकाली थी।
    फूलन नार निराली थी ।।4।।

    संकल्प वो मन में ठानी थीं,
    माँ शारद को छत्र चढ़ानी थी।
    चाक चौबंदी पहरे दारी थी,
    तलाश भीड़ में भारी थीं।
    पढ़ी लिखी न ज्ञानी थी,
    चढ़ सीढ़ी बोली जय भवानी थी।
    फूलन नार निराली थीं ।।5।।

    चढ़ा छत्र बंदूक दागी थीं,
    साहसी चकमा दे भागी थीं।
    बेलन से बंदूक तक करी तैयारी थीं,
    शैतानों में भय भारी थी।
    बीहड़ में खुशहाली थी,
    निर्धनों घर मनी दीवाली थी।
    फूलन नार निराली थी ।।6।।

    सड़क-संसद न संस्कारी थी,
    पास पैसा न सफारी थीं।
    शैतानों में हाहाकारी थी,
    चुनाव रण ललकारी थी।
    इंसानों में जय जयकारी थी,
    शोला बनी सूचम चिंगारी थी।
    फूलन नार निराली थी ।। 7।।

    हुई जीत बड़ी न्यारी थी,
    वो निर्धन, दलित
    पुजारी थी।
    बनी सांसद,बजी ताली थी,
    दुष्टों के लिये, कंकाली थी।
    करा दी हत्या जिनमें भृष्टचारी थी,
    निराली वीरांगना नारी थी।
    फूलन नार निराली थी ।।8।।
    चंडी दुर्गा न काली थी,
    फूलन नार निराली थी।

    *जय वीरांगना फूलनदेवी*
    *अमर रहे,*
    *अमर रहे।*
    *राजेन्द्र सिंह केवट*
    पवित्र जलाशय नगरी,जबलपुर

    ReplyDelete

Post a Comment

हमारे प्रयास को अपना योगदान देकर और मजबूत करें

हमरी एंड्रॉइड ऐप मुफ्त में डाउनलोड करें

हमारे चैनल की मुफ्त में सदस्यता लें

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें

निषाद पार्टी न्यूज़

न्यूज़ वीडियो

निषाद इतिहास