भाजपा की योगी सरकार में गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्तियों में ठाकुर बामनों का कब्जा

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 3 जुलाई 2018।  भाजपा की योगी सरकार में गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्तियों में ठाकुर बामनों का कब्जा। 2 जुलाई को गोरखपुर विश्वविद्यालय में 62 नये शिक्षकों की नियुक्ति हुई। 62 में 42 शिक्षक सिर्फ दो ही जातियों, ठाकुर और ब्राह्मण के हैं। 24 ठाकुर और 18 ब्राह्मण यानी 67.74 प्रतिशत शिक्षक या तो ठाकुर या ब्राह्मण ही हैं। जो कुल नियुक्ति के लगभग दो तिहाई हैं। इसमें भी इस बार ब्राह्मणों से ठाकुरों ने बाजी मार ली। 18 ब्राह्मणों की तुलना में, 24 ठाकुर हुए अर्थात  कुल पदों के 38.70 प्रतिशत पर ठाकुरों ने कब्जा कर लिया। ब्राह्मणों से करीब 10 प्रतिशत अधिक।
    कुल नियुक्तियों में ब्राह्मणों का प्रतिशत 29.03 है।
कोई पूछ सकता है कि ज्ञानी ब्राह्मणों की तुलना में ठाकुरों ने कैसै बाजी मार ली। अगर मुख्यमंत्री अजय सिंह विष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ और कुलपति विजय कृष्ण सिंह के रहते भी ऐसा न होता, तो आखिर कब होता? ब्राह्मण ऋषि वशिष्ठ के वंशजों को ठाकुर ऋषि विश्वामित्र के वंशजों ने पराजित कर ही दिया है।
       गोरखपुर में ब्राह्मण और ठाकुरों का संघर्ष काफी पुराना है। हरिशंकर तिवारी और विरेन्द्र प्रताप शाही के जमाने में तो  कितने लोग इस वर्चस्व की लड़ाई में मारे गये। फिलहाल गोरखपुर में अजय सिंह विष्ट के वर्चस्व के बाद गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में ब्राह्मणों के दिन ठाकुरों की तुलना में बुरे चल रहे हैं। फिर भी ब्राह्मण शंबूक के बंशजों के खिलाफ ठाकुरों के साथ एकजुट हैं।
 शंबूक के वंशजों को कितने पद मिले, इसका जायजा लेने से पहले थोड़ा लाला लोगों का जायजा ले लिया जाय। 2 लाला (श्रीवास्तव) लोग भी नियुक्त हुए हैं। लाला लोग शंबूक के वंशज हैं या वशिष्ठ-विश्वामित्र के तय नहीं हो पाया है। अंदर-अंदर ब्राम्हण-ठाकुर इन्हें शंबूक का वंशज मानते हैं, जबकि ये लोग अपने को वशिष्ठ-विश्वामित्र से जोड़ते हैं। कौन इस पचड़े में पड़े इसे छोड़ते हैं। इन्हें ब्राह्मण-ठाकुरों की गोल का मान लेते हैं।
      अब जरा शंबूक के वंशजों के की चर्चा। करीब 20 प्रतिशत पदों पर ओबीसी और दलित समाज के लोग भी नियुक्त हुए हैं।
      उर्दू विभाग में 2 मुसलमानों को निुयक्त करना पड़ा है। पता चला है कि कोई हिंदू इस योग्य नहीं था। दुखद है, योगी के गढ़ में संघी कुलपति के रहते म्लेच्छ की नियुक्ति?
 खैर नियुक्तियों का एक दौर और पूरा हुआ। 15 प्रतिशत से भी कम आबादी बाले ठाकुरों-ब्राह्मणों ने करीब 70 प्रतिशत पदों पर कब्जा कर लिया। ठाकुरों ने बाभनों को पराजित कर दिया। दोनों ने मिलकर शंबूक के करीब 70 प्रतिशत वंशजों को 20 प्रतिशत पद देकर राम राज्य की उदारता का परिचय दिया।
आज ओबीसी-एससी वर्ग के लोगों को राम मंदिर और सोचालय में फंसा दिया गया है और राम के वंशज इनके हक़ पर डाका डाक रहे हैं। यही है भाजपा-आरएसएस का असली राम राज्य।

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