नहीं रहे "ये भाई जरा देख चलो, आगे ही नहीं, पीछे भी" के लेख महा कवि, पद्मभूषण गोपाल दास नीरज

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) के लिए फ़ोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी की रिपोर्ट, 19 जुलाई 2018। नहीं रहे "ये भाई जरा देख चलो, आगे ही नहीं, पीछे भी" के लेख महा कवि,पद्मभूषण गोपाल दास नीरज।
हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार कवि गोपाल दास नीरज का आज 19 जुलाई की शाम को निधन हो गया। उनकी तबीयत मंगलवार को खराब हो गई थी। जिसके बाद उन्हें आगरा के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एम्स ले जाया गया था। जहां आज उनका निधन हो गया। 

गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरवली गांव में हुआ था। वह हिंदी मंचो के प्रसिद्ध कवि थे। फिल्मों में कई सुपरहिट गाने लिख चुके कवि गोपाल दास नीरज को अपनी लेखनी के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। 
नीरज जी को 1991 पद्मश्री से सम्मानित किया गया। नीरज को 2007 में पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान से भी सम्मानित किया था। बॉलीवुड में कई सुपरहिट गाने लिख चुके गोपालदास नीरज को तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड भी मिल चुका है।
       स्वतंत्र फोटो जर्नलिस्ट मनोज अलीगढ़ी ने महाकवि गोपाल दास नीरज जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पदमभूषण, पदमश्री गोपालदास नीरज हमारे प्रेरणा के श्रोत बने रहे। नीरज जी कवि, कलाकार, पत्रकार, छायाकार और उन सभी को जो कला के पुजारी थे को आगे बढ़ाने में भरपूर सहयोग किया करते थे। गोपाल दास नीरज जी का पिछले वर्ष जब ज्याद स्वास्थ खराब हुआ था, तब उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से युवाओं में जोश ही नहीं भरा बल्कि वो बिस्तर से उठकर बैठक गये। और उन्होंने भारत ही नहीं विश्व के कई देशों में भारत का गौरव बढ़ाया है वह सदा  हमारी यादों में बने रहेंगे। महाकवि, पद्मभूषण गोपाल दास नीरज नव अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में आखिरी सांस ली। उनके निधन का समाचार सुनते ही बॉलीवुड, साहित्य जगत सहित देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। 
एकलव्य मानव संदेश परिवार महा कवि नीरज जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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