मछुआ समुदाय को नसीहत

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो के लिए निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद का लेख, 1 अगस्त 2018
  मछुआ समुदाय को नसीहत
राष्ट्रपति के बेडरूम की खिड़की सड़क की ओर खुलती थी। रोज़ाना हज़ारों आदमी और वाहन उस सड़क से गुज़रते। राष्ट्रपति इस बहाने जनता की परेशानी और दुःख-दर्द को निकट से जान लेते थे।
राष्ट्रपति ने एक सुबह खिड़की का परदा हटाया। भयंकर सर्दी, आसमान से गिरते रुई के फाहे, दूर-दूर तक फैली सफ़ेद चादर। अचानक उन्होंने देखा एक कि बेंच पर मछुआ समुदाय का एक आदमी बैठा है। जो ठंड से सिकुड़ कर गठरी सा हो गया है।
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से कहा- उस आदमी के बारे में जानकारी लेकर उसकी ज़रूरत पूछें।
दो घंटे बाद प्राधन मंत्री ने राष्ट्रपति को बताया- सर, वो व्यक्ति  एक गरीब मछुआरा है। उसे ठंड से बचने के लिए एक अदद कंबल की ज़रूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा -ठीक है, उसे कंबल दे दो।
अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से पर्दा हटाया। उन्हें घोर हैरानी हुई कि वह गरीब मछुआरा अभी भी वहीं बैठा है। उसके पास ओढ़ने का कंबल अभी तक नहीं है।
राष्ट्रपति गुस्सा हुए और पीएम से पूछा- यह क्या है ? उस गरीब मछुआरे को अभी तक कंबल क्यों नहीं दिया गया ?
प्राधन मंत्री ने कहा- मैंने आपका आदेश सेक्रेटरी होम को बढ़ा दिया था। मैं अभी देखता हूं कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।
थोड़ी देर बाद सेक्रेटरी होम राष्ट्रपति के सामने पेश हुए और सफाई देते हुए बोले- सर, हमारे शहर में हज़ारों गरीब ऐसे ही हैं। अगर एक गरीब मछुआरे को कंबल दिया तो शहर के बाकी गरीबों को भी देना पड़ेगा और शायद पूरे मुल्क में भी। अगर न दिया तो आम आदमी और मीडिया हम पर भेदभाव का इल्ज़ाम लगायेगा।
राष्ट्रपति को गुस्सा आया - तो फिर ऐसा क्या होना चाहिए कि उस ज़रूरतमंद गरीब मछुआरे को कंबल मिल जाए।
सेक्रेटरी होम ने सुझाव दिया- सर, ज़रूरतमंद तो हर गरीब है। यदि आपके नाम से एक 'कंबल ओढ़ाओ, गरीब बचाओ' योजना शुरू की जाये। उसके अंतर्गत मुल्क के सारे गरीबों को कंबल बांट दिया जायें।
राष्ट्रपति खुश हुए। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की से परदा हटाया तो देखा कि वह गरीब मछुआरा अभी तक बेंच पर बैठा है। राष्ट्रपति आग-बबूला हुए। सेक्रेटरी होम तलब हुए।
उन्होंने स्पष्टीकरण दिया -सर, गरीबों की गिनती की जा रही है ताकि उतने ही कंबल की खरीद हो सके।
राष्ट्रपति दांत पीस कर रह गए। अगली सुबह राष्ट्रपति को फिर वही गरीब मछुआरा दिखा वहां। खून का घूंट पीकर रहे गए वो।
सेक्रेटरी होम की फ़ौरन पेशी हुई।
विनम्र सेक्रेटरी ने बताया- सर, ऑडिट ऑब्जेक्शन से बचने के लिए कंबल ख़रीद का शार्ट-टर्म कोटेशन डाला गया है। आज शाम तक कंबल ख़रीद हो जायेगी और रात में बांट भी दिए जाएंगे।
राष्ट्रपति ने कहा- यह आख़िरी चेतावनी है। अगली सुबह राष्ट्रपति ने खिड़की पर से परदा हटाया तो देखा बेंच के इर्द-गिर्द भीड़ जमा है। राष्ट्रपति ने प्राधन मंत्री को भेज कर पता लगाया।
प्राधन मंत्री ने लौट कर बताया -कंबल नहीं होने के कारण उस गरीब मछुआरे की ठंड से मौत हो गयी है।
गुस्से से लाल-पीले राष्ट्रपति ने फौरन से सेक्रेटरी होम को तलब किया।
सेक्रेटरी होम ने बड़े अदब से सफाई दी- सर, खरीद की कार्यवाही पूरी हो गई थी। आनन-फानन में हमने सारे कंबल बांट भी दिए। मगर अफ़सोस कंबल कम पड़ गये।
राष्ट्रपति ने पैर पटके -आख़िर क्यों? मुझे अभी जवाब चाहिये।
सेक्रेटरी होम ने नज़रें झुकाकर बोले: श्रीमान पहले हमने कम्बल अनुसूचित जाती ओर जनजाती के लोगो को दिया. फिर अल्पसंख्यक लोगो को. फिर ओ बी सी ... करके उसने अपनी बात उनके सामने रख दी. आख़िर में जब उस गरीब मछुआरे का नंबर आया तो कंबल ख़त्म हो गए।
राष्ट्रपति चिंघाड़े -आखिर में ही क्यों?
सेक्रेटरी होम ने भोलेपन से कहा- सर, इसलिये कि उस गरीब मछुआरे की जाती अनुसूचित जाति की सूची में नहीं थी और  वह आरक्षण की श्रेणी में आते हुए भी सूची नाम नहीं था, इसलिये उस को नहीं दे पाये और जब उसका नम्बर आया तो कम्बल ख़त्म हो गये.
नोट : यहां निषाद वंशियों के आरक्षण पर 70 साल से इसी तरह कबायद चल रही है और सभी पार्टियों द्वारा चुनाव के कहा जाता है कि हमको वोट दो, हम आपको आपका हक और आरक्षण देंगें, लेकिन आज तक किसी भी दल ने निषाद वंशियों के आरक्षण को लागू नहीं कराय।
जब सभी दलों को आज़माया जा चूका है और आज भी पूरे देश का निषाद मछुआरा समाज वंचित है तो उसका एक ही रास्ता है, साशन सत्ता में पहुंचा जाये। क्योंकि अधिकार सरकार देती है। सर्कार वोट से बनती है। वोट राजनीतिक पार्टी में पड़ते हैं। इसलिये हमने एक पार्टी निर्बल इन्डियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) पार्टी बनाई है। और आज यह पार्टी तेज़ी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों में 2017 के समय एक विधायक जिताकर लगभग 6 लाख वोट प्राप्त करके उत्तर प्रदेश में छठे नम्बर की वोट सेयरिंग में बन गई है और 2018 के लोकसभा और विधान सभा उपचुनावों में निषाद पार्टी ने महागठवन्धन के साथ चुनाव लड़कर भाजपा को करारी हार की चोट पहुंचाई है। अब निषाद वंशोयो से अपील की जाती है कि अपनी पार्टी को मजबूत बनाने के लिए आगे आएं।     जय निषाद राज