नेतृव के आदेश का सशब्द अनुपालन होना चाहिए

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 20 अगस्त 2018।  नेतृव के आदेश का सशब्द अनुपालन होना चाहिए। जब संगठन बनता है तो उसमें एक महत्वपूर्ण सिद्धांत होता है, नेतृत्व सिद्धांत। जो देश को लागू करने वाला नेतृत्व है। वह संगठन को साधन के रूप में उपयोग करके साध्य पूर्ति का काम करता है। अपने आप सिंद्धांत काम नहीं करता है। यदि सिद्धांत अपने आप काम करता तो संविधान में बहुत सारे सिद्धांत हैं और वह हमारे घर-घर में आकर हमारो समस्याओं का समाधान कर लिया होता। संविघान में जो सिद्धांत है उसे लागू करने के लिए लोकतंत्र का संगठन बनाया गया है। यदि उसमें आपका प्रतिनिधित्व नहीं है तो कुछ नहीं होगा। इसमें जो नेतृत्वकर्ता होता है, वह उस उद्देश्य को धरातल पर लागू करता है। इसलिए आपको कार्यप्रणाली के दायरे में रह कर कार्य करना होगा। यदि इस कार्य प्रणाली में नेतृत्व उद्देश्य पूर्ति के लिए आदेश-निर्देश देता है तो उसका सशब्द अनुपालन करना होता है। इसे आप तानाशाही कहते हैं, तो यह आपका वहम है। यह उद्देश्यपूतिं से संबंधीत बात है। अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष जो भी कार्यकर्ताओं को कहें कि जाओ और दो पैकेट सिगरेट लेकर आओ तो यह उद्देश्य में " शामिल नहींं है। नेतृत्व, देश की मर्यादा के अधीन होता है। कार्यं प्रणाली के दायरे में रहकर कार्य करना ही अनुशासन हैं। यदि नेतृत्व, उदेश्य की मर्यादा के अधीन आदेश है तो बिना किन्तु-परन्तु के सशब्द उसका अनुपालन होना चाहिए। यदि कार्यकर्ता को उद्देश्य पूर्ति की मर्यादा के बाहर का आदेश दिया जाता है तो उसे तुरंत नकार देना चाहिए। यह सभी के लिए हर चैनल पर लागू है। इसे समझने की आवश्यकता है। बहुत सारे लोग अपने सम्मान के बारे में सोचते हैं। इसका अर्थ है कि वह लोग अपने बारे में सोचते हैं। उसके समाज का प्रतिदिन अपमान हो रहा है और वह अपने सम्मान के बारे में ही सोच रहाहै तो इसका मतलब है कि उस आदमी की सोच भ्रष्ट हो गई है । सगठन ने उसकी सोच, उद्देश्य पर केंद्रित करने की कोशिश की थी। परंतु उसकी सोंच स्वयं के ऊपर ही केंद्रित हो गई । जब किसी की सोच उद्देश से हटकर अपने आप पर केंद्रित हो जाती है तो उसकी सोच भ्रष्ट हो जाती है। इससे कार्यकर्ता को विरत रहना चाहिए।

 "कार्यकर्ता के महत्वाकांक्षा की पूर्ती"
उ प्र में मा. मुलायम सिंह यादव और मा. कांशीराम जी की मिली-जुली सरकार थी। मा. कांशीराम जी दिल्ली से आकर लखनऊ हवाई अड्डे पर उतरे। उसी दोरान एक कार्यकर्ता 100 से 200 लोगों का मोर्चा लेकर हवाई अड्डे पर मुलायम सिंह यादव मुर्दाबादा, मुलायम सिंह यादव मुर्दाबादा करते हुए मा. कांशीराम जी के सामने आया। उसके पास आते ही कांशीराम जी ने एक थप्पड मारा और वह तुरंत उल्टा गिर गया। पत्रकार दोड़ते हुए उसके पास आए। उनके लिए बड़ा इष्यू मिल गया । उसे उठाते हुए पत्रकारों ने सवाल पूछा कि कांशीराम जी ने आप को थप्पड मारा, इसके बारे में आपका क्या कहना है? तब उस कार्यकर्ता ने जवाब दिया कि वह मेरे पिता समान हैं। उन्हें ऐसा करने का अघिकार है। वह कार्यकर्ता अपनी महत्वाकांक्षा पूर्ति के लिए और मा. कांशीराम जी की नज़र में चढने के लिए प्रदर्शन कर रहा था। लेकिन मा. कांशीराम जी अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य में लगे ये ।
        इस प्रकार अपने उद्देश्य के लिए मर्यादित व्यवहार करना होगा। इससे निश्चित रूप से उद्देश्य पूरा होगा। इस दिशा में आप लोग विचार करेंगे, अनुसरण और अनुपालन करेंगे।