रक्षा बंधन पर सपथ लें... बधाई के साथ...

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) सम्पादक/प्रकाशक का सन्देश, 26 अगस्त 2018। रक्षा बंधन पर सपथ लें... बधाई के साथ...
महा ठग आर्यों के अगुआ विष्णु ने अपनी चालों से इस देश पर कब्जा और राज करने के लिए अनेकों प्रकार की चलें चलीं। एक चाल के द्वारा बामन अवतार के रूप में धन तेरस के दिन महा दानी (जिसकी ख़ुशी में अमावश्या के दिन दीपावली मनाई जाती है) महा प्रतापी चक्रवर्ती महाराजा बली से तीन बचनों में उनका सब कुछ छीन लेने के बाद जब एक बायदा के अनुसार राजा बली की चौकीदार बनकर पाताल लोक में विष्णु को रहना पड़ा, तब काफी दिनों तक विष्णु के घर न पहुंचने पर लक्ष्मी जी परेशान रहने लगीं तब उन्हों ने नारद मुनि के द्वारा विष्णु के पता लगवाया। पता लगने पर लक्ष्मी जी भी विष्णु के बामन रूप की तरह अपना एक सुंदर कन्या का रूप धरकर माहा दानी राजा बली के पाताल लोक में भी पहुँच गयीं और राजा बली से तीन बचन की प्रतिज्ञा कराकर राखी बांध करके बदले में राजा विष्णु को चौकीदारी से मुक्त कराया था। और इस तरह मूलवासी राजा बली से आर्यों की ठगी का मार्ग पूरा हुआ था। 
ये कहानी बताती है कि आर्य कौम कितनी चालाक होती है। आदमी तो ठगियायी करता ही है और कहीं फस भी जय तो इनकी औरत भी ठगी करने में माहिर होती है। 
     आज भी यह परंपरा जारी है इन त्योहारों के नाम पर। त्यौहार का असली नाम है तुम्हारी हार। त्योहारों पर बड़ी बड़ी मिठाई की दुकानों से लेकर सभी तरह की दुकानों पर सभी चीजों महंगी और दोयम दर्जे की बिकती हैं। त्योहारों पर बिकने वाले हर सामान की सेकंड क्लास क़्वालिटी बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में बनाया जाता है और तेज़ बिक्री के माध्यम से जनता को परखने का भी मौका नहीं मिलता है। इस तरह साल में आने वाले सभी त्यौहार लुटाई के माध्यम बनते हैं इसमें अब सभी धर्मों के त्योहारों पर ऐसा ही होता है। 
इसलिये त्यौहायों से आम जनता को केवल ठगाई ही मिलती है और ठगों को कमाई। 

आज भी आर्यो के इस ठगयायी के सूत्र का महा त्यौहार रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है। और रक्षा सूत्र का मन्त्र पूरे साल हर कार्य में किया जाता है। 
वो सूत्र है 

 जो कलावा बाँधते समय मंत्र बोला जाता हैं 

 येन बद्धो बलि राजा  दानबेन्द्रो महाबला तेन त्वाम प्रपद्यये रक्षे माचल माचल:

तब राजा बली ने कहा था पति भिखारी बनकर आये तो सब कुछ ले गये और ये महारानी ऐसी आयीं की उन्हे भी लें गयीं। 

तभी से महा ठगी की याद में दीपावली और रक्षा बंधन के त्यौहार मनाये जाते हैं। 

आर्यों के वंसज आज भी ठगयायी में लगे हुए हैं, केवल अपने भले के लिए। जितने भी आज घोटाले होते हैं। फ्रॉड होते हैं। देश की गोपनीय जानकारी लीक होती हैं। 99 प्रतिशत आर्यों के वंसजों के द्वारा ही की जाती हैं। अगर वाकई में कोई भगवन इस दुनिया में है, तो इन सबसे क्यों नहीं बचता है ईमानदार को। क्यों नहीं ऊपर उठाता है गरीब को। इसलिये पाखंड बाद से बचें और सपथ लें समाज को सभी प्रकार की ठगाई से बचाने की। 
सपथ लें सभी को एक समान शिक्षा दिलाने की। 
सपथ लें सभी रक्षा करने की कैसे सुखी और समृद्ध बनें।
सपथ लें देश को दुनियां में नम्बर एक बनाने की।
सपथ लें धरती को हरा भरा बनाने की रक्षा की।
सपथ लें समाज को पाखंड और प्रोपेगेंडा से रक्षा की।

तभी रहेगी मानवता कायम।

सो मानवता की रक्षा की सपथ के साथ.....

आप सभी को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

आपका अपना 
जसवन्त सिंह निषाद
संपादक/प्रकाशक एकलव्य मानव सन्देश
कुआरसी, रामघाट रोड, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, 202002।
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