माझी को बांटने के लिए नई जाति सोंधिया बनाई पिछड़े वर्ग में म.प्र. भाजपा सरकार ने

रीवा, मध्य प्रदेश (Reva, Madhya Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश ब्यूरो रिपोर्ट, 30 अगस्त 2018। माझी को बांटने के लिए नई जाति सोंधिया बनाई पिछड़े वर्ग में म.प्र. भाजपा सरकार ने। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने माझी समाज को तोड़ने के लिए सोंधिया के नाम से नई जाती परिभाषित करके पिछड़े वर्ग में 93 नम्बर पर लिस्ट में रखा है।
वरिष्ठ समाज सेवी अधिवक्ता और निषाद पार्टी के प्रदेश संयोजक हरी मांझी के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने सोंधिया को पिछड़े वर्ग की सूची क्रमांक 93 में दर्ज करना दरअसल माझी समाज का ध्यान माझी मुद्दे से भटकाने के लिए यह कारनामा किया है। क्योंकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में माझी मसले के पिटीशनर सोहन लाल सोधिया वगैरह याचिकाकर्ता और सोंधिया सरनेम के लिए दावा आपत्ति करेगे तो उपनाम का बहाना करके पिटीशन खारिच कर दिया जाएगा, पर याचिका कर्तागण ने कोई गलती नही की। साथ ही सोंधिया सर नेम के लोग माझी समाज की लड़ाई में अच्छा योगदान दे रहे हैं, तो सरकार की एक गंदी मानसिकता है यह है कि यह अपने सरनेम के लिए परेशान हो जाएंगे तो माझी मसले की लड़ाई को छोड़ देंगे।
     लेकिन साथियों आपको पिछड़े वर्ग की सूची क्रमांक 93 में दर्ज सोंधिया के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि जितने भी लोग सोंधिया सरनेम लिखते हैं वह राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पास अपना सजरा और खसरा सहित आवेदन पत्र प्रस्तुत करें, सोधिया सरनेम है यह कोई जाति नहीं है, इसे सूची क्रमांक 93 से विलोपित किया जाए। क्योंकि सरकार राजस्व रिकॉर्ड देख कर के ही जाति प्रमाण पत्र जारी करती है। लेकिन किसी भी व्यक्ति के राजस्व रिकॉर्ड में सरनेम सोंधिया जरूर हो सकता है, लेकिन उसकी मूल जाति तो माझी लिखी है, कहार लिखी है, पटवारी अपने प्रतिवेदन में राजस्व रिकार्ड के आधार पर माझी, ढीमर या कहार जाति लिखेगा, जो आदिवासी की सूची क्रमांक 29 पर दर्ज है या पिछड़े वर्ग की सूची क्रमांक 12 पर दर्ज है। तो प्रशासन सोंधिया का प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी करेगा। सरकार के पास इसका विकल्प नहीं है।
    इसलिए ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हम सारे लोग एकजुट होकर के माझी मुद्दे पर पूरा ध्यान आकृष्ट करें, संघर्ष करें और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पास हजारों आवेदन भेजे जाए कि 93 नंबर से सोंधिया को विलोपित कर दिया जाए।