20 सितम्बर के समाचार आगरा जनपद की फतेहाबाद तहसील से

फ़तेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश (Fatehabad, Agra, Uttar Pradesh),  एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) रिपोर्टर संजय सिंह निषाद की रिपोर्ट, 20 सितम्बर 2018।
 गांव गांव में फैला वायरल बुखार
तीन गांवों में लगाये गए स्वास्थ्य शिविर
ब्लाक फतेहाबाद क्षेत्र में गांव-गांव में वायरल बुखार का प्रकोप होने के कारण घर-घर चारपाई बिछी हुई है। झोला छाप चिकित्सकों की पो बारह बनी हुई है। वायरल बुखार के प्रकोप के चलते गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गांव कुतुकपुर गोला, टीकैतपुरा खण्डेर एवं पीपल चौकी पर इलाज हेतु टीमें भेजी गईं।
    टीकैतपुरा खण्डेर में चिकित्सक डा.कुलदीप ने बताया कि टीकैतपुरा खण्डेर में 53 मरीजों का उपचार किया गया।जिसमें वायरल बुखार के 16, खांसी-जुकाम के 19 एवं खाज खुजली के 18 मरीज थे। सभी की जांच कर दवाएं वितरण की गईं।
    पीपल चौकी पर डा.शिम्भूदयाल के नेतृत्व में शिविर आयोजित किया गया। जिसमें कुल 46 मरीजों का उपचार किया गया। जिनमें बुखार के 16, खांसी-जुकाम के 15 तथा खाज-खुजली के 15 मरीजों का उपचार किया गया।
    गांव कुतुकपुर गोला में डा.चंद्र मोहन के नेतृत्व में शिविर लगाया गया। शिविर में कुल 145 मरीजों का उपचार किया गया। जिनमें 35 मरीज वायरल बुखार, खांसी-जुकाम के 55 मरीज तथा 55 मरीज खाज-खुजली के पाये गए। जिनका उपचार कर दवाएं वितरण की गईं। अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य फतेहाबाद डा.अतुल भारती ने जनता से अपील की है कि अपने-अपने मकानों के ईर्दगिर्द जलभराव न होने दें। बासी भोजन न करें। कटे फटे फलों का सेवन न करें। बुखार आने पर पानी की पट्टी शरीर पर मलें।


हम नहीं सुधरेंगे चाहे जितने भी करो जतन

कस्बा में खुले में फैंकी जा रही है बायोमेडिकल बेस्ट

निस्तारण ना होने से बढ़ रहा है संक्रामक रोगों का खतरा

आगरा के फतेहाबाद में स्वास्थ्य विभाग व प्रदेश की सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में दुकान खोलकर बैठे झोलाछाप चिकित्सासकों के खिलाफ छापामार कार्यवाही करने के कितने भी जतन कर ले, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अपनी दुकान खोलकर बैठे झोलाछाप चिकिसकों को कार्यवाही का कोई खौफ नहीं है। जब-जब स्वास्थ्य विभाग टीमों द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई करती है तब यह अपनी दुकानें बंद कर भाग जाते हैं या सेटिंग कर दुकानों को चलाने का काम करते रहते हैं। यह झोलााछाप मरीजों की जान से तो खेलते ही हैं साथ-साथ बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण ठीक प्रकार सेे ना कर इसे खुले में फेंकने से भी नहीं चूक रहे हैं।
    इस समय मौसमी बीमारियों का प्रकोप अपनी चरम सीमा पर फैला हुआ हैै। इससे बुखार, खांसी, जुकाम, खुजली आदि प्रकार की अनेक बीमारियों के मरीज घर-घर में देखे जा रहेे हैं। डॉक्टरों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। ऊपर से झोलाछाप व पैथोलॉजी लैब संचालकों द्वारा डंके की चोट पर खुलेआम सड़कों और नालियोंं में फेंका जा रहा है।बायो मेडिकल बेस्ट। जिसका का निस्तारण सही ढंग से ना होने से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। झोलाछाप द्वारा मरीजों का इलाज करने के बाद सिरिंज, गौज समेत अन्य बायोमेडिकल बेस्ट को सड़कों पर, व नालियों में  फेंकने से इन्हें पशु भी खा जाते हैं। यही नहीं इनमें पढ़े सिरिंज किसी के पैरों में भी लग जाएगा तो  यह भी गंभीर खतरा पैदा कर देती हैं।
    अगर देखा जाए तो इन दिनों झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने वालों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग द्वारा छापामार कार्यवाही की जा रही है। लेकिन झोलाछाप व पैथोलॉजी संचालकों द्वारा बिना किसी खौफ के मरीजों को दवा देने के बाद निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट को खुलेआम सड़कों पर फेंका जा रहा है, जो अनेक प्रकार की जानलेवा बीमारियां फैलने का खतरा पैदा कर रही हैं।
   वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉक्टर का कहना है कि, ऐसे डॉक्टर और पैथोलॉजी संचालकों को के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने पैथोलॉजी व हॉस्पिटल संचालकों को चेतावनी दी है कि वे बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में ना फेंके। उसे मानक के हिसाब से नष्ट कराने का काम करें। अगर कोई भी हॉस्पिटल संचालक व पैथोलॉजी संचालक बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकते हुए पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी।