गवार, मूर्ख, लालची, उल्लु, फेकू

दिल्ली (Delhi), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया रिपोर्ट, 1 सितम्बर 2018। गवार, मूर्ख, लालची, उल्लु, फेकू, एक ऐसा समाज है, जिसके लोग जब तक किसी पार्टी में थैला उठाने लायक नेता नहीं बनते हैं तब तक उस समाज के जातीय मंचो पर जाकर अनुसूचिति जाति आरक्षण के लिए भोंकार मार-मार कर समाज के मंच पर रोते हुए भाषण शब्द से सम्मोहित करते हैं। लगता हैं कि पूरे समाज की गरीबी, लाचारी बेरोजगारी का सभी दुख इन्ही को घेर लिया है। जब तक इस समाज को अनुसूचिति जाति का अधिकार नहीं दिला देंगें तब तक इनके आंसू नहीं सुखेंगे।
    पर जब थोड़ा बहुत उस समाज के कारण पार्टियां पूछने लगती हैं तो, कोई नीला वस्त्र धारण कर निलाम्बर बन, कोई भगवा वस्त्र पहन भगवान बन, कोई स्वेत वस्त्र पहन स्वेताम्बर बन, उस पार्टी के लिए पिछड़ा वर्ग का बड़ा-बड़ा अनुष्ठान करने के लिए उसी जातीय समाज में जाकर ताल ठोककर बोलते हैं चलिए आइए आप सभी पिछड़े हैं। आप लोगों को हम और हमारी पार्टी पिछड़े होने का सबूत देगी!!
   अरे महामानुभावों कुछ दिन पूर्व तो अनुसूचिति जाति के लिए भोंकार मार-मार कर आँसू बहा रहे थे, आज थोड़ी पूंछ बड़ी हो गयी तो हनुमान की तरह लपेटवाने लगे क्या बात है!!
    पहली लाइन का जो भी पदवी आप पाठक जन को अच्छा लगे इन महामानवों को सहृदय अर्पित कर दीजिए!!
   आज कल राजनीतिक पार्टियो के लिए पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों को सफलतापूर्वक सफल बनाने में लगे एक विशेष जातिवर्ग की हकीकत!!
(महेंद्र निषाद की वाल से)
"ये चित्र किसी पोखरी का नहीं है-
सिद्धार्थनगर की गढ्डा मुक्त सड़क, मतलब एक हाइवे है"