देश के कानून मंत्री बहुत बड़े वाले बेशर्म है ??

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh), सोशल मीडिया रिपोर्ट, 25 सितम्बर 2018। प्राधन मंत्री चोर है या नही यह साबित होना अभी बाकी है लेकिन यह सिद्ध हो चुका है कि नथुने फुला फुला कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कानून मंत्री बहुत बड़े वाले बेशर्म है।
कल जिस 2012 की किसी अखबार में छपी रिपोर्ट को प्रेस कॉन्फ्रेंस में लहरा लहरा कर कानून मंत्री दिखा रहे थे उन्हें यह रिपोर्ट खुद ही पढ़ लेना चाहिए क्योंकि 2012 में रॉफेल बनाने वाली कम्पनी डसाल्ट ने जिससे करार किया था वह अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस नही थी बल्कि मुकेश अम्बानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की Reliance Aerospace Technologies Limited (RATL) थी जिसकी फैक्टरी बैंगलोर में लगने वाली थी बाद में RIL ने डिफेंस एवं एयरोस्‍पेस के क्षेत्र में कदम रखने से पीछे हट गई थी, जबकि जिस रिलायंस को मोदी जी ने कांट्रेक्ट दिलवाया हैं उस सौदे के दो हफ्ते पहले ही बनाया गया था जी हां अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस 28 मार्च 2015 को पंजीकृत की गयी थी मोदी जी की मदद से ही रिलायंस डिफेंस पार्टनर दसॉल्ट का पार्टनर बन पाया था।
भारत ने जैसे ही दसों के साथ कॉन्ट्रैक्ट में हस्ताक्षर किए, रिलायंस दसों संयुक्त उद्यम ने तुरंत ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया, जो असल मे भारत सरकार की कंपनी HAL को मिलना चाहिए था।
     जिस तरह से सेना को आगे करके रॉफेल डील का बचाव किया जा रहा है यह समझना आवश्यक है कि घोटाला राफेल विमानों को खरीदने में नहीं है घोटाला तो यह है की इन विमानों को ज्यादा कीमत पर खरीदा जा रहा है और वह भी उन शर्तों के साथ है जो भारत के लिए पूरी तरह से अनुचित हैं। मोदी द्वारा किये गए इस सौदे में समझौते के सभी मूल उद्देश्यों को खत्म कर दिया गया है। भारत को सिर्फ विमानों की जरूरत नहीं है बल्कि हमे लागत प्रभावी तकनीक की आवश्यकता भी है, जिस मेक इन इंडिया का ढोल मोदी जी पीट रहे थे रॉफेल डील उसके बिलकुल उलट है।
    कल कानून मंत्री बोल रहे थे कि इस नए रॉफेल सौदे से भारत मे रोजगार उत्पन्न होंगे लेकिन उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि UPA में रॉफेल के मूल सौदे के समय भारत में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से 108 जेट विमानों का निर्माण भी किया जाना था जो कि असीम नौकरिया और व्यापार के मौके उत्पन्न करता लेकिन मोदी सरकार तो सारे विमान फ्रांस से तैयार किये जा रहे हैं उससे कैसे रोजगार मिलेगा।
      लेकिन एक बात कानून मंत्री ने बिल्कुल सही की हैं जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं कि मोदी सरकार द्वारा करवाई गई दसॉल्ट वाली डील में सिर्फ अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस ही नही है और भी कई कम्पनियां शामिल हैं दरअसल मोदी जी के परम मित्र अदानी ने 2016 में इजरायल की अलबिट कंपनी के साथ साझेदारी की है जिसमे अडानी की कम्पनी किसी 'अनाम' एयरक्राफ्ट में लगाने के लिए हेलमेट माउंटेड सिस्टम बनाएगी।
ये देश के कानून मंत्री की बेशर्मी।
(साभार लिया गया है ग्रीश मालवीय की वाल से, दिनेश सहानी नॉएडा द्वारा संकलित)

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