विकास में पीछे हैं, बांदा जिले के यमुना के तटवर्ती निषादों के गांव

बांदा, उत्तर प्रदेश (Banda, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रामआसरे निषाद की रिपोर्ट, 23 सितम्बर 2018। बांदा जसपुरा ब्लाक के सबादा गांव में दीनदयाल का डेरा, रामलाल का डेरा, जगुवा डेरा, विकास के लिए तरस रहे हैं। विकास में पीछे हैं, बांदा जिले के यमुना के तटवर्ती निषादों के ये गांव।
यहाँ से सबादा के लिए कच्चा मार्ग है, जिसकी दूरी 3 किलोमीटर है। 2014 में मरम्मत की गई थी। अब यह पूर्ण रूप से मार्ग खराब है। गांव के लोगों को किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ केन्द्र ले जाना हो तो, एम्बुलेंस या वाहन को 3 किलोमीटर दूर खड़ा रखना पड़ता। और मरीजों को या समान को, बैलगाड़ी या मोटर साइकिल पर लेकर जाना पडता है। रास्ता सही न होने पर शादी विवाह या शुभ अवसर के समय में सामान लाने ले जाने में भी लोगों को काफी असुविधा होती है।
     स्वच्छता अभियान के तहत ग्राम प्रधान द्वारा गांव में अभी तक किसी भी लाभार्थी को शौचालय उपलब्ध नहीं करवाया है। और न कोई सफाई कर्मी गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल की सफाई के लिए उपलब्ध है। रसोईघर भी टीन के छप्पर का बना हुआ है। स्कूल के आसपास कचरा पड़ा हुआ है। यहाँ पर 2 स्कूल हैं, प्रा. विद्यालय दीनदयाल का डेरा और प्रा. विद्यालय रामलाल का डेरा। इन प्रा. विद्यालय पर अध्यापक सुबह देरी से आते हैं और बच्चों को खाना खिलाकर दिन के 11:15 तक चले जाते हैं। दोनो विद्यालयों पर अध्यापक भी अच्छी शिक्षा न देकर यहाँ के बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।