भाजपा का निषाद वंशियों के लिए फिर धोखा-ईं. प्रवीण कुमार निषाद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (klavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 10 सितम्बर 2018।
         निषादो आप तो राम के नाम पर
         हमको राजा बनाने के लिए वोट देते रहो
         उतराई के हकदार हो,
         लेकिन हम देंगे नहीं-योगी/मोदी
तुरैहा, मझवार, गोंड अनुसूचित जाति के लोगो को अच्छी तरह समझ लेना चाहिये कि उनकी लड़ाई कोई नहीं लड़ेगा।
भाजपा का निषाद वंशियों के लिए फिर धोखा यह कहना है गोरखपुर के सांसद ईं. प्रवीण कुमार निषाद का।
भाजपा सरकार ने आज तक किसी भी पिछडें, दलित,गरीब़, किसान, बेराजगार नौजवान, मछुआ समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया। जब इनको सरकार बनानी होती है, तब पिछड़े, दलित, गरीब़, किसान, बेराजगार नौजवान, मछुआ की याद आती है। लेकिन जब सरकार बन जाती है तो इन्हें तेजपत्तें की तरह फेक दिया जाता है।उदाहरण स्वरुपः जैसे सब्जी जब बनती है तो तेजपत्ता स्वाद बढ़ाता है और भोजन से पहले फेक दिया जाता है। मुख्यमंत्री जी यह पौराणिक, त्रेता, द्वापर युग नहीं है, नाही आप राम हैं। यहाँ लोकतंत्रा की लड़ाई है, जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी। अगर आप में राम जी कूट-कूट वास कर रहे है तो छोटे भाई केशवमौर्य या किसी मछुआ के बेटे को गद्दी देकर भरत-राम के पुण्यदायी युग की शुरुआत कर लेते। ये लोग भी राम राज्य की परिकल्पना करते हैं। निषाद के डी.एन.ए में राम भक्ति है, उनका इशारा था निषाद मछुआ समाज को कि तुम राम भक्ति करो, राजनीति नहीं, श्री राम जी को नाव से गंगा पार उतारा, खेवाई आज तक नही ली। योगी जी को 4 लाख निषाद वंशीयों ने गोरखपुर से जिता-जिता कर, इतना जिताया कि मुख्यमंत्री बन गये। लेकिन जब आधिकार की बात आती है तो कोर्ट देगा, राम मंदिर कोर्ट बनाएगा और मछुआ आरक्षण सहित मछुआ के सभी संवैधानिक अधिकार अगर कोर्ट ही देगा तो फिर निषाद मछुआ/पिछ़डा/दलित आपको वोट क्यों दे!! समझ से परे है।        भारतीय जनता पार्टी ने जितने भी वादा किये उसको पूरा नहीं किया। मछुआ समुदाय गोंड और मझवार तुरैहा की पर्यायवाची जातियों के लिए जो शासनादेश जारी हुआ है उसे योगी जी तत्काल लागू क्यों नहीं करवा रहे हैं। कृषि मंत्रालय से अलग केंद्र में मत्स्य मंत्रालय, मछुआ आयोग, पूरे देश में मछुआरों का अवलोकन कर उनको एस.सी./एस.टी. का राष्ट्रीय स्तर पर लाभ पहुचाना था। वर्तमान में फिर से भाजपा हम मछुआ/पिछ़डें/दलितों को लुभावने वादे कर रही है लेकिन ये समुदाय जाग चुका है। अपने मान, सम्मान, स्वाभीमान, रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा, राजनीति में हिस्सेदारी की लड़ाई वह खुद लड़ रहा है किसी बैसाखी की जरुरत नहीं।

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