काश ऐसा भारत देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ हो जाय

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh) एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh), सोशल मीडिया रिपोर्ट, 20 सितम्बर 2018।
देश   : सर्बिया
राजधानी  : बेलग्राद

सर्बिया का एक गांव डोकाट जिसकी आबादी लगभग 265 लोगों की है इस गांव में तकरीबन अधिकतर बड़ी उम्र के लोग हैं जो 50 साल या उससे ऊपर के डोकाट में बच्चों की पैदावार में कमी और जनरेशन गैप की वजह से उस गांव में मौजूद एक प्राइमरी स्कूल को इस वजह से बंद करना पड़ा कि वहां कोई भी बच्चा या बच्ची पढ़ने वाला नहीं था
      सर्बिया के इस गाँव में निकोलीना नामी एक बच्ची जब स्कूल जाने के काबिल हुई तो सर्बिया की गवर्नमेंट ने स्कूल दोबारा 7 साल बाद खोलने का एलान किया निकोलीना की टीचर मैलिका मैकेज है जो नीकोलीना के लिए हर रोज स्कूल आती है टीचर इस बच्ची को इस बात का एहसास नहीं होने देती कि वह क्लास में अकेली पढ़ने वाली है !

दूसरा मामला- देश -जापान!
राजधानी-टोक्यो!

 जापान में चलने वाली एक ट्रेन ,सुदूर उत्तर के एक द्वीप कामी शिरातकी को मेनलैंड से जोड़ती है । तीन साल पहले  पर्याप्त यात्री ना मिलने के कारण उस ट्रेन को बंद करने का फ़ैसला लिया गया था !लेकिन तभी ट्रेन कम्पनी को पता चला ,उस ट्रेन से रोज़ एक लड़की अपने स्कूल जाती है ।
        रोज़ एक अकेली लड़की ही उस ट्रेन की यात्री है । इस ख़बर के बाद ट्रेन बंद करने का फ़ैसला टाल दिया गया । तय किया गया ,जब तक उस बच्ची की स्कूलिंग पूरी ना हो तब तक ट्रेन चलाई जाए ,साथ ही ट्रेन की टाइमिंग भी उस बच्ची के अनुकूल किया जाए ।पिछले तीन साल से वो ट्रेन रोज़ सुबह 7:04 को उस बच्ची को लेने आती है और शाम 5:08 बजे छोड़ने जाती है ।

ये दोनो ख़बर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है !कैसे एक देश अपने दूरस्त प्रांत में रहने वाले एक मात्र स्टूडेंट का ख़याल रखती है , उनके लिए अपने एक अत्यंत सामान्य नागरिक की आवश्यकताओं की पूर्ति कितना महत्व रखती है ! कैसे एक बच्ची के लिए बंद प्राथमिक पाठशाला को खोल दिया जाता है 7 साल बाद !
साथ ही एजुकेशन के लिए जापान सरकार की प्रतिबद्धता भी दिखाई देती है!मुझे समझ नहीं आता था ,जापानी इस क़दर अपने देश से कैसे प्यार करते है । जापानियों के देशप्रेम के क़िस्से सुनने के बाद सहज यक़ीन नहीं होता था ! पर अब समझ आया क्यों जापानी अपने देश पर मर मिटते है !जब एक देश अपने नागरिकों का इस क़दर ख़याल रखेगा तो स्वाभाविक है ,उस देश के लोग अपने देश पर जान न्योछावर करेंगे ।
अब सोचने वाली बात यह है दुनिया में ऐसे भी देश है! जहां एक बच्चे के लिए स्कूल खोल दिया जाता है! जापान जैसे देश में एक बच्ची को लेने ट्रेन स्टेशन तक जाती है! जहां से कोई दूसरी सवारी नहीं चढ़ती! क्या कभी यह देश भी ऐसा बन पाएगा यहां तो पता नहीं कितने बच्चे सरकारी व्यवस्था और घटिया प्रबंधन के कारण जन्म लेते ही अपना दम तोड़ देते हैं! जागरूकता की कमी नेताओं के लालच लोगों की मानसिकता जब तक ठीक नहीं होगी तब तक ऐसा कोई किस्सा इस देश में सुनने को नहीं मिल सकता!
काश ऐसा भारत देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ हो जाय !!
(कापी हरिगोविंद मल्लाह द्वारा
Ravi Bhushan की वाल से)