फ़िरोज़ाबाद में निषाद आरक्षण के लिए रेल रोकने वाले निषाद पार्टी के पदाधिकारियों को मिली जमानत

फ़िरोज़ाबाद, उत्तर प्रदेश (Firozabad, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) रिपोर्टर निर्मल कुमार वर्मा की रिपोर्ट, 25 सितम्बर 2018। फ़िरोज़ाबाद में निषाद आरक्षण के लिए रेल रोकने वाले निषाद पार्टी के पदाधिकारियों को मिली जमानत
 7 जून 2018 को निषाद आरक्षण के लिए हुए रेल रोको आन्दोलन में राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद युवा मोर्चा हिरण्य कश्यप प्रान्त के अध्यक्ष इंजी. हरिओम निषाद, निषाद पार्टी के आगरा मंडल अध्यक्ष बाबा बालक दास, फिरोजाबाद जिला अध्यक्ष भूपेंद्र निषाद, श्रीनिवास व अन्य आंदोलनकारियों के ऊपर सरकार के दबाद में जीआरपी द्वारा गलत धराएं लगा कर भविष्य उजाड़ने का काम किया गया।
 
 25 सितम्बर दिन मगलवार को मा. जिला कोर्ट फिरोजाबाद ने बेल मंजूर कर दी है। जिसकी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता मो. वसीम उद्दीन अंसारी के द्वारा की गयी। जमानत बहस के दोरान हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट को नजीरें एवं कानून पर विचार किया गया। निषाद पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने रिहाई के बाद एकलव्य मानव संदेश के संवाददाता से बात करते हुए बताया कि हमें अदालत पर पूरा विस्वास था। कोर्ट ने निष्पक्ष फेसला दिया। हम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता व समर्थकों ने आन्दोलनकारियों का माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया।     
                           सभी कार्यकर्ता व समर्थकों ने कहा कि आज पब्लिक भाजपा से नाराज है और 2019 के लिए भाजपा सरकार जो सपना देख रही है, मछुआ समुदाय उसे साकार नहीं होने देगा। मछुआ समुदाय के उत्तर प्रेदश में सर्वादिक वोट हैं। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों मेंं से 25 सीट पर 3.5 लाख से ऊपर, 20 सीट पर 2.5 लाख से ऊपर, 15 सीटो पर 2 लाख से ऊपर, शेष सीटों पर 1.5 लाख से अधिक वोट बैक होने के बाद भी यह समाज सभी राजनैतिक पार्टियों का शिकार होता रहा है।
      सभी पार्टियों ने अधिकार देने का बादा किया और बाद में धोखा दिया। भाजपा ने और भी कमाल किया है। घोषणा पत्र में लिख दिया की भाजपा सत्ता में आएगी तो मछुआ विजन, मछुआ मंत्रालय, अनुसूचित जाति का आरक्षण, तालघाट, बालू, मोरगं, खनन, पुश्तैनी जीविका के संसाधन, मछुआ समुदाय के लिए पूर्व की भांति आरक्षित करेगी। मा० प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गंगा पुत्रों का दर्द और मा० मुख्यमंत्री योगी जी ने मछेन्द्रनाथ के वंशजों के हक़ अधिकार की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़कर आरक्षण देने का वायदा  किया था। परन्तु सत्ता में आते ही मछुआ समुदाय को हाशिये पर ला कर बेहाल जिन्दगी जीने के लिए मजबूर कर दिया।
      आज इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। थक हारकर मछुआ समुदाय ने निर्णय लिया है कि जाटवों की भांति जब तक हक़ नहीं मिलता, तब तक यह लड़ाई और संघर्ष डा० संजय निषाद जी  के नेतृत्व में जारी रहेगा।
          संविधान में मिला मछुआ समुदाय का एस०सी० का आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। इसको लेकर कार्यकर्ता व  समाज अभी भी नाराज है। समस्त मछुआरों के 17 अतिपिछड़ी जातियो को 21.12.2016 व 22.12.2016 के  शासनादेश के अनुसार अनुसूचित जाति के रूप में परिभाषित कर सुविधा देना को आदेश है। साथ ही 31.12.16 के शासनादेश के अनुसार मछुआ समाज की सभी जातियों, जेसे  (निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, कहार, कुमार, प्रजापति, धीवर, बिन्दभर, राजभर, बाथम, तुरेया, माझी, मछुआ आदि ) को ओ0बी0सी की सूचि से निकालकर, सभी को अनुसूचित जाति की सविधा देने के लिए सभी विभागों को आदेश दिया गया है। मा0 हाईकोर्ट इलाहाबाद ने दिनाक 29.03.2017 को स्टे हटाकर शासनादेश अनुसार सभी को अनुसुचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है। परंतु तहसीलों में आवेदन करने पर तहसीलदार कहते हैं कि इस समय का नया शासनादेश लाओ, के आरोप लगाकर प्रमाण पत्र नहीं दे रहे है ।                                                                            इसलिये जब तक आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक निषाद पार्टी आन्दोलन करती रहेगी ।
     कोर्ट से रिहाई के समय निषाद पार्टी के सर्वश्री निर्मल वर्मा (मिडिया प्रभारी), देवेन्द्र कुमार (युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष), राजेश कुमार (मूलवासी सेना जिलाध्यक्ष), कोमलसिंह निषाद (आगरा जिलाध्यक्ष), सोखीराम वर्मा (पूर्व विधान सभा प्रत्यासी फतेहाबाद), अस्वनी कश्यप (नगर अध्यक्ष यु०मो), मुकेश निषाद (प्र.वि.स शिको.), नरेश कुमार, विष्णु (अ.वि.स.फिरो.), देवेन्द्र कश्यप (जिलाध्यक्ष राष्ट्रिय निषाद एकता परिषद), संत कुमार, किशन वर्मा (जि. उपा. फिरो.) आदम सिंह, राजकुमार, जय सिंह, देवेन्द्र कुमार निषाद, राकेश कश्यप, देवेन्द्र राजपूत, बंटू निशाद, अजय गोरख, सीटू निषाद आदि उपस्थि थे।