दशहरा से पहले इनको क्यों नहीं जलाते हो ?

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया रिपोर्ट, 11 अक्टूबर 2018। दशहरा आ रहा है और हर साल की तरह आप इस बार भी रावण को‌ जलायेंगे,
क्योंकि-
रावण ने सीता का सिर्फ अपहरण किया था (बाकि उसके साथ किसी तरह का कोई गलत व्यवहार नहीं किया था)
अब आप यह बताइये कि, जब आप रावण को सिर्फ अपहरण के लिये सजा के तौर पर हर साल जलाते हैं, तो
उस लक्ष्मण को क्यों नहीं जलाते, जिसने एक महिला (शूर्पनखा) की नाक सिर्फ इसलिये काट दी, क्योंकि उसने लक्ष्मण के सामने शादी का मात्र प्रस्ताव रखा था ?
उस भगवान हनुमान को क्यों नहीं जलाते, जिसने‌ पूरी लंका में आग लगा दी, जिस वजह से उस आग में मासूम बच्चे, बेकसूर लोग जलकर, तड़पकर‌ मर गये ?
उस भगवान राम को क्यों नहीं जलाते, जिसने पतिव्रता सीता के‌ चरित्र पर शक करते हुये, उसकी अग्निपरिक्षा ली थी ?
उसी भगवान राम को क्यों नहीं जलाते, जिसने सीता‌ को उस वक्त घर से निकाल दिया, जिस वक्त वो गर्भवती थी ?
उस भगवान शिव को क्यों नहीं जलाते, जिसने अपने ही पुत्र की गर्दन सिर्फ अपने अहंकार की वजह से काट दी और फिर उसे जीवित करने के लिये एक बेजुबान, बेकसूर जानवर हाथी को मार दिया, ऐसे अहंकारी और अन्यायी को क्यों नहीं जलाते हो आप ?
और
सबसे पहले तो उस ब्रम्हा‌ को क्यों नहीं जलाते, जो इस सृष्टि का रचियता है, जिसने यह पूरी दुनिया बनायी और उसने अपनी ही बेटी‌ का बलत्कार किया था,
उस कपटी, बलत्कारी, ब्रम्हा को‌ क्यों नहीं जलाते‌ हो आप लोग ?
सीता को हाथ तक भी न लगाने वाले रावण का गुनाह बड़ा है या फिर‌ इन अत्याचारियों का, जिन्हें आप भगवान बनाकर पूजते हैं ?
इस सवाल का जवाब खुद से‌ पूछो, और अगर दिमाग साथ दे तो‌ फिर बहिष्कार करो दशहरे का, इन अत्याचारी भगवानों का। जरुरी नहीं जो किताबों में, टीवी में दिखाया गया हो वही सच हो, ये सब मनुवादियो की करामात है।
मत‌ मनाओ कोई दशहरा, दिवाली। गधे मत बनो, कि आंख बन्द करके बस चले‌ जा रहे हो।
इंसान बनो, अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करो।
(ख़ुशी अम्बेडकर की वाल से साभार लेकर जनहित में प्रकाशित)