प्रयागराज निषाद रखा जाए इलाहाबाद का नाम-ईं.प्रवीण कुमार निषाद


गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 17 अक्टूबर 2018। गोरखपुर के सांसद ईं.प्रवीण कुमार निषाद ने अपने एक वक्तव्य में कहा है कि प्रयागराज निषाद रखा जाए इलाहाबाद का नाम।

      इलाहाबाद का नाम बदलने पर गोरखपुर के सांसद ईं. प्रवीण कुमार निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुये कहा है कि वे प्रदेश की जनता को गुमराह न करें और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज निषाद रखें। क्योंकि प्रयागराज निषाद राम के समय में वहां के राजा रहे हैं और ये बात प्रदेश की जनता को पता होना चाहिए। 

    सांसद प्रवीण निषाद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2019 के चुनाव करीब आते इलाहाबाद का नाम प्रयाग कर दिया। लेकिन, उन्हें प्रदेश की जनता को इतिहास बताना चाहिए कि प्रयागराज निषाद इलाहाबाद के राजा रहे हैं। उन्हें इलाहाबाद का नाम प्रयाग की जगह प्रयागराज निषाद रखना चाहिए। 

    प्रयागराज निषाद तीन भाई थे। प्रयागराज निषाद, तीर्थराज निषाद और श्रृंगऋषि निषाद। तीर्थराज निषाद के बेटे का नाम राहुल निषाद था, जिन्हें गुह्यराज निषाद के नाम से हम लोग पूजते हैं। ये निषादों की राजधानी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनका पूरा नाम लेना चाहिए।

     उन्होंने कहा कि इलाहाबाद को संगम नगरी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि संगम निषाद भी वहां के राजा रहे हैं। जो प्रयागराज, तीर्थराज और श्रृंगऋषि निषाद के पिता थे। 2019 का चुनाव करीब आते ही इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया जा रहा है लेकिन योगी आदित्यनाथ प्रदेश की जनता को पूरा इतिहास नहीं बताना चाहते हैं। उन्हें प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि प्रयागराज निषाद कहां के राजा थे और उन्हें इलाहाबाद का नाम प्रयागराज निषाद रखना चाहिए। 

      गोरखपुर सांसद ईं. प्रवीण निषाद ने कहा कि 2014 के चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस आए थे। उन्होंने कहा था कि वह निषादों को उनका अधिकार दिलाने के लिए आए हैं। लेकिन साढ़े चार साल बीतने के बाद भी उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया। निषाद वंश के लोगों को आरक्षण का अधिकार आज तक नहीं मिल पाया है।

     सांसद ईं. कुमार निषाद कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर का नाम नहीं बदलेंगे। क्योंकि गोरखपुर नाम उनके पूर्वजों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में वे ईंट पूजने गए थे। उन्हें पता है कि भगवान श्रीराम और गुह्यराज महाराज अच्छे मित्र रहे हैं। 

    उनका कहना है कि उन्हें तो भगवान श्रीराम और गुह्यराज महाराज दोनों की मूर्ति वहां स्थापित करना चाहिए। इसके साथ ही इलाहाबाद का नाम प्रयागराज निषाद रखना चाहिए।