ओबरा नगर पंचायत में बिना काम के ही धन की हो रहा है बंदरबांट-अधिशाषी अधिकारी

ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश (Obra, Sonbhadra, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यरो चीफ राम विलास निषाद की रिपोर्ट 21 अक्टूबर 2018। ओबरा नगर पंचायत में बिना काम के ही धन की हो रहा है बंदरबांट यह कहना है नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी का।
    सोनभद्र जनपद की ओबरा नगर पंचायत अध्यक्ष के पति नगर पंचायत में बड़े पैमाने पर भष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।नगर पंचायत में बिना काम कराये ही धन का बंदरबाट किया जा रहा है। यह आरोप नगर पंचायत ओबरा के अधिशासी अधिकारी टी एन चौबे ने लगाया है। उधर, नगर पंचायत अध्यक्ष के पति ने आरोपों को झूठा बताया है। टी एन चौबे ने मीडिया से मोबाइल फोन पर कहा कि भष्टाचार का विरोध करने पर अध्यक्ष के पति उन्हें प्रताड़ित करते हैं।
     श्री चौबे ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत अध्यक्ष पति फर्जी तरीके से कागज पर बड़े पैमाने पर रिश्तेदारों, नातेदारों सहित पार्टी नेताओं को भी ठेका पर रखकर बिना कार्य कराये लाखों रुपये का बंदरबाट कर रहे हैं।
     चौबे ने बताया कि इस समय ओबरा नगर पंचायत में संविदा कर्मियों सहित ठेके पर कुल करीब 240 कर्मियों को प्रति कर्मी 7500 रुपये प्रतिमाह पर रखा गया है। जब कि कभी भी इतने कर्मी कार्य पर दिखाई नही देते हैं। इस माह से सभी संविदा कर्मियों सहित ठेके पर रखे कर्मचारियों के खाते में वेतन भुगतान करने का आदेश दे देने से नाराज होकर अध्यक्ष पति ने हमे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है। आगे बताया कि नगर क्षेत्र से बाहर सेक्टर दस स्थित मलिन बस्ती में लगभग डेढ़ करोड़ का कार्य कराया गया। बिना टेंडर कराये ही नगर पंचायत में करीब साढ़े तीन करोड़ से अधिक का काम कराया गया जा चुका है। नगर की साफ-सफाई के लिए बनी चार टीम में, प्रत्येक टीम में सफाई कर्मियों के अलावा चार सफाई नायक, चार सुपरवाइजर, चार सफाई निरीक्षक हैं। बावजूद इसके नगर की साफ-सफाई बेपटरी है।
     चिल्डन पार्क की देख भाल के लिए 35, पानी टँकी पर 28 और पम्प हाउस पर 15 कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं। पहले जहा ढाई लाख का डीजल खर्च होता था। अब वही पांच लाख रुपये का डीजल खर्च हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में अध्यक्ष पति के हस्तक्षेप एवं मनमानी किये जाने से नगर का विकास कार्य ठप हो गया है।नगर पंचायत अध्यक्ष पति संजय बैसवार ने बताया कि अधिशासी अधिकारी से हमारी मुलाकात 20 दिनों से नहीं हुई। तो हम कैसे प्रताड़ना कर रहे हैं। उनका आरोप बेबुनियाद है। रही बात ठेके पर रखे गये कर्मयो की तो उनमें नगर पंचायत के बाबू सहित अधिशासी अधिकारी के भी कई आदमी रखे गये हैं।