अंधविश्वास से दूर रहें, सतर्क रहें !!

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट, 20 अक्टूबर 2018। 
समाज को आईना-
रावण जलने पर लोग मरते हैं,
गणेश विसर्जन पर लोग मरते हैं,
कांवड़ लाते समय लोग मरते हैं,
सत्संग में लोग मरते हैं,
गंगा स्नान पर लोग मरते हैं
वैष्णोदेवी यात्रा पर लोग मरते हैं,
अमरनाथ यात्रा पर लोग मरते हैं,
बद्रीनाथ यात्रा पर लोग मरते हैं,
जग्गनाथपूरी यात्रा में लोग मरते हैं
होली पर लोग मरते हैं,
दीवाली पर लोग मरते हैं,
आदि त्योहारों और जगहों पर लोग मरते हैं जबकि ये सब देवी देवता और ईश्वर की आस्था के केंद्र हैं। जब लोग मरते हैं तो देवी, देवता और ईश्वर कहाँ चले जाते हैं। मदद करने क्यो नहीं आते? मीडिया के पत्रकार भाई पुलिस, प्रशासन, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से सवाल करते हैं, और उन्ही को जिम्मेदार ठहराते हैं। जबकि सवाल करने हैं तो देवी- देवताओं, ईश्वर से करो, वही जिम्मेदार हैं ऐसे हादसों के लिये। अन्यथा लोगों को बताओ कि देवी देवता ईश्वर कुछ नहीं है। दुनिया में इनके चक्कर में पड़ के कोई अपनी जान न गवाएं। 
          भाइयो, बहनों अब तो समझ जाओ कि, देवी, देवता ईश्वर सिर्फ काल्पनिक और बनावटी हैं। इनके नाम पर कुछ लोगों का व्यापार और धंधा चल रहा है। इसलिए ये आपके दुख में कोई साथ नही दे सकते। दुख में सिर्फ आपका साथ पुलिस, प्रशासन, समाज, परिवार, सरकार, डॉक्टर, पैसा, शिक्षा, और आपकी समझदारी काम आती है।
मुख्य सन्देश-
अंधविश्वास से दूर रहें, सतर्क रहें।

जब शुद्र को पढ़ना भी पाप था तब बंदर भी पत्थर पर जय श्री राम लिख रहे थे, तब बंदर को शिक्षा किसने दिया।                           जब देवी-देवताओं के पास अपार शक्तियाँ थीं तो हथियार क्या आलू छिलने के लिए रखे हुए थे ?
 अफसोस यह नही कि
धर्म का धंधा हो रहा है,
अफसोस तो इस बात का है कि
पढ़ा लिखा भी अंधा हो रहा है !!!
     
       भारत दुनिया का इकलौता देश है जहाँ मिट्टी की मूर्ति को देवी कह कर कपड़ा पहनाया जाता है और जिन्दा औरत को नंगा करके घुमाया जाता है !
सीता को कौन उठा के ले गया-श्रीराम जी को नहीं मालूम!  
सीता को कहाँ ले जाया गया-श्रीराम जी को नहीं मालूम!  
लक्ष्मण की मूर्छा भंग करने के लिए बूटी कहाँ मिलेगी-श्रीराम जी को नहीं मालूम!  रावण कैसे मरेगा-श्रीराम जी को नहीं मालूम !  
दो छोटे-छोटे बच्चे लव और कुश को मारने के लिए पूरी सेना भेज दी, वो किसके बेटे हैं-श्रीराम जी को ये भी मालूम नहीं!   
हँसी आती है जब लोग कहते हैं, दुनिया चले ना श्रीराम के बिना।
शिक्षित भारत, विकसित भारत!!
पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया!!

दिमाग की बत्ती जलाइए !
अॅधविश्वास दूर भगाइए !!
पाखंड का पर्दाफाश-
हम जिस समय बिजली के तार को पकड़ते हैं, करेंट हमें उसी समय लगता है ।
जिस समय कुत्ते को छेड़ते हैं, कुत्ता उसी समय काटता है।
आग में जिस समय हाथ डालते हैं, हाथ उसी समय जलता है।
जिस समय कोई हमें मारता है, चोट उसी समय लगता है, दर्द उसी समय होता है।
किसी को जहर दे दिया जाए तो जहर का असर उसी समय तुरंत शुरू हो जाता है।
दवाई की खुराक जिस समय लेते हैं उसी समय दवाई असर करना शुरू करता है।
मगर देवी देवता की पूजा करके जिस समय उनको खुश करते हैं, उनके आशीर्वाद, पूजा का असर उसी समय क्यों नहीं शुरू होता है ?
लक्ष्मीजी की पूजा करने के बाद हम धनवान क्यूँ नहीं बन जाते हैं ?
सरस्वतीजी की पूजा करने के बाद हम ज्ञानी और बुद्धिमान क्यूँ नहीं बन जाते हैं ?
हनुमानजी की पूजा करने के बाद हम बलशाली क्यूँ नहीं बन जाते हैं ?
गणेशजी की पूजा करने के बाद हमें रिद्धि सिद्धि क्यूँ नहीं प्राप्त हो जाता है ?
कोई हमें वरदान देता है तो उसका असर उसी समय क्यों नहीं शुरू होता है ?
कोई हमें श्राप देता है तो उसका असर उसी समय क्यों नहीं शुरू होता है ?
देवी देवता का अनादर करने वाले का नुकसान उसी समय क्यों नहीं होता है ?
भगवान को गाली देने वाले का नुकसान उसी समय क्यूँ नहीं होता है ?
सत्यनारायण कथा करने के तुरंत बाद सारे दुःख समाप्त क्यूँ नहीं हो जाते हैं ?
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हीं बीमारी तुरंत क्यूँ नहीं ठीक होता है ?
मगर दिमाग से पैदल लोगों को कितना भी समझाओ की देवी-देवता, भगवान नाम की कोई चीज इस दुनियाँ में है हीं नहीं  ब्राह्मण तुमलोगों को बेवक़ूफ़ बन रहा है, पागल बना रखा है। इनके पल्ले कुछ नहीं पड़ना।
तथागत बुद्ध की शिक्षाओं के अनुरूप जीवन यापन किजिये। देवी-देवता, भगवान, आत्मा, भूत-प्रेत, वरदान-अभिशाप, स्वर्ग-नरक, भाग्य, नसीब ये सब बेकार की बातें हैं। इनमे अपना बहुमूल्य समय बर्वाद न करें।
आपके मेहनत और पसीने की कमाई को हड़प करने के लिए धूर्त ब्राह्मणों ने आपके सामने पाखंड रच रखा है।
दिमाग की बत्ती जलाओ, अन्धविश्वास दूर भगाओ !
जय विज्ञान, जय संविधान !