पिछड़े वर्ग में अति पिछड़े के आरक्षण की बात निषाद वंश का दुश्मन और भाजपा का दलाल ही कर सकता है

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) एडिटोरियल रिपोर्ट, 25 अक्टूबर 2018। पिछड़े वर्ग में अति पिछड़े के आरक्षण की बात निषाद वंश का दुश्मन और भाजपा का दलाल ही कर सकता है। निषाद वंश की जातियां-धीवर, धीमर, कहार, कश्यप, बिन्द, रायकवार, बाथम, मेहरा, चाई, केवट, मल्लाह, माझी, गुड़िया, धुरिया आदि भारत की आज़ादी के समय से ही अनुसूचित जाति के आरक्षण के लिए अपनी लड़ाई लड़ते रहे हैं। कई प्रदेशों में इनको अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाती का आरक्षण मिला हुआ है। लेकिन एक ही व्यक्ति कई कई नामों से जाने जाने जैसे-माल्लाह, केवट, निषाद, सहानी, माझी सभी मझवार की ही पर्यायवाची हैं। कश्यप, कहार, तुरैहा, बाथम, मेहरा, रायकवार सभी तुरैहा या गोंड की ही पर्यावाची हैं। लेकिन सरकारों की लापरवाही से ये पिछड़े में भी हैं। लेकिन पहली बार 2016 के आखिर में उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव की सरकार ने इनको परिभाषित आरक्षण का लाभ देते हुए तुरैहा, गोंड और मझबार के अरक्षण के लिए आदेश जारी किया था। जिसको इलाहबाद हाई कोर्ट में चुनती दी गई और 29 मार्च 2017 को इलाहबाद हाई कोर्ट ने लगा हुआ स्टे हटा दिया था। और प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश किये थे। लेकिन उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार नहीं चाहती है कि इन जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ मिले। क्यों की अनुसूचित जाति का लाभ अगर उत्तर प्रदेश में दिया गया तो 2021 की जनगणना में उत्तर प्रदेश में अनुसूचितों की संख्या 30 से 35 प्रतिशत हो जायेगी और अनुसूचितों को आरक्षण आवादी के आधार पर देना होता है। इसलिये भाजपा ने इन जातियों के आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए, 7 जून 2015 में गोरखपुर के मगहर में अपनी जान देने वाले वीर शहीद अखिलेश निषाद के साथियों और परिजनों को तोड़ने के लिए 27 अक्टूबर को अपने सहयोगी पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री ओमप्रकाश राजभर को लगाया है कि आप पिछड़े वर्ग में ही आरक्षण के बंटवारे की मांग करो, यानि 27 प्रतिशत आरक्षण में 3 हिस्से कराकर पिछड़े वर्ग में ही आपस में संघर्ष कराकर इनकी एकता को कमजोर करके 2019 के लोकसभा चुनाव जीते जा सके। ओमप्रकाश राजभर और जय प्रकाश निषाद जैसे दलालों और तीतरों के सहारे निषाद वंश की एकता को भंग करके निषाद पार्टी की बढ़ती मजबूती कोकमजोर करने की भी भाजपा की यह एक बड़ी चाल है। क्योंकि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ.संजय कुमार निषाद जी ने अपनी चालों से उत्तर प्रदेश की गोरखपुर जैसी मजबूत और मुख्य मंत्री आदित्य नाथ योगी की सीट सपा, बसपा, लोकदल आदि के महागठवन्धन के सहारे जीतकर अपने अरक्षण के दावे को और मजबूत किया था। और उसी का परिणाम था कि 3 लोकसभा और एक विधान सभा के उप चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में योगी और मोदी का जादू फ़ैल हो गया था। अब यही नज़ारा 2019 में देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश में भाजपा को 10 सीट जीतना भी मुश्किल होने वाला है। चुनाव जीतने के लिए उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वोट बैंक निषाद वंशीय को तोड़ने के लिए भाजपा ने आज करोड़ों रुपए कुछ भूखे और शैतान लोगों पर न्यौछावर करना प्रारंभ कर दिया है। इसकी सुरुआत गोरखपुर चुनाव हरने के बाद ही कर दी गई थी।
27 अक्टूबर को भाजपा द्वारा प्रयोजित मंत्री ओमप्रकाश राजभर की रैली में जाने वाले वही निषाद होंगे जिनको व्यक्तिगत लाभ दिखाई दे रहा होगा या जिनको पैसे दिये जा रहे होंगे। इस लिये अब निषाद वंशियों को तय करना है कि जिस अनुसूचित जाति के आरक्षण के लिए वीर शहीद अखिलेश निषाद ने अपनी कुर्बानी दी थी तो क्या उसे पिछड़े वर्ग के बंटवारे वाले अरक्षण के लिए लगाया जाये। अगर ऐसे लोग अखिलेश निषाद की कुर्बानी को अपने लाभ के लिए बर्बाद करने में लगते हैं तो इस समाज को कोई भी नहीं बचा सकता है।
जागो भाजपा की चालों से बचो।
पिछड़े के बंटवारे का आरक्षण नहीं,
अनुसूचित के लिए संघर्ष करने से पीछे मत हटो।
दलाल और मक्कारों से सावधान रहो।
जय निषाद राज

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